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261 एकड़ जमीन हस्तांतरण को मिली सेना व सरकार की मंजूरी, 14 हजार निवासियों को मिलेगा लाभ

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261 एकड़ जमीन हस्तांतरण को मिली सेना व सरकार की मंजूरी, 14 हजार निवासियों को मिलेगा लाभ
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी/कैंट। रक्षा मंत्रालय की भूमि पर सन 1941 में बसे परिवारों को अब उनकी भूमि का मालिकाना हक मिलने की उम्मीद जागी है। सन 1975 में भूमि की लीज अवधि समाप्त होने के बाद कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा यहां बसे लोगों को अवैध निर्माण, जमीन खाली कराने व अन्य कई नोटिस भेजे जा रहे थे। कई केस अदालतों की दहलीज पर भी गए, मगर अब यह समस्याएं एक ही झटके में समाप्त हो जाएंगी। तोपखाना परेड, माली परेड, गुलाब मंडी और दुधला मंडी की सेना की 261 एकड़ भूमि को नगर निगम अंबाला के नाम हस्तांतरित करने के मुद्दे पर हरियाणा सरकार और सेना अधिकारियों के बीच सहमति बन गई है।
इस मामले में यह भूमि सेना निगम के नाम हस्तांतरित करेगी और राज्य सरकार इस भूमि के बदले कलेक्टर रेट की दर से 86 करोड़ रुपये सेना को अदा करेगी। इस मामले पर 29 नवंबर को हरियाणा निवास चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री मनोहर लाल, मुख्य सचिव डीएस ढेसी, जिला प्रशासन की ओर से उन्होंने स्वयं तथा सेना अधिकारियों ने चर्चा की। चर्चा के उपरांत जिला प्रशासन अंबाला के प्रस्ताव को राज्य सरकार और सेना ने सहमति प्रदान कर दी है और अब यह भूमि सेना से नगर निगम के नाम हस्तांतरित करने का रास्ता साफ हो गया है।
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बता दें कि मुख्यमंत्री के संज्ञान में यह मामला लाए जाने पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और जिला प्रशासन अंबाला से चर्चा की थी और कोई रास्ता निकालने के निर्देश दिए थे। प्रशासन द्वारा सेना अधिकारियों से दो-तीन चरणों की बैठक के बाद इस बात पर सहमति बनी थी कि राज्य सरकार या तो 261 एकड़ भूमि के बदले सेना को भूमि उपलब्ध करवा दे या इस भूमि की कीमत सेना को अदा कर दे, केवल उसी स्थिति में यह भूमि निगम के अधिकार क्षेत्र में रखी जा सकती है।
1975 में समाप्त हुई थी लीज : डीसी
डीसी शरणदीप कौर बराड़ ने बताया कि अंबाला छावनी में तोपखाना परेड और दुधला मंडी में देश के विभाजन से पहले से ही कुछ परिवारों को सेना द्वारा इन दोनों क्षेत्रों की भूमि कृषि उद्देश्य के लिए प्रदान की गई थी और इसके लिए सेना द्वारा इन परिवारों से लीज की गई थी। यह लीज वर्ष 1975 में समाप्त होने के बाद भूमि पर रहने वाले और कृषि कार्य करने वाले इन परिवारों ने इसका नवीनीकरण नहीं करवाया था। मामले में बार-बार सेना द्वारा भूमि खाली करने का नोटिस जारी किए जाते थे और ये परिवार उसका विरोध करते थे। मामला इन गरीब परिवारों के भविष्य से जुड़ा होने के कारण स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने केंद्रीय रक्षा मंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया था। उनके अनुरोध पर जून 2018 में रक्षा मंत्रालय द्वारा इस भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए गए थे।
दोनों क्षेत्रों के 14 हजार निवासियों को मिलेगा लाभ
सरकार के इस कदम से तोपखाना परेड, माली परेड, गुलाब मंडी और दुधला मंडी में बसे 14 हजार लोगों को लाभ मिलेगा। अब तक रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली 261 एकड़ भूमि पर बसे लोगों का कब्जा कैंटोनमेंट बोर्ड व सेना द्वारा माना जाता था। यही वजह थी कि यहां पानी, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, नया निर्माण आदि कार्यों पर रोक थी, मगर अब यह समस्याएं हल होंगी, साथ ही लोगों को उनकी जमीन का मालिकाना हक हासिल होगा।
अंबाला निगम की सीमा में होगा इजाफा
कैंट के दोनों छोर पर स्थित 261 एकड़ जमीन अब तक सेना व कैंटोनमेंट बोर्ड के नियंत्रण में थी। अब निगम सीमा में यह भूमि शामिल हो जाएगी जिस कारण निगम इस भूमि का बेहतर तरीके से सदुपयोग कर पाएगा। निगम के कई प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं जोकि भूमि के अभाव में अटके पड़े हैं। इनमें डेयरियों को आवासीय क्षेत्र से बाहर करना, कैटल यार्ड, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, स्लाटर हाउस व अन्य कई प्रोजेक्ट्स शामिल हैं जोकि जमीन के अभाव में परवान ही नहीं हो सके।
सूचना मिलते ही लोगों ने जताई खुशी
उधर, सरकार द्वारा जमीन हस्तांतरण की मंजूरी की सूचना मिलते ही तोपखाना व माली परेड आदि क्षेत्रों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। लोग सड़कों पर उतर आए और मंत्री अनिल विज का आभार जताने लगे। पार्षद लक्ष्मी देवी, पूर्व पार्षद ललित कुमार एवं अन्य ने कहा कि दशकों से लोग यहां बसे थे, मगर अब वह जमीन के मालिक बन सकेंगे। उन्होंने बताया कि शनिवार को क्षेत्रवासी मंत्री विज का आभार जताने के लिए उनके निवास पर जाएंगे।
वर्ष 2003 के बाद जिले में भूमि हस्तांतरण का दूसरा बड़ा मामला
पूर्व में वर्ष 2003 राज्य सरकार ने अंबाला में करीब 331 एकड़ बड़ी भूमि सेना को प्रदान की थी। गांव टुंडला, टुंडली व जनैतपुर में यह भूमि सेना को दी गई थी। फरवरी 1977 में कैंटोनमेंट बोर्ड ने नगर परिषद बनाने के लिए सिविल क्षेत्र का बड़ा अंबाला सदर हिस्सा राज्य सरकार को दिया था। इसके बदले राज्य सरकार ने 150 एकड़ भूमि एक्वायर कर रक्षा मंत्रालय को प्रदान की थी। मगर यह मामला हाईकोर्ट में चला गया था और हाईकोर्ट के निर्देशों पर 2003 में प्रशासन ने भूमि पर कब्जा लेकर इसे सेना के सुपुर्द किया था। इस भूमि के अलावा 181 एकड़ अलग से भूमि भी सेना को दी गई थी जबकि इस भूमि के बदले सेना ने पानीपत में अपनी 66 एकड़ भूमि राज्य सरकार को दी थी। इस भूमि पर अब पानीपत मिनी कांप्लेक्स स्थापित है।
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कोट्स
सीएम मनोहर लाल के नेतृत्व में हुई बैठक में जमीन हस्तांतरण के मामले को मंजूरी मिल गई है। इस बैठक में कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी मौजूद थे। प्रशासन द्वारा जमीन के बदले सेना को राशि देने के प्रपोजल को मंजूरी मिली है। जल्द ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-शरणदीप कौर बराड़, डीसी, अंबाला।
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