रक्षाबंधन पर मुश्किलों भरा रहा बसों में मुफ्त सफर
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी/नारायणगढ़। बहन-भाई के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार जिले में खुशी के साथ मनाया गया। बहनों ने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी आयु की कामना की, वहीं भाइयों ने बहनों को उपहार भेंट कर उनकी रक्षा का वचन दिया। भाई-बहनों ने एक दूसरे का मुंह मीठा करवाया। रक्षाबंधन पर बाजारों में खूब भीड़ रही और मिठाइयों की दुकानें ग्राहकों से अटी रहीं। वहीं रक्षा बंधन पर बहनों को बसों में मुश्किलों भरा सफर तय करना पड़ा। बसों में बैठने को सीट नहीं थी जबकि रोडवेज की कम ही बसें सड़कों पर दौड़ीं जिस कारण सैकड़ों महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। सिटी व कैंट बस स्टैंड पर आने वाली रोडवेज बसें यात्रियों से खचाखच भरी रहीं। घंटों बहनों को बसों का इंतजार करना पड़ा। मुफ्त सफर उनके लिए मुसीबतों भरा रहा। वहीं, ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री टोका साहिब में पूर्णमासी समागम श्रद्धा के साथ मनाया गया। संगत ने गुरुद्वारा साहिब में माथा टेका। रागी जत्थों ने संगत को कथा कीर्तन व गुरु इतिहास के बारे में अवगत करवाया। रागी जत्थों ने संगत को हर समय वाहेगुरु का सिमरन करने के लिए प्रेरित किया और बताया कि सिमरन करने से सब दुख दर्द दूर होते हैं और सुखों की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर हरप्रीत सिंह, समनदीप सिंह, हर्षप्रीत सिंह, सागर सिंह, हरमनजोत सिंह, गुरप्रीत सिंह, सोनू सिंह, रूबल सिंह, मनदीप सिंह, कर्णजीत सिंह व अन्य मौजूद रहे।
सरकार के आदेशों की निजी बस चालकों ने उड़ाई धज्जियां
रविवार को अंबाला से नारायणगढ़ राखी बांधने आ रहीं बहन रेखा, जसविंदर कौर, कुसम, नीलम व पुष्पा सहित करीब एक दर्जन महिलाओं की निजी बस परिचालक ने टिकटें काटी, जब वह बस नारायणगढ़ अड्डे पर की तो महिलाओं ने बताया कि उनकी टिकटें काटी गई हैं जिसकी एवज में उनसे 40 रुपये प्रति सवारी ली गई। साथ ही कुछ परिचालक बिना टिकट दिए ही पैसे वसूल रहे हैं। रोडवेज कर्मचारियों ने निजी बस परिचालक से कुछ महिलाओं के पैसे भी वापस करवाए। वहीं नारायणगढ़ रोडवेज सब डिपो के कर्मचारियों ने इन लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
बहन से राखी बंधवाने के लिए 8 किलोमीटर पैदल चला भाई
मुलाना। अजय ने बताया कि वह अपनी बहन के पास साढ़ौरा में राखी बंधवाने गए थे लेकिन आते वक्त बसों में इतनी भीड़ थी कि बसें रुक ही नहीं रही थीं। प्राइवेट वाहनों में भी ठूंस-ठूंस कर सवारियां बैठा रखी थीं। बाद में पैदल चलना ही सही समझा। करीब 8 किलोमीटर चलने के बाद एक किसान ट्रैक्टर ट्राली लेकर आया तो उसे हाथ दिया तो वह उनको बैठा ले गया।