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ग्रामीण स्तर पर कई खेलों के लिए नहीं है संसाधन, करना पड़ सकता है शहरी क्षेत्र का रुख
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। खंडस्तरीय स्कूल गेम्स व खेलो इंडिया खेलो के तहत होने वाले गेम्स को लेकर माथापच्ची की जा रही है। ब्लाक लेवल पर कई खेलों के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में या तो इन खेलों में प्रतियोगिता के लिए ट्विन सिटी का रुख किया जा सकता है या फिर अन्य व्यवस्था बनानी होगी। दोनों गेम्स के लिए फिलहाल इसी का खाका तैयार किया जा रहा है।
खेलो इंडिया खेलो की बात करें, तो इस के तहत ब्लाक से लेकर स्टेट लेवल तक 24 गेम्स का आयोजन विभिन्न वर्गों में किया जाना है। इसी को लेकर इन दिनों माथापच्ची की जा रही है किन गेम्स का आयोजन ब्लाक लेवल पर हो सकता है और क्या व्यवस्थाएं हैं। खेल विभाग द्वारा इसकी लिस्ट बनाई जा रही है, जबकि इसके बारे में उच्चाधिकारियों को भी जानकारी दी जाएगी। खास बात है कि इन गेम्स के लिए कम से कम तीन टीमों/खिलाड़ियों का होना आवश्यक है ताकि प्रतियोगिता कराई जा सके। सितंबर माह में ब्लाक स्तर पर गेम्स का आयोजन किया जाना है। इसके बाद जिला स्तर पर ग्रामीण स्तर पर हॉकी मैदान कम हैं, जबकि स्वीमिंग पूल, जिमनास्टिक जैसे खेलों के लिए व्यवस्था नहीं है।
इसी प्रकार स्कूल गेम्स के लिए भी ब्लाक लेवल पर व्यवस्थाएं बनानी होंगी। कई खेल ऐसे हैं, जिनको स्कूल गेम्स के शेड्यूल में शामिल किया गया है, लेकिन इनके लिए ब्लाक स्तर पर व्यवस्थाएं नहीं हैं। स्वीमिंग, तीरंदाजी, शूटिंग, साइकिलिंग, जिमनास्टिक, वाटर पोलो, हॉकी, स्केटिंग ंव रोलर हॉकी जैसे खेलों की व्यवस्था नहीं हैं। साथ ही इन खेलों में खिलाड़ी भी ब्लाक लेवल पर काफी कम हैं। ऐसी स्थिति में शिक्षा विभाग भी माथापच्ची कर रहा है कि किन उक्त गेम्स में यदि खिलाड़ी आते हैं, तो उनके लिए क्या व्यवस्था करनी है?
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खेलो इंडिया खेलो के तहत ब्लॉक स्तर पर गेम्स का आयोजन किया जाना है। इसके लिए पूरी रिपोर्ट तैयार करके उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। खिलाड़ियों व टीमों की संख्या पर निर्भर करेगा प्रतियोगिता कितनी और कैसे होगी। फिलहाल खेल विभाग पूरी तरह से अपनी तैयारी कर रहा है।
- अरुणकांत, डीएसओ अंबाला
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शिक्षा विभाग की ब्लॉक लेवल पर गेम्स की पूरी तैयारी कर ली गई है। हर इवेंट में प्रतियोगिता कराई जाएगी। किसी भी इवेंट को छोड़ा नहीं जा सकता। यदि ग्रामीण क्षेत्र में व्यवस्था नहीं है, तो इसे ड्राप नहीं कर सकते, वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाएगी।
- राजेंद्र सिंह जिंदू, एईओ स्पोट्र्स, शिक्षा विभाग अंबाला