शेड्यूल एच-1 के 46 साल्ट (दवाएं) ऐसे हैं, जिन पर सरकार शिकंजा कसने जा रही है। यह वे दवाएं हैं, जिनका इस्तेमाल नशे के लिए हो सकता है।
यह नोटिफिकेशन अप्रैल 2014 से लागू हो जानी है, जिसके बाद रिटेलरों को इन दवाओं का रिकार्ड रखना होगा। साथ ही बिना डाक्टर की पर्ची के भी यह दवाएं नहीं दी जा सकती।
इसी को लेकर दवा व्यवसाय से जुड़ी एसोसिएशन भी सक्रिय हो गई हैं। अंबाला में भी इसी को लेकर रिटेलरों में चर्चा है कि आखिर कैसे इस नोटिफिकेशन के नार्म्स पूरे किए जाएंगे।
सरकार ने दवा विक्रेताओं पर दवा बिक्री के मामले में शिकंजा कसने की तैयारियां की हैं। इन दवाओं की लिस्ट भी सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन में दी गई है, जिनको इस दायरे में लाया जाना है।
रिटेलरों की मानें, तो इन दवाओं का इस्तेमाल नशे के लिए भी हो सकता है, जिसके कारण इन पर शिकंजा कसा जा रहा है। जिला भर के करीब एक हजार रिटेलरों पर इसका असर पड़ेगा, जिसके लिए उनको इस नोटिफिकेशन के आधार पर कई व्यवस्थाएं करनी पड़ेंगे। इसके लिए अलग बिल बुक, रजिस्टर आदि रखनी होंगी।
साथ ही यह रिकार्ड कंप्यूटर पर भी अपलोड करना होगा। यह नोटिफिकेशन जारी होने के बाद सख्ती इस कदर होगी कि संबंधित विभाग के अधिकारी कभी भी इस रिकार्ड को चैक कर सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि यह रिकार्ड डाक्टर को भी रखना होगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर इस रिकार्ड को क्रास चैक भी किया जा सके।
नोटिफिकेशन लागू होने से पहले विवाद
सरकार की यह नोटिफिकेशन जारी होने से पहले ही इस पर विवाद शुरु हो गया है। इस व्यवसाय से जुड़ी एसोसिएशनें इसके कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जता रही हैं।
इसी को लेकर आल इंडिया आर्गेनाजेशन आफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन (एआईओसीडीए) ने भी तैयारी की है, जो इस नोटिफिकेशन को लेकर अपना पक्ष रखेगी। इसके बाद जो भी मसौदा तैयार होता है, उसे ही लागू किया जा सकता है।
‘इस नोटिफिकेशन को लेकर कुछ आपत्तियां हैं। इसके लिए एआईओसीडीए अपना पक्ष रखने जा रही है। अभी आब्जेक्शन मांगे हैं, जिसके बाद ही स्थिति साफ होगी।’
- अशोक सिंगला, महासचिव हरियाणा स्टेट केमस्टि एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन