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फ्लैग : लावारिस पशुओं को पकड़ने में निगम फिसड्डी, उधर, गोसेवा आयोग के चेयरमैन बोले- 90 प्रतिशत लावारिस पशुओं की हुई टैगिंग
हेडिंग : मंगला जी! अंबाला में लावारिस पशुओं की नहीं हुई टैगिंग
ट्विन सिटी में लावारिस पशुओं के मामले में भयावह होती जा रही है स्थिति
निगम के नोटिसों के बावजूद ग्वाले सड़कों पर पशु छोड़ रहे हैं
कितने पशु ट्विन सिटी की सड़कों पर, निगम से लेकर आयोग के पास सही आंकड़ा नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। ट्विन सिटी में लावारिस पशुओं को पकड़ने में नगर निगम अब तक फिसड्डी साबित हुआ है। आलम यह है कि चार बार निगम पशुओं को पकड़ने का टेंडर निकाल चुका है, मगर किसी भी आवेदनकर्ता ने अब तक इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई है। सड़कों पर पशुओं की भरमार है और आए दिन इनकी वजह से वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं। गत दिनों यूटिलिटी कोर्ट में भी पशुओं की वजह से हुए हादसों के आंकड़े याचिकाकर्ताओं ने प्रस्तुत किए थे। ट्विन सिटी में स्थिति भयावह बनी हुई है जबकि हरियाणा गोसेवा आयोग के चेयरमैन भानीराम मंगला अलग ही आंकड़े प्रस्तुत कर रहे हैं। उनका मानना है कि प्रदेश में 90 प्रतिशत तक लावारिस पशुओं की टैगिंग की जा चुकी है और सड़कों पर पहले से स्थिति ज्यादा बेहतर हुई है। चेयरमैन के लाख दावों के बावजूद अंबाला में स्थिति उलट है। यहां न तो पशुओं की टैगिंग हुई, न ही अब तक पशुओं को पकड़ने, गोशाला में रखने, चारे आदि का इंतजाम करने के व्यापक प्रबंध हैं।
एक वर्ष में तीन सौ से अधिक पशु तोड़ चुके दम
नगर निगम की देखरेख में बीते वर्ष स्थापित की गई टंगैल एवं सुल्लर स्थित नंदीशाला में एक वर्ष में 300 से अधिक गायों की मौत हो चुकी है। दोनों नंदीशालाओं में क्षमता से अधिक पशुओं को पकड़कर भेजा गया। यहां न चारे की व्यवस्था थी, न ही शेड एवं पानी की।
विभिन्न हादसों में तीन की मौत, 83 से अधिक घायल
पांच वर्ष के आंकड़े यूटीलिटी कोर्ट में गत दिनों लावारिस पशुओं के मामले में याचिकाकर्ता एवं वकीलों ने प्रस्तुत किए थे। इनमें बताया गया कि पांच वर्षों में 83 लोग लावारिस पशुओं की वजह से हादसों का शिकार हो चुके हैं। यह तो वह मामले थे जोकि ऑन रिकार्ड हैं। ऑफ रिकार्ड यह आंकड़े इससे कई गुणा ज्यादा हैं। बीते कुछ वर्षों में तीन लोगों की मौत तक पशुओं की वजह से हो चुकी है।
कोट्स
अंबाला में लावारिस पशुओं को लेकर कार्रवाई की जा रही है। निगम जल्द इसके लिए पशुओं को पकड़ने के टेंडर कॉल कर रहा है। नंदीशालाओं की स्थिति में भी सुधार किया जा रहा है। गो सेवा आयोग की मदद से भी कार्य किया जाएगा ताकि ट्विन सिटी को लावारिस पशु मुक्त किया जा सके।
- कैप्टन शक्ति सिंह, एडीसी, अंबाला।
लावारिस पशुओं को पकड़ने में सामाजिक जागरूकता जरूरी : मंगला
अंबाला कैंट। हरियाणा गोसेवा आयोग के चेयरमैन भानीराम मंगला ने कहा कि लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए सामाजिक जागरूकता की भी जरूरत है। ग्वाले एवं डेयरी संचालक अपने दुधारू पशुओं को छोड़ देते हैं। पशुओं को सड़कों पर छोड़ने की समस्या से निपटने के लिए ऐसे पशुपालक के विरुद्ध प्रत्येक पशु 5100 रुपये की दर से जुर्माना निर्धारित किया गया है। आगामी दो-तीन महीनों में सड़कों पर पशुओं की स्थिति में सुधार होगा।
कैंट स्थित रामबाग गोशाला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हरियाणा गोसेवा आयोग के चेयरमैन भानीराम मंगला ने कहा कि प्रदेश की जेलों में गोशालाएं स्थापित की जा रही हैं। करनाल जेल से इसकी शुरुआत हो चुकी है। जिन जेलों में स्थान उपलब्ध होगा, उनमें 600 गोवंश की क्षमता की गोशालाएं खोली जाएंगी, जिनमें 200 दुधारू गाय रखी जाएंगी। इससे जहां जेल की दूध संबंधी जरूरतें पूरी होंगी, वहीं जेलों में बायोगैस प्लांट स्थापित करके गाय के गोबर से रसोई में प्रयोग होने वाली गैस संबंधी जरूरत को पूरा किया जाएगा। उन्होंने अंबाला जिले की नौ गोशालाओं को 7.37 लाख की राशि के अनुदान चेक भी वितरित किए। बताया कि बिजली का खर्च कम करने के लिए प्रदेश की 278 गोशालाओं में मुख्यमंत्री गोशाला जगमग योजना के तहत सौर ऊर्जा प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसके लिए सरकार द्वारा 15 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है और सौर प्लांट लगाने के खर्च का 10 प्रतिशत हिस्सा संबंधित गोशाला को वहन करना होगा। गोशालाओं में ऐसी सुविधा प्रदान करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य है। गोशालाओं को स्वाबलंबी बनाने के लिए गोबर से गमले, डंडे, दीए, टिक्कियां और धूपबत्ती तथा गोमूत्र से फिनाइल और गोअर्क बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह उत्पाद बनाने के लिए मशीनें खरीदने पर सरकार 90 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करवाएगी। इस अवसर पर एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह, पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रेम सिंह, हरियाणा गो सेवा आयोग के सदस्य राजिंद्र बंसल, रामबाग गोशाला के अध्यक्ष भूषण गुप्ता, सचिव कमल कौशिक, राजिंद्र जैन, संदीप कुमार, बलवंत सिंह धुराला मौजूद रहे।
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चेयरमैन ने ये गिनाए आंकड़े
-पहले लगभग 1.35 लाख गोवंश सड़कों पर बेसहारा घूमते थे। इनमें से 1.10 लाख गोवंशों को गोशालाओं व नंदीशालाओं में भेजा जा चुका है। शेष गोवंश को भी शीघ्र सड़कों से हटा दिया जाएगा।
- बेसहारा गोवंश को सहारा देने के लिए पानीपत के गांव नैन व हिसार जिले के गांव ढंढूर में 50-50 एकड़ क्षेत्र में दो गो-अभ्यारण बनाए जा रहे हैं और प्रत्येक में 5000 गोवंश का पालन-पोषण किया जाएगा।
- यदि कोई गांव कम से कम दो एकड़ क्षेत्र भूमि उपलब्ध करवाकर गोशाला स्थापित करवाना चाहता है तो उसे भी 5 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
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