संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। दिल की बीमारियां जहां पहले शहरी क्षेत्र में अधिक हो रही थीं तो अब ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी इनकी चपेट में आ रहें हैं। वहीं नवजात में भी दिल की बीमारियां हो जाती हैं, जो बड़े होने के साथ ही बढ़ जाती है। इसे कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज कहते हैं। इस बीमारी से ग्रसित 250 बच्चों को स्वास्थ्य विभाग ने उपचार दिया है। यह बीमारी गर्भावस्था में माता के शरीर में कम मात्रा में फोलिक एसिड होने के कारण होती है, जिससे बच्चे के दिल की धड़कन में समस्या हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बीमारी के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य योजना के तहत 18 वर्ष तक के उन बच्चों का उपचार किया जाता है जो सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं या फिर आंगनबाड़ी में पंजीकृत होते हैं। यह योजना 2013 से शुरू हुई थी। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की ओर से 10 मोबाइल टीमें नियुक्त की गई हैं। ये टीमें जिले के विभिन्न स्कूलों व आंगनबाड़ी में जाकर बच्चों की जांच करती हैं। जांच के दौरान यदि बच्चे के दिल में कोई परेशानी दिखाई दिखती है तो उस बच्चे को अंबाला शहर के बीईआईसी भेजा जाता है, जहां पर गहनता से जांच के बाद बच्चे के उपचार के लिए विभाग के मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी जाती है। इसके बाद पीजीआई या विभाग के पैनल पर जो भी अस्पताल होता है उसमें बच्चे का उपचार किया जाता है, जिसका सारा खर्च सरकार द्वारा उठाया जाता है।
ये होती हैं समस्याएं
यदि किसी बच्चे को दिल से संबंधित कोई बीमारी होती है जैसे दिल की धड़कन का सही नहीं होना या फिर दिल में छेद होना।इसके कारण बच्चे की चीजों को समझने की क्षमता कम हो जाती है, चक्कर आते हैं, पढ़ाई ठीक से नहीं कर पाते तो वहीं खेलने में भी परेशानी होती है।
ढाई करोड़ रुपये हुए खर्च
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य योजना के जिला नोडल अधिकारी डॉ मयंक गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की निर्देशों पर इस योजना के तहत अब निजी अस्पतालों को भी पैनल में शामिल किया गया है। ऐसे में अब इस योजना का अब अधिक लाभ मिलेगा। सीएमओ डॉ कुलदीप सिंह के मार्गदर्शन में ही इस योजना के तहत कार्य किया जा रहा है। इस समस्या के उपचार पर विभाग लगभग ढाई करोड़ रुपये खर्च कर चुका है।