अंबाला कैंट।
रेलवे की लापरवाही शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा रही है। ट्विन सिटी में आधा दर्जन ऐसे रेल फाटक है जोकि रफ्तार पर ब्रेक बने हुए हैं। जिन फाटकों से चंद क्षणों में गुजरा जा सकता है वहां कई मिनट खड़े होकर लोगों को फाटक खुलने का इंतजार किया जा रहा है। दशकों से बने यह रेल फाटक आधुनिकता की ओर बढ़ रहे शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा रहे हैं। सिटी में चार फाटक ऐसे हैं जहां से हजारों वाहन चालक गुजरते हैं, मगर फाटकों के बंद रहने से वह प्रभावित हो रहे हैं। यही स्थिति कैंट में है जहां दो फाटकों पर लोगों को परेशानी झेलने को मजबूर होना पड़ रहा है। रेलवे की लापरवाही जनता पर भारी पड़ रही है। अब बात रेल प्रशासन की करें तो रेलवे का भेदभाव स्पष्ट नजर आता है। अपने क्षेत्र में रेलवे दो अंडर पास बना चुकी है ताकि अधिकारियों व स्टाफ को दिक्कत न हो, मगर शहर की जनता की ओर रेल अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
यह स्थिति ट्विन सिटी में
अंबाला सिटी रेल फाटकों से ज्यादा प्रभावित है। यहां पर प्रमुख अंबाला-लुधियाना और अंबाला-चंडीगढ़ रेलमार्ग शहर के बीच से होकर गुजरता है। अंबाला-लुधियाना रेलमार्ग पर जंडली और सिटी स्टेशन के पास एक-एक रेल फाटक है। यह दोनों फाटक व्यस्त क्षेत्र में बने हैं जहां से हजारों वाहन चालक प्रतिदिन गुजरते हैं। दोनों तरफ आवासीय कालोनियों के अलावा सरकारी कार्यालय भी है। यही स्थिति अंबाला-चंडीगढ़ रेलमार्ग पर बलदेव नगर व धूलकोट रेल फाटक पर है। दोनों रेलमार्गों पर प्रतिदिन ट्रेनों का दबाव रहता है जिस वजह से काफी-काफी समय तक रेल फाटक बंद रहते हैं। अंबाला-लुधियाना लाइन पर दिन में सवा दो सौ से अधिक ट्रेनें गुजरती है जबकि चंडीगढ़ लाइन पर 50 से ज्यादा ट्रेनें है। इसी तरह कैंट में अंबाला-सहारनपुर रेलमार्ग पर नन्हेड़ा और दुखेड़ी रेल फाटकों पर हालत खराब है। यहां घंटों तक वाहन चालक फाटक खुलने की इंतजार में खड़े रहते हैं।
जान जोखिम में डालकर निकालते वाहन
वाहन चालकों की हालत यहां खराब है। दोपहिया वाहन चालक को जल्दी निकलने के चक्कर में अपनी जान तक जोखिम में डाल रहे हैं। फाटकों के नीचे से वह वाहन निकाल लेते हैं जोकि सुरक्षा की दृष्टि से सही नहीं है। पूर्व में आरपीएफ ऐसे वाहन चालकों को पकड़ने का अभियान भी चला चुकी है।
अंडर पास या ओवर ब्रिज की उठ रही मांग
फाटकों पर अंडर पास या ओवर ब्रिज बनाने की मांग अब जोर पकड़ रही है। मगर रेलवे की ओर से इसपर गंभीरता से कार्य नहीं कर रही है। सिटी के निवासी जंडली, बलदेव नगर और अन्य फाटकों पर अंडर ब्रिज बनाने की मांग कर रहे हैं, मगर अब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी है।
कई बार हुई पंचायत, नहीं बना अंडर पास
अंबाला-सहारनपुर रेलवे ट्रेक पर बना फाटक दर्जनों गांवों की यातायात सुविधा के लिए ग्रहण बना हुआ है। इस मसले को लेकर कई बार पंचायत तक हो चुकी है। दुखेड़ी निवासी दिलबाग सिंह, विजय पाल चौहान, धर्मवीर सिंह, संदीप राणा का कहना है कि इलाकावासी कई सालों से फाटक के कारण दुखेड़ी व आसपास के सैकड़ों लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कहीं जाना हो तो एक घंटा पहले घर से निकलना पड़ता है या फिर उन्हें मजबूरन लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। रेल अफसरों से अंडर ब्रिज बनाने की मांग कई बार लोग कर चुके हैं मगर अब तक समस्या हल नहीं हुई।
एक किलोमीटर में दो अंडर पास
रेलवे कॉलोनी और डीआरएम कांप्लेक्स को आने-जाने में कोई परेशानी न हो इसको लेकर रेलवे अपने क्षेत्र में दो अंडर पास बना चुकी है। एक अंडर पास रेल विहार में है जबकि दूसरा करीब एक किलोमीटर दूर रेलवे कॉलोनी में है। हैरत है कि व्यापक फंड होने के बावजूद रेलवे अन्य स्थानों पर अंडर का निर्माण क्यों नहीं कर रही है।
जंडली क्षेत्र में आने-जाने के लिए जंडली रेल फाटक एक मात्र रास्ता है, मगर यहां अंडर पास नहीं होने से आए दिन यहां पर वाहन चालकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। अंडर पास बना समय की मांग है जोकि जल्द बनने चाहिए।
अतर सिंह मुलतानी, अध्यक्ष, मार्केट कमेटी, जंडली।
- सहारनपुर-लुधियाना रेल लाइन पर सभी फाटकों पर अंडर पास या ओवर ब्रिज पास हो चुके हैं। जल्द इनका निर्माण आरंभ किया जाएगा ताकि जनता को भविष्य में कोई परेशानी न झेलनी पड़े।
- दिनेश कुमार, डीआरएम, अंबाला।