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20 साल पुराने छह बम मिलने से दहशत

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बम डिफ्यूज करने के बाद बम के टुकड़े - फोटो : Ambala
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अंबाला-कुरुक्षेत्र की सीमा में गांव पंजैल में मारकंडा नदी की जमीन में छह बम मिलने से पूरे एरिया में शनिवार को दहशत का माहौल रहा। आनन-फानन में अंबाला पुलिस ने इसकी सूचना बम निरोधक दस्ते को दी। प्रारंभिक सूचना दो बम की दी गई थी। सूचना मिलने पर अंबाला के बम निरोधक दस्ते के साथ मधुबन से डॉ. प्रोमिला राठी सहायक निदेशक भी मौके पर पहुंची। टीम ने सबसे पहले सेफ्टी किट पहनकर इन बम की जांच की। जांच में यह बम असली पाए गए। इसके बाद सुबह करीब साढ़े 11 बजे इन दोनों बम को करीब तीन फुट गहरे और तीन फुट चौड़े गड्ढे में दबाकर और ब्लास्टिंग वायर डालकर डिफ्यूज किया गया। डिफ्यूज के दौरान जोरदार धमाकों से धरती हिल गई। इस दौरान पुलिस ने पूरे एरिया की नाकाबंदी की, ताकि कोई भी इस एरिया में प्रवेश न कर सके। दोनों बम को डिफ्यूज करने के बाद टीम ने अभी राहत भरी सांस भी नहीं ली थी कि तीन अन्य बम भी पहले मिले दोनों बम के 500 मीटर एरिया से ही बच्चों ने बरामद किए और टीम को सूचना दी। इसी तरह छठा बम भी मौके से ही बरामद किया गया। मौके पर साहा थाना प्रभारी बलकार सिंह अपनी टीम के साथ मौजूद रहे।
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बता दें कि जिस स्थान से बम मिले हैं उससे अंबाला का पंजैल गांव करीब डेढ़ किलोमीटर और कुरुक्षेत्र का पाडलू और दामली गांव करीब 5 से 7 किलोमीटर दूर है।
दोबारा से किया गया चार बम को डिफ्यूज करने का बंदोबस्त
मधुबन और अंबाला से पहुंची बम निरोधक दस्ते की टीम के पास केवल दो ही बम की सूचना थी, इसीलिए इन दोनों को ही डिफ्यूज करने की सामग्री टीम अपने साथ लेकर आई थी। बाद मौके पर चार अन्य बम मिलने से टीम ने दोबारा से सारा सामान मौके पर मंगवाया। इसके बाद तीन फुट गहरा और चौड़ा गड्ढा खोदकर उसमें दो बम डाले गए। 3 बजकर 25 मिनट पर ब्लास्टिंग वायर डालकर दो बम को एक साथ डिफ्यूज किया गया। इसके 7 मिनट बाद 3 बजकर 32 मिनट पर दो अन्य बम इसी गड्ढे में डालकर उन्हें भी डिफ्यूज कर दिया गया।
20 से 30 साल तक भी हो सकते हैं पुराने
मौके पर टीम अमर उजाला ने जब डॉ. प्रोमिला राठी से इन बम की मारक क्षमता और मार्का के बारे में बातचीत की तो उन्होंने बताया कि यह बम बेहद पुराने हैं। इनपर जंग लगा हुआ है। डॉ. प्रोमिला के अनुसार बम 20 से 30 साल पुराने भी हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि बम पर कोई भी मार्का नजर नहीं आ रहा था। जहां तक मारक क्षमता की बात है तो यदि भीड़भाड़ के एरिया में इन्हें प्रयोग किया जाए तो यह तबाही मचा सकते थे। उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि इस एरिया में बम कहां से आए। इस दौरान डॉग स्क्वायड टीम, ब्लास्टिंग वायर कर्मी, सब इंस्पेक्टर रघुबीर सिंह, हेड कांस्टेबल हितेंद्र, मंजीत, अनिल, भोपाल भी बम निरोधक दस्ते में शामिल रहे।
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