जिले में शुक्रवार शाम को आपरेशन मुस्कान के तहत पुलिस महकमे ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, जिला बाल संरक्षण विभाग और चाइल्डलाइन अंबाला के साथ मिलकर छापामारी की।
इस दौरान छह टीमों को अंबाला सिटी, अंबाला कैंट, नारायणगढ़, शहजादपुर, मुलाना और बराड़ा के बाजारी इलाकों में छापे मारने के लिए भेजा गया। इससे बाजारों में हड़कंप मच गया। इन टीमों ने विभिन्न स्थानों से 25 बाल मजदूरों को मुक्त करवाया है। ये सभी दुकानों, हलवाइयों, ढाबों और होटलों पर काम कर रहे थे।
छापेमारी में अंबाला पुलिस हेडक्वार्टर के एसीपी और ऑपरेशन मुस्कान के नोडल अधिकारी हितेश यादव भी शामिल रहे। पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम, अंबाला चाइल्डलाइन के निदेशक और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्य सरदार परमजीत सिंह बड़ौला और जिला बाल संरक्षण अधिकारी मेघा सिंगला भी उपस्थित रही।
सरदार परमजीत सिंह बड़ौला ने बताया कि ये छापामारी पुलिस के ऑपरेशन मुस्कान के तहत की गई है। शुक्रवार को छह टीमों ने छापेमारी की। इस दौरान अंबाला कैंट के बाजारों से 15, अंबाला सिटी के बाजारों से तीन, नारायणगढ़ के बाजारों से चार, शहजादपुर, मुलाना और बराड़ा के बाजारों से एक-एक बाल मजदूर को मुक्त कराया गया।
मजदूरी करते हैं बच्चे, वेतन एजेंट को
छापेमारी के बाद सभी बच्चों को शुक्रवार देरशाम चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी के समक्ष पेश किया गया। इनमें से चार बच्चों को उनके परिजनों को चेतावनी देकर सौंप दिया गया।
इस दौरान ऐसे भी कुछ केस सामने आए, जिनमें मजदूरी बच्चे कर रहे थे, लेकिन उनका भुगतान एजेंट ले रहा था। बच्चे के रहने, खाने और कपड़ों की जिम्मेदारी दुकान मालिक की होती थी। इन बच्चों से देर रात तक काम लेने के बाद एक कमरे में रात बिताने के लिए मजबूर किया जाता था।
इधर छापेमारी, उधर दौड़ाए बच्चे
पुलिस का ये ज्वाइंट एक्शन पूरी तरह से गोपनीय था। टीमें के बाजारों में पहुंचते ही बाजारों में हड़कंप मच गया। इसकी जानकारी होते ही बाल मजदूरी करवाने वाले दुकानदारों ने अपनी दुकानों से बच्चे भगाना शुरू कर दिए। दुकानदारों ने बच्चों से कहा कि उनकी छुट्टी हो गई है और वे चले जाएं। तब तक आएं, जब वे उन्हें बुलवाया न जाए।
ये ऑपरेशन बहुत महत्वपूर्ण है। इसके तहत बाल मजदूरी में लिप्त बच्चों को छुड़वाकर उन्हें उनके घर तक पहुंचाना है। शुक्रवार शाम को छापे के दौरान कई बच्चों को छुड़वाकर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष पेश किया गया। चार बच्चों को चेतावनी देकर उनके परिजनों को सौंपा है। बाकी बच्चों के लिए भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
-एसीपी हितेश यादव, नोडल अफसर, ऑपरेशन मुस्कान-
ये बहुत ही गंभीर मसला है कि बच्चों को दूसरे राज्यों से यहां लाकर उनसे बाल मजदूरी करवाई जा रही है। कई बार बच्चे लापता हो जाते हैं औरा एजेंटों के हाथ लग जाते हैं। एजेंट उनसे जबरदन बाल मजूदरी करवाते हैं। इस कार्रवाई के तहत इन सभी बच्चों को ढूंढकर उन्हें उनके घर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। 31 जुलाई तक ये छापेमारी जारी रहेगी।
-ओपी सिंह, पुलिस कमिश्नर, अंबाला पुलिस-