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- मौके पर पहुंचे डीआरएम, सेक्शन इंजीनियर को लगाई फटकार
- हर दिन पांच से दस मीटर खिसकाया जाएगा काली पलटून पुल पर गर्डर
- पुल बदलने के कार्य की वजह से डेढ़ वर्ष से बंद पड़ा है काली पलटून पुल
- अंबाला-लुधियाना रेलमार्ग पर 45 मिनट के लिए लिया गया था पहला ब्लॉक
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। रेलवे स्टेशन के आउटर पर स्थित काली पलटून पुल के गर्डर को खिसकाने के लिए रेल मंडल को पहली बार शुक्रवार 45 मिनट का ब्लॉक मिला था। इन 45 मिनटों में पूरा कार्य जोर-शोर तरीके से किया जाना था, पर निरीक्षण के लिए दोपहर डीआरएम दिनेश कुमार जब मौके पर पहुंचे तो काम करने वाला स्टाफ गायब मिला। पता चला कि लंच टाइम होने की के कारण स्टाफ नहीं है। गुस्साए डीआरएम ने मौके पर मौजूद सेक्शन इंजीनियर को कड़ी फटकार लगाई। इसके बाद स्टाफ को आनन-फानन में बुलाकर कार्य को चालू किया गया। दूसरी ओर सेक्शन इंजीनियर ने कहा कि स्टाफ सुबह से ही काम पर था, मगर ब्लॉक अचानक लिया गया। इस वजह से दिक्कत हुई। उधर, ब्लॉक के दौरान तालमेल का अभाव साफ नजर आया। इस कारण कुल 45 मिनट के ब्लॉक में करीब 25 मिनट ही काम सुचारु रूप से हो सका।
रेल मुख्यालय से लिया गया था ब्लॉक
डेढ़ वर्ष पहले अंबाला-लुधियाना रेलमार्ग पर काली पलटून पुल को बदलने का का काम शुरू किया गया था। सवा सौ वर्ष से अधिक पुराने पुल के ढांचे को हटाकर नया ढांचा लगाया जाना था। मुख्यालय से रेलवे को प्रतिदिन दोपहर 45 मिनट ब्लॉक की अनुमति मिली थी और शुक्रवार पहले दिन यहां पर पुराने पुल खिसकाने का शुरू किया गया था। डेढ़ बजे अमृतसर-बांद्रा पश्चिम सुपरफास्ट एक्सप्रेस के आते ही ब्लॉक की अवधि आरंभ कर दी गई थी। रेल अधिकारियों को उम्मीद थी कि इस अवधि में पुल के गर्डर को खिसकाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा पर निरीक्षण पर जैसे ही डीआरएम दिनेश कुमार मौके पर आए तो स्टाफ को गायब देखकर उनका परा चढ़ गया। डीआरएम जानते थे ब्लॉक में एक-एक क्षण कितना कीमती है और स्टाफ नहीं होने व कार्य बंद होने पर उन्होंने मौके पर मौजूद सीनियर सेक्शन इंजीनियर रणधीर सिंह को कड़ी फटकार लगाई। इंजीनियर ने डीआरएम को बताया कि कर्मचारी लंच करने चले गए थे। अब सवाल है क्या ब्लॉक के सही समय की सूचना स्टाफ को मिली थी या फिर काम देरी से आरंभ करना कर्मचारियों की लापरवाही थी। बता दें कि ब्लॉक के दौरान कार्य में गड़बड़ी होने का यह मामला नया नहीं है। अभी कुछ माह पहले ही अंबाला-सहारनपुर रेलमार्ग पर शास्त्री कालोनी के निकट लिए गए ब्लॉक के दौरान भी गड़बड़ी हुई थी। इस वजह से रेलमार्ग के नीचे ड्रेन का निर्माण नहीं हो सका था।
हर दिन पांच से दस मीटर खिसकेगा गर्डर
काली पलटून पुल निर्माण के लिए रेलवे पहले 72 घंटे का ब्लॉक मुख्यालय से मांग रहा था। मगर पुल के नीचे से अंबाला-लुधियाना और अंबाला-चंडीगढ़ रेलमार्ग गुजरता है। प्रतिदिन 350 से अधिक ट्रेनें यहां से निकलती हैं। इस वजह से 72 घंटे का ब्लॉक देना संभव नहीं था। इसी वजह से अब प्रतिदिन दोपहर के समय 45 मिनट का ब्लॉक रेलमार्ग पर आगामी 13 दिनों तक लगातार लिया जाएगा। योजना के मुताबिक करीब पांच से दस मीटर नए गर्डर को रोजाना खिसकाया जाएगा जबकि पुराने गर्डर को हटाया जाएगा। गर्डर स्थापित होने के बाद पुल पर सड़क व अन्य निर्माण कार्य को अंतिम रूप दिया जाएगा।
टाइम फिक्स नहीं था, हमें बताया नहीं गया : रणधीर सिंह (फोटो नंबर : 16)
सीनियर सेक्शन इंजीनियर रणधीर सिंह ने मीडिया को बताया कि सुबह से ही साइट पर लेबर लगी और लंच टाइम के लिए आधा घंटा दिया गया था। मगर उसी समय ब्लॉक ले लिया गया। ब्लॉक का टाइम फिक्स नहीं था और इस संबंध में हमें बताया नहीं गया था।
सेना व सिविलियन को परेशानी
बता दें कि काली पलटून पुल डेढ़ वर्ष से बंद होने की वजह से सेना के अलावा सैकड़ों सिविलियन को चार से पांच किलोमीटर लंबा चक्कर लगाकर कैंट की ओर आना पड़ रहा है। रेलमार्ग के दूसरी तरफ सेना की महत्वपूर्ण मिसाइल व तोपखाना रेजीमेंट हैं जिन्हें पुल बंद होने से मूवमेंट में खासी दिक्कत होती है। गत दिनों सब एरिया हेडक्वार्टर के ब्रिगेडियर व अन्य अधिकारी इस समस्या को लेकर डीआरएम से मिल भी चुके हैं।
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शुक्रवार ब्लॉक का पहला दिन था। इस वजह से को-आर्डिनेशन की कमी हुई। आगे यह कमी न रहे इसके लिए पूरा ध्यान रखा जाएगा ताकि तय समय में काम पूरा हो सके।
- दिनेश कुमार, डीआरएम, अंबाला रेल मंडल।