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निगम की दुकान नंबर 14 में खेल, हजारों किराया पेंडिंग, कागजों में डाक विभाग के नाम दुकान

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फोटो नंबर : 1
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निगम ने डाक विभाग को किराये का नोटिस भेजा तो विभाग ने बताया पांच वर्ष पहले निगम ने ही जबरन खाली कराई दुकान
हजारों रुपये किराया पेंडिंग, कागजों में डाक विभाग के नाम है दुकान नंबर 14
जांच करने पर सामने आ सकता है बड़ा घोटाला, अधिकारी बोले- कराएंगे जांच
रमिंद्र सिंह
अंबाला कैंट। नगर निगम की प्राइम लोकेशन पर पंजाबी मोहल्ले में स्थित दुकान नंबर 14 में निगम स्टाफ ने ही खेल खेल दिया है। कागजों में यह दुकान डाक विभाग के अधीन है और जब निगम ने डाक विभाग से किराया मांगा तो विभाग ने लिखित जानकारी दी कि पांच वर्ष पहले यह दुकान उनसे निगम द्वारा जबरन खाली कराई जा चुकी है। अब सवाल है कि यदि निगम ने यह दुकान स्वयं खाली कराई है तो यह कागजों में डाक विभाग के नाम क्यों है। यदि डाक विभाग ने दुकान का कब्जा छोड़ दिया है तो अब इसका मालिक कौन है और किसका ताला निगम की दुकान पर लगा है। 50 हजार से भी ज्यादा यहां दुकानों का किराया निगम के पास पेंडिंग पड़ा है।
निगम सदर जोन कार्यालय के ठीक साथ स्थित पंजाबी मोहल्ले में दुकान नंबर 12, 13 व 14 डाक विभाग के पास थी और यहां पर डाक विभाग ने पोस्ट ऑफिस खोल रखा है जोकि अब भी चल रहा है, मगर तीनों दुकानों का किराया 50 हजार से भी अधिक पेंडिंग होने पर गत दिनों निगम द्वारा विभाग को नोटिस जारी किए गए। इस पर डाक विभाग भी सकते में आ गया। इसके बाद विभाग की ओर से निगम को बताया गया कि अप्रैल 2013 में दुकान नंबर 14 को निगम ने जबरन खाली करा लिया था जबकि उनके पास अब केवल दुकान नंबर 12 व 13 है जहां इस समय पोस्ट ऑफिस चल रहा है। विभाग के इस जवाब से निगम अधिकारी हैरान रह गए क्योंकि कागजों में अब तक यह दुकान डाक विभाग के पास थी, मगर 2013 से अब तक इस दुकान पर किसका कब्जा है इसको लेकर कोई ठोस जानकारी निगम के पास नहीं है। दुकान पर ताला लगा हुआ है और यह किसका ताला लगा है, यह भी निगम को नहीं पता।
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निगम स्टाफ की भूमिका संदिग्ध
साफ है कि दुकान नंबर 14 के मामले में निगम स्टाफ की ही भूमिका संदिग्ध है। डाक विभाग ने पत्र में लिखा कि 2013 में निगम ने जबरन दुकान खाली कराई, मगर सवाल है कि यदि निगम ने दुकान खाली कराई तो रिकार्ड में फिर किसे यह दुकान किराए पर दी गई? तब से लेकर अब तक दुकान का किराया जमा कराया गया या नहीं, यदि जमा कराया तो किसने इस दुकान का किराया जमा कराया।
संज्ञान में नहीं है मामला : आर्य
नगर निगम कमिश्नर जयबीर सिंह आर्य ने कहा कि फिलहाल यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। निगम की दुकान किसके पास है इसे चेक कराया जाएगा। यदि स्टाफ की भूमिका संदिग्ध मिली तो उसे भी जांचा जाएगा।
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इधर, मंत्री आदेशों के बाद निगम ने की जांच में लीपापोती
नगर निगम द्वारा बीआई मेस रोड पर स्थित दुकान के मालिक मूक-बधिर पवन दुग्गल की दुकान नौकर के नाम करने के मामले की जांच में भी लीपापोती की जा रही है। मंत्री अनिल विज के आदेशों के बावजूद भी दो माह में यह जांच निगम अधिकारी पूरी नहीं कर सके हैं। पहले जांच में एक क्लर्क की भूमिका प्राथमिक जांच में संदिग्ध आई थी, मगर इसके आगे कार्रवाई अब तक अमल में नहीं लाई गई है। पहले निगम सचिव ने मामले की जांच की थी। बता दें कि दुकान के मालिक मूक-बधिर पवन दुग्गल ने मंत्री अनिल विज एवं निगम कमिश्नर को दो माह पहले शिकायत दी कि उसकी दुकान उसी दुकान पर काम करने वाले दिलीप कुमार ने अपने नाम करवा ली थी। आरोप थे कि निगम स्टाफ की मिलीभगत से यह हुआ जबकि उसने कभी भी दुकान ट्रांसफर करने आदि कागज पर हस्ताक्षर नहीं किए। जाली हस्ताक्षरों के बल पर यह खेल खेला गया। मंत्री के आदेशों पर निगम ने जांच आरंभ की थी जिसमें एक क्लर्क की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी और उसे नोटिस भी दिया था, मगर इसके बाद जांच को आगे बढ़ाया ही नहीं गया। उधर, निगम के ज्वाइंट कमिश्नर सत्येंद्र सिवाच ने कहा कि मामले में फिलहाल जांच की जा रही है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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