अंबाला। जिले के दो बड़े नागरिक अस्पतालों में एक्स-रे की सुविधा में ही भेदभाव हो रहा है। एक ओर जहां शहर के नागरिक अस्पताल में एक्स-रे की कुल चार मशीनें हैं और उन्हें पीपीपी पर चलाकर सुबह से रात यानी 24 घंटे की सुविधा देने का दावा किया जा रहा है। छावनी अस्पताल की बात करें तो महज ओपीडी के समय यानी दोपहर तक ही एक्स-रे की सुविधा मिलती है। इसके बाद एक्स-रे कमरे में ताला मिलता है।
मशीन न चलने की बात बोलकर या तो अंबाला सिटी अस्पताल रेफर किया जाता है या मरीज निजी सेंटर में चला जाता है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन की तरफ से रेडियोग्राफर की कमी होने की बात बोलकर पल्लाझाड़ लिया जाता है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल में एक्स-रे की एक बड़ी और दो पोर्टेबल मशीन हैं जबकि कैंसर सेंटर में भी एक्स-रे की मशीन उपलब्ध है। इन्हें मरीजों के लिए शाम और रात के समय चलाने के लिए पर्याप्त स्टाफ ही नहीं है।
एंबुलेंस चालकों की भी मनमर्जी
उधर, छावनी नागरिक अस्पताल की बात करें तो इमरजेंसी में मुलाना से लेकर आसपास के दर्जनों गांवों से लेकर कैंट की सैकड़ों कॉलोनियों से लोग हादसे के बाद पहुंचते हैं। दोपहर चार बजे के बाद अस्पताल में एक्स-रे नहीं होता। डॉक्टर या तो मरीज को सुबह आने को कहते हैं या रेफर करते हैं। आखिर में मरीज निजी सेंटरों में चला जाता है। न केवल उसे बाहर ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं जबकि कई बार अधिकतर मरीज एक्स-रे करवाने के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लेने को मजबूर रहते हैं, तब कहीं जाकर उपचार मिलता है।
वर्जन
रेडियोग्राफर एक ही स्थायी है। ऐसे में डिमांड कई बार भेजी जा चुकी है। ऐसे में बिना स्टाफ के शाम और रात को चलाना मुश्किल हो जाता है। इमरजेंसी केस में एक्स-रे के लिए बीच-बीच में बुला लिया जाता है।
डॉ. राकेश सहल, पीएमओ, छावनी नागरिक अस्पताल