अंबाला कैंट। प्रदेश में सरकार की ओर से जारी किए गए 452 रूटों को लेकर मामला सीएम दरबार में पहुंच गया है। हरियाणा सहकारी परिवहन कल्याण संघ अंबाला के प्रतिनिधिमंडल सीएम कार्यालय में उनके नाम पत्र सौंपा है। साथ ही बताया है कि कैसे इन नए रूटों पर परिवहन समिति संचालकों को नुकसान होगा और उनके बेरोजगार होने का खतरा है।
इस तरह से चली है परिवहन नीति
वर्ष 1993 में तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में पहली बार परिवहन पालिसी को लाया गया था, जिसमें प्रदेश भर से कई लोगों ने समितियां बनाकर बसें को चलाया। यह वे लोग थे, बेरोजगार थे, लेकिन सरकार की इस पालिसी ने इनको रोजगार दिया। इसी परिवहन नीति के तहत प्रदेश के 854 परिवहन समितियों को परमिट अलाट किए गए। लेकिन इसके बाद साल 2013, 2016 में नई पालिसी आई, जबकि अब साल 2017 में दो बार पालिसी आ चुकी है। इन सभी पर रोडवेज ने आपत्ति उठाई, जिसके चलते पालिसी सिरे नहीं चढ़ पाई हैं।
इस तरह से है आपत्ति समितियों को
समिति बस संचालकों का कहना है कि फरवरी 2017 में सरकार ने जो पालिसी जारी की थी, उसमें 271 रूट अलाट किए गए थे, जबकि इसी साल जून में जारी गई पालिसी में इन रूटों की संख्या 452 कर दी गई, लेकिन इसी पर पेंच अड़ गया है। समिति बस संचालकों का कहना है कि जिन 271 रूट के लिए पालिसी जारी की, वह तो सही है, लेकिन इसके बाद जिन 452 रूट पर परमिट देने की योजना बनाई है, उससे समिति बस संचालकों को नुकसान है। समिति बस संचालकों का दावा है कि इन में से नब्बे प्रतिशत रूट ऐसे हैं, जिन पर रोडवेज की बसें भी नहीं चलती, जबकि अन्य पैसेंजर वाहन भी न के बराबर ही हैं।
साढ़े सात हजार परिवारों पर लटकी तलवार
परिवहन समिति बस संचालकों की मानें, तो यदि 452 रूट पर सरकार परमिट देने पर अड़ी रही, तो हजारों परिवारों की रोजी रोटी पर संकट खड़ा हो सकता है। प्रदेश की 854 समिति बसों से यह परिवार जुड़े हैं, जबकि यदि उक्त रूट दिए जाते हैं, तो यह घाटे का सौदा साबित होंगे।
हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए नए रूट काफी घाटे का सौदा हैं। इसी को लेकर सीएम कार्यालय में गए और वहां पर उनके नाम ज्ञापन सौंपा है। साथ ही बताया गया है कि फरवरी 2017 की पालिसी के तहत रूट दिए जाएं, जबकि 452 पर नए लोगों को समायोजित किया जाए।
- रामनाथ राणा, प्रधान हरियाणा सहकारी परिवहन कल्याण संघ अंबाला