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- शहर के कूड़ा अखिरकार कहां फैंका जाए, अभी तक जगह सुनिश्चित नहीं

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निगम के पास नहीं डंपिंग प्वाइंट, टांगरी नदी बन गई कूड़ेदान
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अंबाला कैंट।
मानसून को लेकर सिंचाई विभाग की ओर से टांगरी में लाखों की लागत से सफाई अभियान चल रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम की डोर टू डोर कूड़ा उठान के सफाई ठेकेदार द्वारा टांगरी नदी को ही डंपिंग प्वाइंट बना दिया गया। हैरानी की बात यह है कि दोनों विभाग के बीच आपसी तालमेल न होने के कारण टांगरी कूड़ेदान के रूप में तबदील होती जा रही है। निगम भी अभी तक शहर के कूड़ा फेंकने के लिए एक डंपिंग प्वाइंट तय नहीं कर सका है। इन कूड़े के ढेर से आसपास पूरे इलाके में गंदगी का आलम रहता है।
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पटवीं की जगह टांगरी के अंदर बन चुका डंपिंग प्वाइंट
डोर टू डोर योजना के तहत भले ही घरों से कूड़े का उठान हो रहा हो, परंतु यह कूड़ा शहर से बाहर न जाकर टांगरी नदी के अंदर ही डंप किया जा रहा है। इलाकावासियों की मानें तो अक्सर निगम के सफाई कर्मचारी ट्रालियों और रेहड़ियों के माध्यम से टांगरी बांध के अंदर वाले हिस्से में कूड़ा डालकर चले जाते है। यही हालात टांगरी बांध के अंदर जगह-जगह दिखाई देंगे। कई जगह तो इस कद्र गंदगी के ढेर लग चुके है कि टांगरी कम गंदगी का प्वाइंट ज्यादा दिखाई देता है। जहां काफी संख्या में आवारा जानवर गंदगी फैलाते रहते है और पूरे इलाके में चारों ओर बदबू का आलम रहता है। टांगरी के अंदर कई इलाके तो ऐसे है जहां सफाई कर्मचारी के करिंदे आम जनता की नजरों से कूड़ा छुपाने के चक्कर में बिल्कुल टांगरी से बीच कूड़े का ढेर लगा रहे है, ताकि मानसून की बरसातों के अंदर टांगरी में पानी आने पर कूड़ा बह जाए।
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सिंचाई विभाग के कर्मचारी भी गंदगी से परेशान
पहाड़ी इलाकों में भारी बरसात से पहले सिंचाई विभाग टांगरी की सफाई के लिए हर संभव प्रयास में लगा हुआ है। जेसीबी मशीन की सहायता से सफाई भी की जा रही है। परंतु टांगरी में लगे कूड़े के ढेरों से कर्मचारी भी हैरान है। उनकी मानें तो यह नदी कम गंदगी का डंपिंग प्वाइंट ज्यादा दिखाई देती है। विभाग के कर्मचारियों के अनुसार कुछ जगह तो कूड़ा डालने पर निगम कर्मचारियों का विरोध भी हो चुका है, लेकिन कर्मचारी एक जगह को छोड़कर नदी के दूसरे हिस्से में कूड़ा डाल रहे हैं। इससे नदी के हालात भी दिन प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं।

खुली हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो रहा
क्षेत्रवासी सुदर्शन देवी, विनीता चौहान, सुमेरो देवी, मोहन, चंद्र, दुरजन, बलवान, साहिद, सहजान, सलमान का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण धीरे-धीरे पूरी टांगरी में गंदगी फैलती जा रही है और कोई भी कर्मचारी कूड़ा उठान के दोबारा नहीं लौटता है। आलम ये हो चुका है कि गंदगी के कारण खुली हवा में सांस लेना तक मुश्किल हो चुका है, गंदगी भरे इलाके से निकलने में भी काफी परेशानी होती है।
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डंपिंग की जगह का विरोध, असमंजस में विभाग
कूड़ा निपटान के लिए बना पटवी प्लांट तक शहर का कूड़ा पहुंचाने से पहले इलाके के अंदर ही एक डंपिंग प्वाइंट तैयार करना होता है, ताकि एक जगह कूड़ा एकत्रित करने के बाद उसे ट्रालियों के माध्यम से पटवीं प्लांट तक पहुंचाया जाए। गतत दिनों निगम ने दशहरा ग्राउंड में डंपिंग प्वाइंट बनाया था, परंतु जैसे ही इलाका वासियों को भनक लगी तो उन्होंने विरोध जताकर वहां कूड़ा डालने से मना कर दिया। अब तक डंपिंग का कोई निश्चित प्वाइंट निगम के पास नहीं है।

जगह-जगह विरोध के कारण डंपिंग की जगह फाइनल नहीं हो पा रही है, विभाग द्वारा नई जगह तलाश की जा रही है और जल्द ही डंपिंग की जगह को सुनिश्चित किया जाएगा। अगर टांगरी में गंदगी फेंकी जा रही है तो ठेकेदार को सख्ती से निर्देश दिए जाएंगे कि वह सीधा शहर के बाहर ही कूड़ा डाले’
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विनोद बैनिवाल, सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर निगम अंबाला।
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टांगरी नंदी के अंदर कूड़ा डालने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, अगर कोई कर्मचारी टांगरी नदी में कूड़ा डाल रहा है तो उसे रोका जाएगा। फिलहाल डंपिंग की एक जगह शहर में भी तलाशी जा रही है’
सतेंद्र दुहन, कमिश्नर, नगर निगम, अंबाला।
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