अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। जिले की एकमात्र ई-रिक्शा चालक रेनू राय को बैंक के माध्यम से एक ई-रिक्शा उपलब्ध करवाया गया है। डीसी शरणदीप कौर बराड़ा ने रेनू को ई-रिक्शा की चाबी सौंपी और कहा कि उन्होंने आर्थिक तंगी से घबराने की बजाए मेहनत से आमदनी का रास्ता खोजकर समाज की दूसरी महिलाओं के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। अपना ई-रिक्शा पाकर रेनू के चेहरे पर सफलता की मुस्कान छलक रही थी। उसने डीसी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे अब अपने पति की आमदनी में हाथ बंटाकर परिवार का गुजारा बेहतर तरीके से कर पाएगी। डीसी के निर्देश पर प्रशासन द्वारा रेनू का चालक लाइसेंस भी बनवाकर दिया गया है।
बता दें कि इससे पहले रेनू को जुलाई में ई-रिक्शा से घर का खर्च चलाने की सोच के लिए प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया था। डीसी ने कहा कि गरीबी की मार से घबराकर जहां अधिकतर महिलाएं स्वयं और परिवार को ईश्वर के भरोसे छोड़ देती हैं वहीं रेनू राय ऐसी सशक्त महिलाएं भी हैं जो अपनी हिम्मत से जीवन की मुश्किलों में भी सफलता का रास्ता तलाश लेती हैं। रेनू ने ई-रिक्शा चलाकर परिवार की आय बढ़ाने में सराहनीय पहल करने वाली महिला के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
पहले घरों में काम करती थी रेनू
रेनू राय ने डीसी को बताया कि वे अपने पति नरेंद्र राय के साथ कैंट में रहती हैं। परिवार में पति-पत्नी के अलावा तीन बच्चे है, जिनमें दो-लड़कियां और एक लड़का है। उन्होंने कहा कि तीनों बच्चे स्कूल जाते हैं और उनके पति केवल मेहनत मजदूरी करके ही परिवार का गुजारा मुश्किल से चला पाते थे। वह स्वयं भी लोगों के घरों में साफ-सफाई जैसे कार्य करके महीने में मात्र 1000 से 1500 रुपये ही कमा पाती थी। घर की आर्थिक तंगी से निपटने के लिए उन्होंने ई-रिक्शा चलाने का निर्णय लिया और अपने पति को साथ लेकर ई-रिक्शा किराए पर लिया। उन्होंने कहा कि वह प्रतिदिन यह रिक्शा चलाकर जहां रिक्शा मालिक को 250 से 300 रुपये प्रति दिन का किराया अदा करती है वहीं परिवार के लिए भी 200 से 250 रुपये तक बचा लेती हैं। उन्होने कहा कि अब वे ई-रिक्शा के ऋण की किश्त आसानी से अदा करके घर के गुजारे लायक भी राशि बचा सकेंगी।