स्वच्छ भारत मिशन पर 13.23 करोड़ खर्च करने के बावजूद गंदगी का आलम
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तीन वित्तीय वर्षों में सरकार की ओर से भेजी गई राशि, सफाई के मामले में जनता को नहीं मिल पाई राहत
विशेष अभियान भी दिख रहे बेअसर, सफाई व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
कुलदीप चहल
अंबाला कैंट। स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार की ओर से भेेजे गए 13.23 करोड़ रुपये करने के बाद भी ट्विन सिटी की जनता को गंदगी से राहत नहीं मिल पाई है। यह राशि तीन वित्तीय वर्षों में भेजी गई, जबकि हर साल रकम का आंकड़ा बढ़ता गया। हालात यह बने हुए हैं कि विशेष अभियान जहां बेअसर दिखाई दे रहे हैं, वहीं सफाई व्यवस्था पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। लोगों का भी यही कहना है कि गंदगी से शायद ही राहत मिल पाए, जबकि हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं।
इस तरह से मिली राशि
हाउसिंग बोर्ड निवासी मदन लाल द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी ने स्वच्छ भारत मिशन की पोल खोलकर रख दी है। सफाई के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये दिल खोलकर दिए, लेकिन ट्विन सिटी में कचरे से निजात नहीं मिल पाई है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में जहां सरकार ने नगर निगम अंबाला को 184.83 लाख रुपये, साल 2016-17 में 255.71 लाख रुपये, साल 2017-18 में 882.65 लाख रुपये प्राप्त हुए। इस राशि में नगर निगम ने सफाई के लिए सामान की खरीद पर 385.884 लाख रुपये खर्च किए। कुल मिलाकर स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार ने नगर निगम अंबाला को 13 करोड़ 23 लाख रुपये दिए है लेकिन इस जनता को गंदगी से राहत नहीं मिल पाई है।
इस तरह से चला मिशन, लेकिन...
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में कई बार अभियान चलाए गए। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां जागरूकता अभियान चलाए, वहीं नगर निगम अंबाला क्षेत्र के लिए भी कई योजनाएं इसके तहत चलाई गईं।
- ओपन यूअर आइज (ओए) के तहत डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की योजना बनी, लेकिन इस पर घपले के आरोप लगे।
- लोगों के घरों के आगे से कूड़ा उठा नहीं और उनको बिल थमा दिए गए, जिस पर विवाद भी हुआ।
- हर प्रॉपर्टी के बाहर यूआईडी नंबर भी लगाए गए, लेकिन फिर भी कूड़ा नहीं उठा।
- ठेकेदार से नाराज कर्मचारियों ने कई बार हड़ताल की और योजना के तहत घरों से कूड़ा नहीं उठाया गया।
- हर साल कई बार जागरूकता अभियान चला, मंत्रियों से लेकर विधायकों, नेताओं व अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर सफाई की।
- सफाई कार्य में सर्वश्रेष्ठ रहने वाली पंचायतों को पुरस्कार मिला, जबकि निगम व निकाय क्षेत्रों में भी काम किया गया।
- एक विशेष टीम को दीवारों पर पेंटिंग के जरिये जागरूक करने के लिए अंबाला बुलाया गया।
- सड़कों की सफाई के लिए विशेष मशीनें भी लगाई गईं।
- घरों से कूड़ा उठा या नहीं, उसकी मॉनीटरिंग की योजना भी अधर में लटकी है।
- स्वच्छता के लिए जरूरी डेयरियों को निगम क्षेत्र से बाहर नहीं किया जा सका।
-पटवी स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं चल पाया, जबकि कूड़े से बिजली बनाने की योजना भी अधर में ही है।
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स्वच्छ भारत मिशन को लेकर उतनी सफलता नहीं मिल पाई, जितनी मिलनी चाहिए थी। यह सच है कि करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद ट्विन सिटी में गंदगी है। बेशक स्वच्छता रैंकिंग में सुधार कर लिया हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
-आनंद मोहन शुक्ला, समाज सेवी, अंबाला।
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स्वच्छता का टारगेट हासिल करने के लिए एक के बाद एक योजनाएं तो बनाई गईं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसका कोई फायदा मिला हो। जब तक किसी भी योजना की मॉनीटरिंग पूरी तरह से नहीं होती, तब तक जितने मर्जी रुपये खर्च कर लिए जाएं, उसका फायदा शायद ही मिले।
-रविंदर कुमार बख्शी, एडवोकेट, अंबाला।
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स्वच्छ भारत मिशन एक अच्छा अभियान था, लेकिन जिस तरह से अंबाला में इसे लेकर काम हुआ वह अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया। कभी विवाद तो कभी हड़ताल। दूसरा अधिकारी भी इसकी मॉनीटरिंग पूरी तरह से कर नहीं पाए।
-सुनील ठाकुर, एक्स मेंबर ग्रीवेंसिज कमेटी, अंबाला।
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सफाई व्यवस्था का तो बुरा हाल है, जबकि दावे लंबे चौड़े किए जाते रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन को लेकर जो भी प्रयास किए गए, वह जागरूकता पर अधिक रहे, जबकि इसमें कुछ तो सख्ती की जाती। फिर चाहे सख्ती जनता पर हो या सफाई कर्मचारियों पर। दूसरा अभी तक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट ही नहीं चल पाया।
-डिंपल मित्तल, पूर्व पार्षद, नगर परिषद, अंबाला कैंट।