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Ambala News: 24 करोड़ की परियोजना में देरी, सीपीडब्ल्यूडी की लापरवाही से अटका काम

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अंबाला छावनी ​स्थित कैंटोनमेंट बोर्ड का कार्यालय। फाइल फोटो
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अंबाला। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) की लापरवाही के कारण तोपखाना परेड क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों पर ग्रहण लग गया है। करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अस्पताल, सामुदायिक केंद्र और मैरिज पैलेस के निर्माण की योजना पिछले लंबे समय से अधर में लटकी हुई है। विभाग की इस सुस्ती का खामियाजा अब सीधे तौर पर स्थानीय जनता को भुगतना पड़ रहा है।
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लगातार हो रही इस लेट-लतीफी के कारण अब परियोजना की फंडिंग को लेकर भी संकट पैदा हो गया है। डीएफसीसीआईएल कॉरिडोर की ओर से इस परियोजना के लिए मिलने वाली राशि पर भी संशय बरकरार है। अधिकारियों को डर है कि यदि समय रहते काम शुरू नहीं हुआ, तो यह बजट वापस भी जा सकता है।




मुख्यालय से मांगेंगे मार्गदर्शन

परियोजना के नक्शे और अनुमानित लागत में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारी जल्द ही एक उच्च स्तरीय बैठक करने जा रहे हैं। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को स्पष्ट करने और परियोजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए उच्च मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा जाएगा।
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ये तीन बड़ी परियोजनाएं प्रभावित

क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए अस्पताल का निर्माण होना था। स्थानीय निवासियों के सामाजिक कार्यक्रमों के लिए आधुनिक सामुदायिक केंद्र की योजना थी जबकि तोपखाना परेड में एक भव्य पैलेस बनाने का प्रस्ताव था, इससे स्थानीय लोगों को तो फायदा होता और बोर्ड की आय भी बढ़नी थी।




जुलाई में लिया था कब्जा
कैंटोनमेंट बोर्ड ने तोपखाना परेड की लगभग 22 एकड़ जमीन पर कोर्ट के आदेशानुसार कब्जा लिया था। इस दौरान बरसों से जमीन पर खेती कर रहे लोगों को हटाया गया था। इस कार्रवाई के दौरान कैंटोनमेंट बोर्ड की टीम पर पत्थरबाजी भी हुई थी इसके बाद बोर्ड प्रशासन ने जमीन के चारों तरफ कांटेदार तार लगाकर कब्जा किया था। इस जमीन को लोगों की सुविधा अनुसार इस्तेमाल करने का फैसला किया था ताकि बोर्ड के राजस्व में बढ़ोतरी हो सके और जमीन का सदुपयोग किया जा सके।


नक्शे, डिजाइन और अनुमानित लागत को लेकर सीपीडब्ल्यूडी के साथ लगातार पत्राचार किया जा रहा है लेकिन वहां से अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण इन परियोजनाओं को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। जल्द ही इस संबंध में समीक्षा बैठक कर आगामी रणनीति तय की जाएगी ताकि करोड़ों रुपये के इस बजट का सही तरीके से जनहित में इस्तेमाल हो सके।
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- राहुल आनंद शर्मा, सीईओ, कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला।
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