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- नगर पालिका नारायणगढ़ के दस पार्षदों ने हाईकोर्ट में लगाई गुहार

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चुनाव कराने को पार्षदों ने कोर्ट में लगाई गुहार, इधर नपा सचिव ने 27 को बुलाई बैठक
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अमर उजाला ब्यूरो
नारायणगढ़ (अंबाला)।
करीब चार महीने से रिक्त नगरपालिका नारायणगढ़ के प्रधान पद का चुनाव कराने के लिए 15 में से 10 पार्षदों ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई है। नपा की कार्यवाहक प्रधान मनिका अग्रवाल सहित पार्षद श्रवण कुमार, रति राम, सुरेश धीमान, सुधा शर्मा, नीलम वालिया, वीना चानना, प्रवीण नामदेव, जयप्रकाश, राखी देवी ने मिलकर याचिका दायर की है। ज्ञात रहे कि नपा की पूर्व चेयरपर्सन जगदीप कौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के कारण 17 नवंबर 2017 से यह पद रिक्त है।
याचिका में कहा गया है कि पद रिक्त होने के बाद चुनाव के लिए कोई विशेष मीटिंग नहीं बुलाई गई और यहां तक कि उप-प्रधान मनिका अग्रवाल और अन्य पार्षदों के अनुरोध के बाद भी नक्शे पास करने व अन्य विकास कार्यों को करने बारे भी जनरल हाउस की साधारण मीटिंग नहीं बुलाई गई। यदि मीटिंग बुलाई गई तो उसको पालिका सचिव ने कथित राजनीतिक दबाव के कारण बिना किसी उचित वजह के रद्द कर दिया, जिस कारण नारायणगढ़ के लोगों को काफी परेशानी हुई व नगरपालिका की छवि भी खराब हुई। इस बारे में पार्षदों ने डीसी अंबाला, एसडीएम नारायणगढ़ सहित अर्बन लोकल बॉडीज के मंत्री को भी गुहार लगाईं लेकिन प्रशासन के कान पर जूं तक न रेंगी और अंत में पार्षदों को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। याचिका में अर्बन लोकल बॉडीज के प्रिंसिपल सचिव सहित डायरेक्टर जनरल, अर्बन लोकल बॉडीज, उपायुक्त अंबाला, एसडीएम नारायणगढ़ और नपा सचिव को भी पार्टी बनाया गया है।
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उधर, नपा सचिव अनिल राणा ने 27 मार्च को हाउस की बैठक बुला ली है जिसके एजेंडे में केवल साल 2018-19 का वित्तीय बजट है जबकि इससे पहले बुलाई गई बैठक में बजट के साथ अन्य कार्य भी थे।

नपा की कार्यवाहक प्रधान मनिका अग्रवाल स्वयं याचिकाकर्ता है। मनिका अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने यह निर्णय अन्य पार्षदों के साथ मिलकर जनहित में लिया है ताकि नपा का काम सुचारु रूप से चल सके और लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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याचिकाकर्ताओं के वकील सुखविंद्र नारा ने याचिका में कानूनी प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा है कि प्रधान पद का चुनाव न कराना अलोकतांत्रिक है और इससे न केवल हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट के प्रावधानों की उल्लंघना हुई है बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 व 243 की भी अवहेलना हुई है। याचिका में कहा कि नपा प्रधान का पद अनुसूचित जाति के चुने पार्षद के लिए आरक्षित है और ऐसी दशा में इस पद को रिक्त रखना भारतीय संविधान की प्रस्तावना जो कि संविधान की मूल विशेषता है, जिसमें सामाजिक व राजनीतिक न्याय बारे कहा गया है, उसकी भी उल्लंघना है और साथ ही अनुसूचित जाति के लोगों के अधिकारों का भी सरासर हनन है।
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