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पांच सौ से अधिक निगम पेंशनर्स की पेंशन रोकी, हाईकोर्ट ने कमिश्रर को दिया नोटिस

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अमर उजाला ब्यूरो
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अंबाला सिटी। नगर निगम के पांच सौ से अधिक पेंशनर्स को दो माह से पेंशन नहीं मिली है। लाखों की पेंशन निगम पर बकाया है। पेंशनर्स ने मामले को लेकर निगम अधिकारियों से बात की तो उल्टा उन्हें कोर्ट में जाने को कहा गया। इसके बाद नगर पालिका सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ ने हाईकोर्ट में अवमानना का केस दायर किया, जिसके बाद अब कोर्ट ने निगम कमिश्नर जयबीर सिंह आर्य और अकाउंट ऑफिसर मनोज कुमार शर्मा को नोटिस जारी कर दिए हैं। दोनों अधिकारियों को 14 नवंबर से पहले जवाब दाखिल करने और कोर्ट में पेश होने को भी कहा गया है।
कर्मचारी संघ के प्रधान संत राम सौदा ने कोर्ट की अवमानना का केस गत दिनों दायर किया था। उन्होंने बताया कि अगस्त और सितंबर की पेंशन अभी तक निगम ने जारी नहीं की है। निगम के करीब 550 पेंशनर्स है, जिनको निगम द्वारा करीब 75 लाख रुपये पेंशन दी जाती है। वर्ष 2013 में मामले को लेकर हाईकोर्ट ने फैसला दिया था और कहा था कि निगम स्टाफ से पहले पेंशनर्स को उनकी पेंशन निगम द्वारा दी जाएगी। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद नियमित तौर पर पेंशनर्स को उनकी पेंशन मिल रही थी, मगर अगस्त और सितंबर की पेंशन अब रोक दी गई है। मामले को लेकर वह कई बार अधिकारियों से भी मिले। अधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला भी दिया गया, मगर सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप था कि उल्टा अधिकारी ही बोले की कोर्ट में केस डाल दो, जिसके बाद अब कुछ दिन पहले हाईकोर्ट में अवमानना का केस दायर किया गया। इसी पर अब सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 14 नवंबर को अगली तारीख तय की है और नोटिस जारी कर निगम कमिश्नर और अकाउंट ऑफिसर से जवाब मांगा है।
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कर्मचारियों को जारी कर दी तनख्वाह
उधर, नगर निगम ने सोमवार को निगम कर्मचारियों की तनख्वाह जारी कर दी है। विभिन्न ब्रांचों के कर्मियों को निगम द्वारा तनख्वाह दी गई है जबकि हाईकोर्ट ने यह आदेश निगम को दिए थे कि निगम स्टाफ से पहले पेंशनर्स को यह उनकी पेंशन दी जाए।
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किराएदार को निगम ने थमाया नोटिस............ (फोटो नंबर : 32)
उधर, सेवा समिति चौक के निकट दुकानदार अजय कुमार को नगर निगम ने नोटिस जारी कर दुकान खाली करने का फरमान सुना दिया है। नोटिस जारी होने के बाद अजय ने अब अदालत की शरण ली है। अजय ने बताया कि गत दिनों सेवा समिति चौक के निकट निगम ने करीब दो दर्जन दुकानदारों को तहबाजारी के तहत जगह खाली करने के नोटिस दिए हैं और इन्हीं नोटिस में उसे भी शामिल कर दिया है जबकि उसकी दुकान तहबाजारी के तहत नहीं आती। उसने बताया कि उसकी वह निगम का नियमित किराएदार है, बीते 20 वर्षों से नियमित तौर पर किराया दे रहा है। मामला अदालत में है और अदालत ने 22 अक्तूबर को सुनवाई की अगली तारीख तय की है। मगर मंगलवार शाम को निगम कर्मचारी पुलिस के साथ आए और दुकान खाली करने के लिए दबाव बना रहे हैं। अजय ने कहा कि मामला अदालत में होने के बावजूद उसपर दबाव बनाया जा रहा है।
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