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नो एंट्री में ओवरलोड वाहनों की एंट्री, प्रशासन बेपरवाह
रोड सेफ्टी के नाम पर दिखावे के लिए की जा रहीं बैठकें, मगर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं, आए दिन हो रहे हादसे
शहर में सुबह 8 से रात 8 बजे तक ओवरलोड और भारी वाहनों के प्रवेश पर है प्रतिबंध
मुनीष कुमार
अंबाला सिटी। लगता है कि पुलिस व प्रशासन को जनता की परवाह नहीं है। जिले में आए दिन हो रहे हादसों के बाद भी इनकी नींद नहीं खुली है। दिखावे के लिए रोड सेफ्टी के नाम पर बैठकें की जा रही हैं, लेकिन उस पर काम नहीं होता। दिन में नो एंट्री के बाद शहर में ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं। जिले में सड़क हादसे में सात लोगों के मरने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। इस संबंध में बात करने पर अधिकारी कार्रवाई करने का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लेते हैं।
बता दें कि प्रशासन ने शहर के अंदर ओवरलोड और भारी वाहनों की एंट्री सुबह 8 से रात 8 बजे तक बंद की हुई है, लेकिन वास्तव में यह केवल दिखावा साबित हो रही है। वहीं, अगर किसी सरकारी कार्य के लिए भारी वाहन को शहर में प्रवेश करने की इजाजत है तो उससे होने वाले हादसे का जिम्मेदार कौन होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। बता दें कि 28 दिसंबर को बलदेव नगर थाना क्षेत्र में कालका चौक पर टिप्पर की चपेट में आने से बाइक सवार युवक की मौत हो गई थी।
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ट्रैफिक लाइटें न होने से हो रही नियमों की अवहेलना
शहर में कई मुख्य चौक हैं जहां ट्रैफिक पुलिस दिन में नाका लगाकर यातायात नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के चालान करती दिखाई देती है, लेकिन रात को इन चौकों पर कोई भी ट्रैफिक पुलिसकर्मी न होने के कारण लोग नियमों का पालन करने में लापरवाही बरतते हैं। वहीं अगर शहर में उक्त जगहों पर ट्रैफिक लाइटें लगी हों, तो कुछ हद तक नियमों का पालन किया जा सकता है। ऐसे में शहर में इन चौक पर ट्रैफिक लाइटों का होना अनिवार्य हो जाता है। शहर में मुख्य चौक आर्य चौक, पॉलिटेक्निक चौक, अग्रसेन चौक, बलदेव नगर चौक, कालका चौक हैं।
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नशा, धुंध व स्ट्रीट लाइट न होना भी हादसे के कारण
अकसर देखने में आया है कि कई वाहन चालक अपने वाहन को तेज गति व नशे में चलाते हुए खुद को तो मुसीबत में डालते ही हैं, साथ ही दूसरों के लिए भी मुसीबत खड़ी कर देते हैं। वहीं सर्दियों में धुंध व कोहरे के कारण भी हादसों की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में उचित यही है कि वाहन को धीरे चलाया जाए। उदाहरण के तौर पर अंबाला के पॉलिटेक्निक चौक पर दिसंबर की शुरुआत में गलत दिशा में चल रहे स्कूटर सवार चार बच्चों में से तीन की मौत हो गई थी। वहीं सड़कों पर लाइटें न जलने से भी कई बार अंधेरे में खड़े वाहन से दूसरे की टक्कर हो जाती है। ऐसे में सड़कों पर लाइटों का भी उचित प्रबंध होना अनिवार्य हो जाता है।
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कोट्स
शहर में दिन में सुबह 8 से रात 8 बजे तक ओवरलोड वाहनों की नो एंट्री है। वहीं अगर शहर में किसी सरकारी कार्य या सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है तो उस दौरान भी टिप्पर की एंट्री डीसी की ओर से खोली गई है। ट्रैफिक सुधार के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
-बलविंद्र सिंह, एसएचओ ट्रैफिक, अंबाला।
कोट
शहर में अगर नो एंट्री के समय ओवरलोड वाहन प्रवेश कर रहे हैं तो इस पर ध्यान दिया जाएगा। शहर में ट्रैफिक लाइटें क्यों नहीं हैं, इस पर डीसी ही बता सकती हैं। दिन में ट्रैफिक पुलिस व रात को पीसीआर व थाना पुलिस गश्त पर रहती है, ताकि लोग ट्रैफिक नियमों का पालन करें।
-आस्था मोदी, एसपी, अंबाला।
कोट
यातायात नियमों की अवहेलना करने वाले वाहन चालकों के पुलिस अधिकारी चालान करें, ताकि नियमों की अवहेलना होने पर दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
-कैप्टन शक्ति सिंह, एडीसी।