डाक्टर ने दुर्व्यवहार किया तो एसीआर से कटेंगे नंबर
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। कहते हैं कि यदि हकीम का व्यवहार मरीज के साथ अच्छा हो तो उसका आधा मर्ज यूं ही गायब हो जाता है। सरकारी अस्पतालों में स्टाफ के बदलते व्यवहार और विभाग को मिलती लगातार शिकायतों के बाद अब स्वास्थ्य विभाग सुधार के बड़े कदम उठाने पर काम करने जा रहा है। इसके लिए बाकायदा सेहत विभाग के मुख्यालय से जिले के सीएमओ को लिखित में पत्र भी आ गया है। यह पत्र सीएमओ द्वारा सभी एसएमओ, पीएमओ और आरएमओ व अन्य डॉक्टरों व स्टाफ को भेजे जाएंगे। विभाग इस कवायद के जरिए पेशेंट और डॉक्टर फ्रेंडली माहौल बनाने की कोशिश भी की जा रही है।
---------------
डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के व्यवहार पर होगी नजर
सिविल अस्पतालों, पीएचसी और सीएचसी में आने वाले मरीज कई बार वहां के स्टाफ के व्यवहार को लेकर शिकायत करते हैं, जिससे महकमे की किरकिरी तो होती है। साथ ही लोगों का सरकारी सेवाओं के प्रति मोह भी भंग हो जाता है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को कई बार स्टाफ के कोप का भाजन बनना पड़ जाता ह, जिसके बाद आरोपों-प्रत्यारोपों के दौर भी लंबे हो जाते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए विभाग के सीनियर अधिकारी डीजी हेल्थ डा. सतीश अग्रवाल की ओर से सीएमओ को पत्र भेजा गया है, जिसमें हिदायतों की लंबी फेहरिस्त है। हिदायतों के अनुसार अस्पतालों के सभी स्टाफ कर्मियों को प्राप्त वर्दी में रहना होगा। चाहे वो डॉक्टर हो, नर्स या फिर एंबुलेंस स्टाफ। इसके साथ मरीजों से भी इन लोगों को प्यार से बात करनी होगी नहीं तो शिकायत मिलने पर उनकी एसीआर पर खतरे के लाल निशान लग सकते हैं।
अस्पताल में मोबाइल प्रयोग करने वाले कर्मचारियों पर रहेगी नजर
अंबाला के सीएमओ डा. विनोद गुप्ता इसे बड़ा क्रांतिकारी कदम मानते हैं। सीएमओ ने बताया कि मॉनिटरिंग कमेटी चुपचाप अस्पतालों में जाकर कर्मचारियों के व्यवहार और उनके काम काज का आंकलन कर आएगी। यदि किसी मरीज और उसके तीमारदार ने स्वास्थय सेवाओं और सेवकों पर कोई आपत्ति उठाई है तो उसका फीडबैक भी यही मानिटरिंग कमेटी करेगी। अस्पताल की साफ सफाई से लेकर ड्यूटी के दौरान मोबाइल पर चिपके रहने वाले कर्मचारियों पर विभाग की गाज गिर सकती है। इसके साथ ही यह भी तय किया जाना चाहिए कि रोज अस्पताल से मेडिकल वेस्ट उठाया जाए और बैड शीटस व पिलो कवर भी बदले जाएं।
लेटलतीफी पर होगा एक्शन
डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को ड्यूटी पर देरी से आना महंगा पड़ सकता है। यह नियम ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों पर भी लागू होंगे। विभाग की गाज न गिरे इससे बचने के लिए कर्मचारियों को टाइम पर अस्पताल आना होगा। मानिटरिंग कमेटी इन सब बातों के अलावा कई अन्य पहलुओं का गुपचुप तरीके से आंकलन करेगी जिसके आधार पर कर्मचारियों की एसीआर बन और बिगड़ भी सकती है।
यह बोले मंत्री विज
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रदेश सरकार ने शानदार काम किए हैं। सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को अच्छा इलाज मुहैया करवाना लक्ष्य है। अनुशासन विभाग की पहली कसौटी है जिसके बारे में अधिकारी निरंतर अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को गाइडलाइंस जारी करते रहते हैं। मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध करवाना, अस्पताल को साफ सुथरा रखना, हर दिन के हिसाब से चादर बदलना, टाइम पर अस्पताल में आना और मरीजों से व्यवहार ठीक रखना आदि विभाग की प्राथमिकताएं हैं।
कोट्स
विभाग की ओर से हमें गाइड लाइन को लेकर पत्र भेजा गया है जिसके बारे में सभी एसएमओ, पीअएमओ और आरएमओ व अन्य डॉक्टरों को इसकी प्रति भेजी जाएगी। अस्पताल के स्टाफ के कामकाज का लेखा जोखा तैयार होगा। कोताही बरतने वालों पर कड़ा विभागीय एकशन लेने का भी प्रावधान है।
- डा. विनोद गुप्ता, सीएमओ अंबाला