अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। सिख साम्राज्य के जरनैल बाबा दीप सिंह के नाम से मुगल फौजें खौफ खाती रही और उनका दबदबा इस कदर था कि मुगल राज के अत्याचारों से उन्होंने निजात दिलाई। सिखों की बारह मिसलों में से शहीदां मिसल (अंबाला क्षेत्र) का जिम्मा बाबा दीप सिंह को मिला था, जिन्होंने अपने बूते एक ऐसा साम्राज्य स्थापित किया, जिस में अत्याचार की जगह नहीं थी। उनकी जयंती, 26 जनवरी को, गुरुद्वारों में मनाई जाएगी, जिसमें कार्यक्रम होंगे।
अंबाला क्षेत्र में मुगल खौफ खाते थे बाबा दीप सिंह से
बाबा दीप सिंह का जन्म 26 जनवरी 1682 में हुआ था, जिन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी के सान्निध्य में अमृतपान किया और शस्त्र विद्या भी सीखी। संत स्वभाव होने के चलते उन्होंने बाणी भी लिखी, जबकि एक सिपाही होने के नाते बाबा दीप सिंह ने धीरे-धीरे कर मुगलों से टक्कर लेनी शुरू की और अत्याचारों को खत्म करना अपना लक्ष्य बना लिया। अंबाला के आसपास बाबा दीप सिंह ने काफी समय सक्रियता दिखाई। बताया जाता है कि मुगल फौज के सिपाही महिलाओं का अपहरण कर ले जाते रहे, जबकि बाबा दीप सिंह ने शहीदां मिसल के जरनैल होते हुए मुगल फौजों को जोरदार टक्कर दी। वे इन अपहृत महिलाओं को छुड़वाते और उनको घरों तक सुरक्षित पहुंचाते थे। उनकी मिसल में शामिल सिख योद्धा इसी पर पूरी नजर रखते और जहां पर भी मुगल फौज आक्रमण या अत्याचार करती, वहां पहुंचकर उनका मुकाबला करते। अंबाला के आसपास शहीदां मिसल की सक्रियता के चलते मुगल फौज अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाई। उल्लेखनीय है कि सिख साम्राज्य की कुल बारह मिसलें थी, जिनका मकसद अत्याचारियों का मुकाबला करना था।
गुरुद्वारों में सजाये जाएंगे दीवान
बाबा दीप सिंह को समर्पित प्रभात फेरी व कीर्तन समागम का आयोजन कैंट के पंजाबी गुरुद्वारे में किया जाएगा। शहीद बाबा दीप सिंह सेवा सोसायटी के अध्यक्ष हरविंदर सिंह नीटू ने बताया कि 26 जनवरी को सुबह 6 बजे पंजाबी गुरुद्वारा से प्रभात फेरी निकाली जाएगी। यह प्रभात फेरी क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से होकर गुजरेगी। इसी तरह 26 जनवरी को ही सायं 6 बजे से 9 बजे तक कीर्तन समागम होगा। इस में रागी मनिंदर सिंह श्रीनगर सहित परमजीत सिंह व अरविंदर सिंह शबद कीर्तन करेंगे। यह आयोजन धन-धन बाबा दीप सिंह जी सेवक सोसायटी व नौजवान खालसा सेवक जत्था अंबाला छावनी द्वारा कराया जा रहा है।