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‘बुलंदशहर शहर की घटना ने झकझोरा तो निकल पड़ीं महिलाओं को सबल बनाने’

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‘बुलंदशहर की घटना ने झकझोरा तो निकल पड़ीं महिलाओं को सबल बनाने’
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
महिला सशक्तीकरण का संदेश लेकर कन्या कुमारी से कश्मीर तक के लिए महिलाओं का एक जत्था निकला है। यूनाइट नेशंस के साथ क्रॉस बो माइलेज के नाम से शुरू किए गए इस अभियान की कमान सेना से सेवानिवृत्त एक लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारी की बेटी सृष्टि बक्शी के हाथों में है। यह पैदल यात्रा सोमवार दोपहर को अंबाला पहुंची। यहां पर सेना की टू कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल आलोक कलेर ने पदयात्रा का स्वागत किया। उन्हाेंने बताया कि बुलंदशहर में मां-बेटी के साथ हुई हैवानियत ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। तभी उन्होंने निर्णय लिया कि वह महिला सशक्तीकरण के लिए अभियान चलाएंगी।
महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के मुद्दे को लेकर पिछले साल 15 सितंबर को कन्याकुमारी से इसकी शुरुआत की थी। सृष्टि बक्शी के साथ संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी है। पत्रकारों से बातचीत में सृष्टि बक्शी ने बताया कि यह पदयात्रा अभी तक लगभग 3100 किलोमीटर का सफर तय कर चुकी है। 28 अप्रैल को यह यात्रा 3800 किलोमीटर का सफर पूरा करते हुए कश्मीर पहुंच जाएगी। इस दौरान ये टीम महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के मुद्दे पर कार्यशालाएं आयोजित करेगी। सृष्टि ने कहा कि 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ रेप करने वालों के लिए हरियाणा सरकार ने फांसी देने का कानून बनाया है। यह काबिल ए तारीफ है। यह पूरे देश मे लागू होना चाहिए। पदयात्रा के 186वें दिन अंबाला पहुंचने पर सेना से मिले मान सम्मान पर सृष्टि ने भारतीय सेना को तह-ए-दिल से धन्यवाद दिया।
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रिटायर्ड सैनिकों ने भी किया स्वागत
रिटायर्ड सैनिकों ने यात्रा की अगुवाई कर रही सृष्टि बक्शी का पांव छूकर और फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया। एक्स सर्विसमैन वेलफेयर कमेटी की ओर से सृष्टि को सिरोपा पहनाकर सम्मानित किया गया। कमेटी के अध्यक्ष अतर सिंह मुलतानी ने कहा कि उन्हें बेटी पर गर्व है।
अंबाला में मिग-21 फाइटर : कलेर
जीटी रोड पर काली पलटून पुल पर सेना अधिकारियों और उनके परिवारों ने सृष्टि बक्शी के साथ अनुभव साझा किए। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में ले. जनरल कलेर ने कहा कि देश की बेटियां जागरूक हो गई हैं। इसलिए वह महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण जैसे मुद्दों को लीड कर रही हैं। कई बेटियां सेना में शामिल होकर देश सेवा करती हैं। मिग-21 उड़ाने वाली पहली महिला फाइटर पायलट भी अंबाला में आ चुकी हैं। यह अंबाला के लिए गर्व की बात है।
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रीति-रिवाजों से उत्पन्न होती हैं समस्याएं : सृष्टि
सृष्टि बक्शी ने कहा कि हमारी समस्याएं सामाजिक हैं। यह पारंपरिक रीति रिवाजों से उत्पन्न होती हैं। इन समस्याओं में बाल विवाह, दहेज उत्पीड़न, शिक्षा की कमी, कुपोषण, बेटा-बेटी की शिक्षा में भेदभाव, शराब के कारण घरेलू हिंसा शामिल है। इसके अलावा बलात्कार, तेजाब से हिंसा और उत्पीड़न जैसी गंभीर अपराध भी हैं।
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