एक एंबुलेंस के सहारे नारायणगढ़ सिविल अस्पताल
नारायणगढ़।
कहने को तो नारायणगढ़ सिविल अस्पताल में तीन एंबुलेंस है, मगर एक ही एंबुलेंस इस समय चल रही है जिससे मरीजों को इमरजेंसी में अन्य अस्पताल तक ले जाने में परेशानी हो रही है। ऐसे में मरीजों को ले जाने के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है जिससे मरीजों व उनके परिवारों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। नारायणगढ़ सिविल अस्पताल में ओपीडी के हिसाब से यहां पर इस समय पांच एंबुलेंस की जरूरत है, मगर अस्पताल में कागजों में तीन एंबुलेंस है जिनमें से दो अभी खराब पड़ी है। ऐसे में साफ है कि मरीज आखिरकार जाए तो कहां जाए। उन्हें मजबूरी में निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है। मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को होने के बावजूद भी इस संबंध में विभागीय अधिकारी कार्यवाही नहीं कर रहे हैं जबकि यहां मरीज परेशान है। अस्पताल में औसतन हर दिन सड़क दुर्घटना या अन्य हादसे में घायल हुए लोग आते हैं। उन्हें इमरजेंसी में पीजीआई चंडीगढ़ या फिर अंबाला सिटी सिविल अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में एंबुलेंस नहीं मिलने पर निजी एंबुलेंस के भरोसे नारायणगढ़ का सिविल अस्पताल इस समय चल रहा है।
15 रुपये प्रति किलोमीटर वसूलते किराया
निजी एंबुलेंस संचालक 15 से 20 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से कराया वसूलते हैं जबकि इसके विपरीत सरकारी एंबुलेंस डिलीवरी या एक्सीडेंट केस के लिए नि:शुल्क उपलब्ध रहती है। मगर यहां पर विभाग की लापरवाही के चलते मरीजों को आए दिन परेशानी झेलनी पड़ रही है।
एक एंबुलेंस में भर रहे मरीज
आलम यह है कि एक एंबुलेंस होने के कारण कई मरीजों को एक साथ ले जाना पड़ रहा है। मसलन यदि कोई डिलीवरी का केस है जिसे अंबाला सिटी अस्पताल रेफर किया जाना है तो उसी के साथ ही अन्य मरीज को एंबुलेंस में ले जाया जा रहा है। एक एंबुलेंस में ज्यादा मरीज भरे जा रहे हैं।
हिमाचल से भी आते मरीज
गौरतलब है कि नारायणगढ़ का सिविल अस्पताल क्षेत्र में एकमात्र बड़ा अस्पताल है। यहां पर नारायणगढ़, पंचकूला जिले के रायपुर रानी क्षेत्र के अलावा साथ लगते हिमाचल प्रदेश से भी इमरजेंसी में और अन्य केस आते हैं। यहां पर प्रतिदिन ढाई सौ से ज्यादा ओपीडी है। मगर बावजूद इसके यहां पक केवल एक एंबुलेंस होने से यहां स्थिति खराब है।
यह बोले क्षेत्र के निवासी
- नारायणगढ़ निवासी हरीश कुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले उनके रिश्तेदार सड़क हादसे में घायल हो गए थे। उन्हें इमरजेंसी से पीजीआई चंडीगढ़ रिश्तेदार को निजी एंबुलेंस में ले जाना पड़ा था। अस्पताल की एंबुलेंस मौके पर नहीं थी। विभाग अच्छा इलाज के दावे तो बहुत करता है मगर हकीकत कोसों दूर है।
कोट्स
एंबुलेंस का रखरखाव और अन्य व्यवस्था जिला मुख्यालय स्तर पर होती है। मरीजों को यदि कोई दिक्कत है तो मामले में जल्द कार्यवाही की जाएगी।
- डॉ. राम प्रकाश, एसएमओ, नारायणगढ़।