अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। मेरे सोनी तूने चंगा काम कित्ता, शहीद का दर्जा ले लित्ता... यह कहते हुए शहीद विक्रमजीत सिंह उर्फ सोनी की मां कमलेश कौर उसके पार्थिव शरीर से काफी देर तक लिपटी रहीं। पत्नी हरप्रीत कौर बार-बार यही कहते हुए बेहोश हो रही थीं कि मुझे मेरे सोनी से मिला दो। वहीं पार्थिव शरीर जब घर से ले जाया जाने लगा तो शहीद की भाभी बेहोश हो गई। यह दृश्य देख वहां मौजूद सभी लोगों के आंखों में आंसू छलक पड़े। इस दौरान शहीद के अंतिम दर्शन के लिए लोग बेताब दिखे। सेना व पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा।
6 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में आतंकवादी घुसपैठ को रोकते हुए शहीद हुए गांव तेपला निवासी लांस नायक विक्रमजीत सिंह का वीरवार को गांव तेपला में राजकीय और सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद का पार्थिव शरीर बुधवार शाम लगभग 6 बजे एयरफोर्स स्टेशन अंबाला छावनी पहुंचा था और रात को पार्थिव शरीर सेना अस्पताल के मोर्चरी हाउस में रखा गया था।
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काफिले के साथ तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को लाया गया
वीरवार सुबह 8 बजे काफिले के साथ तिरंगे में लिपटे शहीद के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव ले जाया गया। शहीद के सम्मान में न केवल पूरा गांव बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लोग, जिला व पुलिस प्रशासन भी पहले से तैनात था। शहीद के पार्थिव शरीर को पहले उनके घर ले जाया गया, जहां परिजनों ने अंतिम दर्शन किए और वहां उपस्थित हजारों की भीड़ में हर आंख नम थी।
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गुरुद्वारे में ले जाया गया पार्थिव शरीर
मेजर सलीम सय्यद की अगुवाई में सेना के पाईपर बैंड के साथ शहीद के पार्थिव शरीर को गांव में गुरुद्वारा साहिब ले जाया गया और वहां से शमशान भूमि में संस्कार किया गया।
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भाई बोला- तेरे ऊपर घर की जिम्मेदारियां बहुत थीं, मैं शहीद हो जाता तो अच्छा था
संस्कार के समय पिता बलजीत सिंह, माता कमलेश कौर विक्रमजीत सिंह की शहादत पर कभी गर्व कर रहे थे तो कभी बात करते फफक पड़ रहे थे। सभी गांववासियों ने शहादत पर गर्व करते हुए कहा कि बचपन से ही देशसेवा की इच्छा रखने वाले इस युवा ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए शहादत हासिल की है। वहीं उसका भाई मोनू बिलख रहा था कि तुझे देश की जरूरत थी। साथ ही घर की भी काफी जिम्मेदारियां थी। मैं शहीद हो जाता तो अच्छा था।