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%नई स्कूली किताबों’ पर असमंजस, %पुरानी किताबों’ के सहारे शुरू होगी %नए सत्र’ की पढ़ाई

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इस बार पुरानी किताबों के साथ शुरू होगी नए सत्र की पढ़ाई
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
सरकार और शिक्षा विभाग के ‘बेहतर व्यवस्था’ के दावे एक बार फिर खोखले साबित होते दिखाई दे रहे हैं। जहां वर्तमान सत्र में कई विद्यार्थियों के पास पूरी किताबें समय पर पहुंची ही नहीं कि अब इन पुरानी किताबों के सहारे नया सत्र शुरू करने की योजना बना ली है।
यानि सरकारी स्कूलों में इस बार नए शिक्षा सत्र की पढ़ाई पुरानी किताबों से शुरू होगी। नए शिक्षा सत्र में नई किताबें समय पर पहुंचेंगी या नहीं इस पर असमंजस की स्थिति है, लेकिन शिक्षा विभाग ने लेटर जारी कर वर्तमान शिक्षा सत्र की किताबें विद्यार्थियों से वापस लेकर संभालकर रखने के निर्देश जारी किए हैं। इसको लेकर अध्यापक एसोसिएशन भी कह रही हैं कि व्यवस्था दुरुस्त करने की बजाए विभाग को विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग द्वारा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को यह किताबें निशुल्क दी जाती है।
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यह हैं विभाग के निर्देश
शिक्षा विभाग की ओर से जारी किए निर्देशों में स्थिति स्पष्ट नहीं है कि नए शिक्षा सत्र में किताबें कब तक पहुंचेंगी। इसको लेकर विभाग ने सत्र 2017-18 की किताबों को दोबारा इस्तेमाल में लाने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत विभाग ने कहा है कि जब तक नए शिक्षा सत्र में विद्यार्थियों को नई किताबें नहीं मिल जाती, तब तक पुरानी किताबों से ही नए शिक्षा सत्र की पढ़ाई को शुरू किया जाए। वर्तमान शिक्षा सत्र अब फाइनल परीक्षाओं तक पहुंच चुका है और ऐसे में यह निर्देश बता रहा है कि विभाग को शंका है कि नए शिक्षा सत्र में किताबें विद्यार्थियों को समय पर नहीं मिल सकेंगी। उल्लेखनीय है कि बीते कई सालों से सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों को मिलने वाली पुस्तकें आधा सत्र बीतने के बाद मिलती थी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित होती है। एक अनुमान के मुताबिक जिले में लगभग 38000 विद्यार्थी हैं।

विद्यार्थियों की संख्या बन सकती है परेशानी
विभाग द्वारा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को यह किताबें निशुल्क दी जाती हैं, लेकिन इसमें छात्र संख्या सबसे बड़ी परेशानी शिक्षा विभाग के लिए बन जाती है। अध्यापक संघ की मानें तो चालू शिक्षा सत्र में भी कई विद्यालय ऐसे रहे, जहां पर विद्यार्थियों को पूरी तरह से किताबें ही नहीं मिल पाईं। बताया जाता है कि पुरानी छात्र संख्या के आधार पर यह पुस्तकें छाप दी जाती हैं, जिससे सभी छात्रों को यह नहीं मिल पाती।

विभाग द्वारा हर साल बच्चों को किताबें तो जारी की जाती है, लेकिन आधा सत्र बीत जाता है और पुस्तकें पूरी नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों को तो परेशानी होती है, जबकि शिक्षकों के लिए भी दिक्कत है। अब जो व्यवस्था दी जा रही है, वह विकल्प हो सकता है। स्थिति को सुधारा जाए और सत्र शुरू होने से पहले ही किताबें जिलों में पहुंच जाएं तो और आसानी होगी। - मोहन लाल परोचा, जिला महासचिव, हरियाणा राजकीय अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ, अंबाला
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विद्यालय शिक्षा निदेशालय की ओर से पत्र जारी हुआ है कि वर्तमान शिक्षा सत्र की पुस्तकों के साथ नया सत्र शुरू किया जाए। जैसे ही नई पुस्तकें उपलब्ध होती हैं, वह विद्यार्थियों को दी जाएंगी। उम्मीद है कि इस बार शिक्षा सत्र शुरू होते ही पुस्तकें मिल जाएंगी।
- उमा शर्मा, डीईओ अंबाला
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