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मौसम विभाग का अलर्ट, 4 जुलाई तक झमाझम बारिश, बढ़ सकती है दिक्कतें

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मौसम विभाग का अलर्ट, 4 जुलाई तक झमाझम बारिश, बढ़ सकती है दिक्कतें
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। मौसम विभाग ने चार जुलाई तक झमाझम बारिश की संभावनाएं जताई हैं, वहीं वीरवार को दोपहर में बढ़ी उमस और गर्मी ने परेशानी बढ़ा दी। हालांकि जिस तरह से मौसम विभाग ने बारिश की संभावनाएं जताई हैं, उसे देखते हुए अंबाला में जलभराव की स्थिति के लिए लोगों को तैयार रहना होगा। दावा किया जा रहा है कि प्रशासन ने इंतजाम किए हैं, लेकिन डीसी अंबाला इन इंतजामों से संतुष्ट नजर नहीं आ रही हैं। डीसी शरणदीप कौर बराड़ का कहना है कि अधिकारियों की बैठक ली गई है और निर्देश दिए गए हैं कि सफाई कार्य व अन्य जरूरतों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
यह है अनुमान
मौसम विभाग का अनुमान है कि 4 जुलाई तक अंबाला में झमाझम बारिश हो सकती है। इसमें 29 और 30 जून तथा 1 और 2 जुलाई के बारिश के साथ तूफान की संभावनाएं जताई गई हैं, जबकि 3 व 4 जुलाई को बारिश अथवा तूफान का अनुमान है। ऐसी स्थिति में लोगों को जहां गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं जलभराव से भी जूझना होगा।
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यह है अभी तक की तैयारियां
प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों के करीब बीस कर्मचारियों को बाढ़ नियंत्रण की ट्रेनिंग दी गई है। जिले में बाढ़ नियंत्रण की स्थिति के मद्देनजर 15 सितंबर तक सभी विभागों को पूरी तरह सचेत रहने के आदेश दिए गए हैं। जिले के सभी बाढ़ नियंत्रण कक्ष में सुबह 9 से शाम 5 बजे तक और शाम 5 से सुबह 9 बजे तक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जिले में केवल 6 किश्तियां ही हैं, जिनमें एक जनसुई, एक नारायणगढ़, एक मुलाना और तीन किश्तियां हेड क्वार्टर में हैं। प्रशासन की मानें, तो जिला में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की संख्या 95 है।
नालों की सफाई धीमी गति से
जिला भर में नालों की सफाई का काम धीमी गति से चल रहा है। डीसी द्वारा पंद्रह जून तक नालों की सफाई के लिए समय दिया गया था। मंत्री विज ने भी खुद नालों को चेक किया और इस में तेजी लाने के निर्देश दिए। उधर, डीसी अंबाला ने भी अधिकारियों को कहा है कि वे सफाई कार्य में दिखावा न करें।
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यह कहते हैं लोग
अंबाला कैंट के रहने वाले कुमार प्रशांत, अशोक कुमार, पुष्कर शुक्ला, योगेश कुमार, सिटी के जगजीत सिंह, अमित कुमार, शेखर का कहना है कि साल भर कुछ नहीं होता, जबकि मानसून से कुछ दिन पहले सफाई शुरू की जाती है। हर साल कालोनियों अथवा बाजारों में जलभराव की स्थिति रहती है, इससे निजात नहीं मिल पाई है। बेहतर हो यदि साल भर नियमित रूप से नालों की सफाई होती रहे।
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