चारा मंडी में हरे चारे के कम रेट को लेकर किसान और आढ़तियों में तकरार
अमर उजाला ब्यूरो।
अंबाला सिटी। शहर की चारा मंडी में मंगलवार सुबह चारे की बोली शुरू होते ही किसानों और आढ़तियों में तकरारबाजी शुरू हो गई। जैसे ही आढ़ती ने 130 से बोली शुरू करके 150 रुपये प्रति क्विंटल पर समाप्त की तो मौजूद किसानों ने इस पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि वह इस रेट में अपने हरे चारे को नहीं बेच सकते। इस दौरान करीब 20 मिनट तक किसानों, आढ़तियों व टोका संचालकों के बीच विवाद चलता रहा। किसानों ने बताया कि यदि रेट में बढ़ोतरी नहीं कर सकते तो न करें, लेकिन वह अपनी ट्राली एक खरीदार के पास ही उतारेंगे ताकि उनका समय और डीजल दोनों की बचत हो सके।
किसान पप्पी, नैब सिंह, धर्म पाल, छोटा आदि का कहना है कि बारिश के कारण मंडी में हरा चारा कम पहुंचा, जिस कारण स्वाभाविक है कि चारे का रेट किसानों को ज्यादा मिलना चाहिए था। जब मंगलवार को भी बोली परसों की भांति 130 से शुरू होकर 150 पर समाप्त हो गई तो किसानों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह आढ़तियों की मिलीभगत के कारण चल रहा है। उनका कहना था कि माल कम पहुंचने के कारण बरसीन का रेट ज्यादा होना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिस कारण किसानों ने बोली पर आपत्ति उठाई। बोली कर रहे आढ़ती से जब पूछा गया कि आज कम माल होने पर भी बरसीन का रेट कम क्यों है, तो उसने बताया कि कु छ बरसीन की ट्रालियां बोली से पहले ही मंडी से रवाना हो गई हैं। किसानों ने इस बात का विरोध करते हुए कहा कि यदि बोली से पहले ही बरसीन से लदी ट्रालियों डेयरियों व टोका संचालकों के पास जाएंगी तो ऐसे में बोली का क्या औचित्य है। किसान अपने माल के रेट का आंकलन कैसे करेंगे।
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समर्थन मूल्य की रखी मांग
मौजूदा किसानों ने कहा कि गेहूं, धान, बाजरा, सरसों आदि फसलों की तरह सरकार को हरे चारे का भी समर्थन मूल्य निर्धारित करना चाहिए, ताकि किसानों को अपने माल व मेहनत का सही मूल्य मिल सके। किसानों ने बताया कि पिछले साल भी बरसीन के कम रेट को लेकर उनमें वह आढ़तियों में बहस हुई थी, जिसके चलते रेट किसानों के हित में ही रेट तय हुआ था।
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मार्केट कमेटी की ओर से एक व्यक्ति चारा मंडी में नियुक्त है, जो प्रतिदिन चारे की आवक की जानकारी रखता है। मार्केट कमेटी किसानों की समस्या का समाधान करवाने के लिए प्रयास करेगी, क्योंकि चारा मंडी किसानों के ऊपर ही निर्भर है।
- चंद्र मोहन, मंडी सुपरवाइजर