गर्भवती किशोरी के परिजनों से नहीं हो रहा संपर्क, गर्भपात कराने को बढ़ी पेचीदगी
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी।
शहजादपुर क्षेत्र के एक गांव में मौसा द्वारा किशोर से रेप और गर्भवती होने के मामले में नाबालिग के गर्भपात को लेकर पेचीदगी बढ़ गई है। शनिवार शाम तक सीडब्ल्यूसी की टीम नाबालिग के परिजनों से संपर्क नहीं कर पाई। टीम का कहना है कि गर्भपात जैसे अहम निर्णय के लिए उसके परिजनों की सहमति जरूरी है। वहीं शनिवार को स्वास्थ्य कारणों के चलते पीड़िता को सिविल अस्पताल में दाखिल कर दिया गया है। शुक्रवार को अल्ट्रासाउंड में खुलासा हुआ था कि वह 22 सप्ताह की गर्भवती है। वहीं किशोरी की उम्र को लेकर भी टीम के पास अभी कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है। टीम द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं कि उम्र संबंधी पुख्ता जानकारी मिल जाए, अगर ऐसा नहीं होता है तो उम्र जानने के लिए भी मेडिकल टेस्ट आदि का सहारा लिया लाएगा।
किशोरी में 6.9 ग्राम हीमोग्लोबिन
शहजादपुर क्षेत्र में मौसा की हवस का शिकार बनी नाबालिग 22 सप्ताह की गर्भवती है। इस बात का खुलासा शुक्रवार को हुए अल्ट्रासाउंड से हो गया था। वहीं डॉक्टरी जांच में बच्ची का हीमोग्लोबिन सिर्फ 6.9 ग्राम सामने आया। ऐसे में बच्ची एनीमिया से भी पीड़ित बताई गई। इसके चलते उसे शनिवार को सीडब्ल्यूसी की टीम ने सिटी सिविल अस्पताल में भर्ती करा दिया है।
बच्ची के माता-पिता से नहीं हो सका संपर्क
पहले ही दिन से बाल कल्याण समिति यानि सीडब्ल्यूसी की टीम पीड़िता के माता-पिता से संपर्क करने के प्रयास में जुटी है लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। जिला बाल कल्याण अधिकारी मेघा सिंगला का कहना है कि नाबालिग का आरोपी मौसा जेल चला गया है। उसके स्थानीय परिजन बोलने का तैयार नहीं है। बच्ची बंग्ला भाषी है वह ठीक से अपनी बात कह नहीं पा रही है। टीम परिजनों से संपर्क करने के प्रयास में जुटी है। लड़की पश्चिम बंगाल की है। वहां की स्थानीय टीम और पुलिस की मदद भी ली जा रही है।
गर्भपात के लिए अभिभावकों की सहमति जरूरी
ऐसे मामले में पीड़िता के गर्भपात के लिए अभिभावकों की अनुमति जरूरी मानी जा रही है। बाल कल्याण समिति की टीम चाहती है कि अभिभावक मिले और सामने आए। इसके बाद गर्भपात की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। अगर वह समय से सामने नहीं आते हैं तब पेचीदगी बढ़नी तय है। मामले में एक समस्या और आ सकती है। वह है कि पीड़िता खून की कमी से जूझ रही है।
नाबालिग को शनिवार को एडमिट करवा दिया गया है और परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। गर्भपात जैसे संवेदनशील मसले पर तकनीकी पहलुओं को परख कर ही निर्णय लिया जाएगा। -मेघा सिंगला, जिला बाल कल्याण अधिकारी।