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रिवार के प्यार और आत्मविश्वास से दी मौत को मात

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परिवार के प्यार और आत्मविश्वास से दी मौत को मात
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फोटो नंबर 05 से 07
विश्व कैंसर दिवस पर विशेष
-ब्लड कैंसर से उभर कर निकली वैभवी, परिवार के साथ जी रही खुशहाल जिंदगी
-बेटा होने के अगले ही दिन कैंसर का लगा पता, पीजीआई चंडीगढ़ में कराया इलाज
तरुण अग्रवाल
अंबाला सिटी। ‘डर मुझे भी लगा फासला देखकर, पर मैं बढ़ती गई रास्ता देखकर, खुद ब खुद मेरे नजदीक आती गई मेरी मंजिल मेरा रास्ता देखकर’ यह पंक्तियां खुद कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़कर मौत को मात देने वाली अंबाला सिटी के बांस बाजार की रहने वाली वैभवी कौशल ने सभी को जिंदगी में राह दिखाने के लिए लिखी है। उनका मानना है कि जब परिवार का प्यार दिल में हो, आत्मविश्वास हो तो कोई भी मौत को भी मात देकर वापस आ सकता है। वैभवी को अपने बेटे के जन्म के अगले दिन ही पता लगा कि उन्हें एएमएल (एक्यूट मैयोलॉइड ल्यूकिमिया) नामक ब्लड कैंसर है। इसे सुन कर ही ऐसा लगा जैसे जान निकल गई। पर परिवार के प्यार और जीवन जीने की चाह के आत्मविश्वास ने मुझे इस गंभीर बीमारी से लड़ने की ताकत दी और वही आत्मविश्वास का ही असर रहा है कि मैं आज अपनी खुशहाल जिंदगी जी रही हूं। वैभवी की यह नई जिंदगी अन्य लोगों के लिए हौसला देने का कार्य कर रही है।
भाई अमित मंगला ने दिया बोनमैरो
वैभवी ने बताया कि उनके बेटे का जन्म 15 अगस्त 2010 को हुआ था। अगले ही दिन उनकी तबीयत काफी खराब हो गई। टेस्ट किए गए तो पता चला कि एएमएल नामक कैंसर है। आनन-फानन में उन्हें 16 अगस्त को ही पीजीआई रेफर कर दिया। डॉक्टर पंकज मल्होत्रा ने उनका इलाज किया और उनके बड़े भाई अमित मंगला ने अपना बोनमैरो देकर बहन की जिंदगी बचाई। उन्होंने कहा कि ऐसी गंभीर बीमारियों से परिवार के साथ के बिना लड़ना काफी मुश्किल हो जाता है। सास संतोष कौशल, ससुर सोहन कौशल, पति कस्तुभ कौशल, बेटी मुमुक्शा कौशल, और बेटे सिमांत्क कौशल ने उन्हें इन दिनों में काफी हौसला दिया।
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हर स्थिति का खुश रहकर किया सामना
वैभवी ने बताया कि वैसे इस बीमारी से उभरे लगभग नौ साल हो गए हैं। बीमारी के शुरुआती उन छह महीनों में उनके जिंदगी को देखने के मायने ही बदल गए। उपचार के दौरान उनके बाल भी चले गए, रंग काला हो गया। वह मोटी भी हो गई थीं, लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और उस स्थिति में अपने आप को खुश रखा। वैभवी के बेटे को भी उनकी सास ने ही संभाला। लगभग तीन सालों तक वह अपने बच्चों से ढंग से नहीं मिल पाईं।
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स्नेह स्पर्श संस्था दे रही कैंसर पीड़ितों को हौसला
रोटरी संस्था की ओर चलाए जा रहे स्नेह स्पर्श संस्था मुख्य रूप से ऐसे कैंसर पीड़ितों को हौसला देती है और उनकी सहायता करती है, जिन्हें डॉक्टर भी मना कर चुके होते हैं।

अंबाला में कैंसर की यह स्थिति
फरवरी 2018 से अब तक 1 लाख 35 हजार 28 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। इसमें से मुंह के कैंसर के लिए 148 लोगों को संभावित पाया गया। जांच के बाद एक में पुष्टि हुई। ब्रेस्ट कैंसर के लिए 89 की जांच की गई। इसके साथ ही बच्चेदानी के लिए 405 की जांच की गई, इसमें से सात में कैंसर पाया गया। वहीं 2015 से हरियाणा कैंसर एटलस साइट पर कुल 2 हजार 683 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ है।

ऐसे करें बचाव
लोगों की जीवनशैली में पूरी तरह से परिवर्तन आ चुका है। इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को जीवनशैली बदलने की जरूरत है। लोगों को प्रतिदिन योग करना चाहिए, सैर करनी चहिए, जंक फूड से दूर रहना, ताजा खाना चाहिए, चिंता कम करनी चाहिए, इससे ही कैंसर से दूर रहा जा सकता है।
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-डॉ. संगीता गोयल, डिप्टी सीएमओ, अंबाला

विश्व कैंसर दिवस पर आज निकाली जाएगी रैली
स्नेह स्पर्श के चेयरमैन सुभाष बंसल ने बताया कि विश्व कैंसर दिवस के मौके पर एसडी स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें सर्वप्रथम पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसमें 10 सबसे बेहतरीन पोस्टर बनाने वाले विद्यार्थियों को 500-500 रुपये इनाम के रूप में दिए जाएंगे। इसके बाद रैली निकालते हुए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
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