अमर उजाला ब्यूरो
बराड़ा। इंसानों के बाद अब पशुओं के आधार कार्ड भी बनने शुरू हो गए हैं। इसकी जिम्मेदारी पशु चिकित्सा विभाग को दी गई है। दुधारू पशुओं की नस्ल बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा यह योजना शुरू की गई है। साथ ही संरक्षण के लिए उनका रिकार्ड होना जरूरी है। एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से गाय, भैंस, बकरी व भेड़ आदि पालतू पशुओं की जानकारी के साथ ही उसके मालिक की जानकारी सॉफ्टवेयर में अपलोड की जाएगी। इसके बाद सॉफ्टवेयर की मदद से सभी नस्लों के पशुओं की जानकारी विभाग ऑनलाइन देख सकेगा। अब तक 5313 पशुओं का हुआ रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है।
यह है आधारकार्ड बनाने की प्रक्रिया
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि योजना में बेहतर नस्ल की गाय और भैंस या पालतू पशुओं का डाटा जुटाया जा रहा है। इसमें पशुओं के कान में छेद कर प्लास्टिक का एक टैग लगाया जाएगा, उसकी फोटो खींची जाएगी। इसके बाद पशु की नस्ल, उम्र, गर्भ धारण, टीकाकरण व पशु पर लोन व इसके अलावा पशुओं से संबंधित अन्य जानकारी के साथ पशु के मालिक का नाम, उसका मोबाइल नंबर के साथ अन्य जानकारी भरी जाएगी।
ऑनलाइन अपलोड होगी जानकारी
डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि फार्म में पशु और उसके मालिक की पूरी जानकारी मोबाइल नंबर के साथ ऑनलाइन अपलोड की जाएगी। इसके बाद पशु के गर्भधारण से लेकर उसके बच्चा देने तक की जानकारी ऑनलाइन अपलोड की जाएगी। इसमें यह दर्ज किया जाएगा कि किस मवेशी के यहां कैसा बच्चा हुआ, उसका वजन कितना है आदि जानकारी शामिल रहेगी। पंजीकरण नंबर के लिए पशु को टैग नंबर डाला जाएगा। जिसकी सहायता से पशु व उसके मालिक का पूरा डाटा ऑनलाइन देखा जा सकेगा। यदि किसी पशुपालक का पशु बीमार होता है तो उस क्षेत्र के डाक्टर को एक क्लिक में पता चल जाएगा कि पशु किस नस्ल का है और पशु की पूरी प्रोफाइल क्या है।
103 कर्मचारी जुटा रहे हैं डाटा
पशुओं का डाटा तैयार करने का काम पूरे जिले में पशु चिकित्सा विभाग द्वारा बनाई गई टीम द्वारा किया जाएगा। इसमें कुल 103 कर्मचारी होंगे, जिन्हें प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें 25 सुपरवाइजर व 78 इन्यूमैरेटर शामिल हैं, जो घर-घर जाकर लोगों के पशुओं का व पशु मालिक का डाटा जुटाने में लगे हुए हैं। इन कर्मचारियों को एक टैबलेट दिया गया है। जिससे वे मौके पर ही पूरी जानकारी अपलोड कर सकें।
तीन महीने का है समय, 5313 पशुओं का हुआ रजिस्ट्रेशन
30 जनवरी से इस योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। तीन महीने में यह कार्य विभाग द्वारा पूरा किया जाना है। अब तक 5313 पालतू पशुओं का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है। इस योजना का उद्देश्य है कि पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान कर अच्छी नस्ल के पशु तैयार करें और उनका डाटा भी तैयार करें। इस योजना के अंतर्गत जिले में किस नस्ल के कितने मवेशी हैं। यह जानकारी एक क्लिक करते ही मिल जाएगी।
पहले नथूना स्कैन करने की योजना थी
पहले पशुओं के नथूना (पशुओं के मुंह का अगला हिस्सा) को स्कैन करने की योजना बनाई गई थी। परंतु यह योजना परेशानी भरी थी। पशुओं का नथूना स्कैन करते हुए, चोटिल होने का खतरा ज्यादा रहता था। इसलिए अब यह आधार कार्ड पशुओं की फोटो खींच कर बनाए जा रहे हैं।
पशु चोरी व लावारिस पशुओं में आएगी कमी
इस योजना के अनुसार यदि पशु चोरी हो जाता है तो उसके आधार कार्ड के जरिए पशु का पता लगाया जा सकता है, जिससे पशु को पशु के मालिक के पास आसानी से पहुंचा जाएगा। जबकि पहले चोरी हुए पशुओं की पकड़ने के बाद पहचान न होने के कारण उन्हें गौशाला में भेज दिया जाता था। इसके साथ ही जो पशुपालक पशुओं को लावारिस छोड़ देते हैं। उन पर भी नकेल कसी जाएगी। हालांकि लावारिस पशुओं का डाटा पालतू पशुओं के डाटा के कार्य पूरा होने के बाद जुटाया जाएगा।