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- निगम खुद ही तय कर रहा है अपनी डेडलाइन, लेकिन फिर भी समस्या जस की तस

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फोटो नंबर :: 31 व 32
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- निगम खुद ही तय कर रहा है अपनी डेडलाइन, लेकिन फिर भी समस्या जस की तस
- मंत्री विज का तर्क, पड़ोसी राज्य पंजाब से लोग अंबाला में छोड़ रहे हैं लावारिस जानवर
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। लावारिस पशु ने बुधवार की रात एक और व्यक्ति की जान ले ली, जबकि निगम अधिकारी कह रहे हैं कि अंबाला को जल्द ही मुक्त करा लिया जाएगा। इस योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। बीते करीब दस साल से यह समस्या जस की तस निगम के सामने है, लेकिन आज तक इसका कोई हल नहीं निकल पाया है। लावारिस गाय, डॉग, घोड़े जहां राहगीरों के लिए खतरा बने हुए हैं, वहीं निगम की सारी कोशिशें बेकार साबित हो रही हैं।
नगर निगम ने अंबाला को लावारिस जानवरों से मुक्त करवाने के लिए योजना बनाई। लावारिस गायों के लिए गांव सुल्लर व टंगैल में नंदीशाला बनाई गई है, जबकि अंबाला कैंट फायर ब्रिगेड आफिस की बैक साइड भी ऐसे पशुओं के लिए जगह है। उल्लेखनीय है कि साल 2007 से निगम अधिकारी इसके लिए कई बार प्रयास कर चुके हैं, लेकिन आज तक यह समस्या खत्म होने की बजाय बढ़ रही है। इस मामले में मंत्री अनिल विज का कहना है कि अंबाला के साथ लगते पंजाब क्षेत्र से लावारिस पशुओं को अंबाला की सीमा में धकेल रहे हैं। यही कारण है कि अंबाला में यह समस्या गंभीर होती जा रही है। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन डीसी ने भी इसी तरह से पंजाब सीमा पर लावारिस पशुओं को अंबाला में छोड़ने की बात कही थी।
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हाइवे पर लावारिस पशु ने ली एक की जान
बीती देर रात हाइवे पर काली पलटन पुल के नजदीक जितेेंद्र निवासी महेश नगर व उसका साथी सूरज निवासी तोपखाना काम से लौट रहे थे। इसी दौरान एक लावारिस पशु उनके वाहन के सामने आ गए गया। इस दौरान हुए हादसे में दोनों युवक बुरी तरह से जख्मी हो गए। घायलों को किसी तरह से कैंट के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डाक्टरों ने जितेंद्र को मृत घोषित कर दिया, जबकि सूरज का उपचार किया जा रहा है। बताया जाता है कि जितेंद्र अपने परिवार का इकलौता बेटा था। इससे पहले भी लावारिस पशुओं की वजह से कई जानलेवा हादसे जिले में हो चुके हैं।

गोशालाओं का सहारा, लेकिन फिर भी राहत नहीं
जिला अंबाला में करीब आठ गोशालाएं हैं, जिनमें प्रशासन द्वारा हाल ही में बनाई गई दो नंदीशालाएं भी शामिल हैं। प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर गांव सुल्लर व टंगैल में नंदी शालाएं बनाई हैं। लेकिन यहां पर भी स्थिति कुछ बेहतर नहीं हैं। इसी को लेकर कई सवाल भी उठे हैं, लेकिन अभी तक इन नंदीशालाओं व गोशालाओं का फायदा आम जनता को नहीं मिल पा रहा है। महर्षि मारकंडा सेवा समिति गोधाम नंदीशाला के प्रधान मनदीप सिंह बोपाराय ने बताया कि गांव टंगैल में 70 गायों के लिए शेड बन चुका है, जबकि हमारे पास करीब 300 गाय हैं। तीन सौ गायों के लिए चारे की भी व्यवस्था है, जबकि नगर निगम और न भेजे। यदि ऐसी स्थिति आती है, तो काफी परेशानियां झेलनी पड़ेंगी।

अंबाला ब्लाक टू जल्द होगा लावारिस पशुओं से मुक्त
अंबाला द्वितीय विकास खंड के सभी 27 गांवों को शीघ्र बेसहारा पशुओं से मुक्त किया जाएगा। इस कार्य के नोडल अधिकारी एवं पंचायती राज के एसडीओ रमेश तायल सभी गांवों में टीमों का गठन करके बेसहारा पशुओं की संख्या का सर्वे कर रहे हैं और गांव वासियों को प्रेरित करके ऐसे पशुओं को उचित स्थान पर रखने और उनके लिए चारे की पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके लिए 26 गांवों में बेसहारा पशुओं की पहचान करने के साथ-साथ पंचायतों द्वारा बेसहारा पशुओं के बेहतर रख-रखाव के प्रस्ताव पास किए गए हैं और अपने गांव को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने का प्रमाण पत्र भी दिया है। उन्होंने बताया कि 26 गंावों में से केवल 5 गांवों में 14 बेसहारा पशु पाए गए हैं। खुड्डा कलां में 7, घेल खुर्द, खतौली और मुनरहेड़ी में 1-1 तथा कौलां में 4 बेसहारा पशु पाए गए हैं।

- लावारिस पशुओं को काबू करने के लिए यदि नगर निगम की योजना है, तो उसे कितना समय चाहिए कि वह उसे पूरा करे। सारे पहलुओं पर विचार करने के बाद ही योजना पर काम शुरू किया जाता है। फिर क्यों दो महीने से ज्यादा बीतने के बाद भी लावारिस पशुओं से जनता को मुक्ति नहीं मिल पा रही है।
- सुनील ठाकुर, एक्स मेंबर ग्रीवांसेज कमेटी अंबाला

योजना पर यदि सख्ती से काम किया जाए, तो बेहतर होता है। लेकिन लावारिस पशुओं को काबू करने के मामले में लगता है कि निगम काफी ढिलाई बरत रहा है। मार्केट का काम करता हूं और रोजाना ही देखता हूं कि शायद ही कोई ऐसी सड़क हो, जहां पर लावारिस पशु न मिलते हों।
- राजेश कुमार, नौकरीपेशा, अंबाला सिटी

योजना के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है। सिर्फ लावारिस पशुओं के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा कुछ नहीं किया जा रहा है। अधिकारी इस मामले में ठोस काम नहीं कर पा रहे हैं, जबकि इसके लिए पूरी व्यवस्था आदि करनी होगी।
- दुर्गा सिंह अत्री, सीनियर डिप्टी मेयर अंबाला नगर निगम

नगर निगम प्रशासन में इच्छाशक्ति का अभाव है। यही कारण है कि अंबाला की सड़कों पर लावारिस जानवर घूम रहे हैं, जो जनता के लिए खतरा बने हुए हैं। यदि इच्छाशक्ति होगी, तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि योजना सफल न हो। लेकिन इस में आम जनता का सहयोग भी चाहिए, ताकि ऐसे पशुओं के लिए चारे आदि की व्यवस्था हो सके।
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- सुधीर जायसवाल, डिप्टी मेयर नगर निगम अंबाला
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लावारिस पशुओं को काबू करने का अभियान तेजी से चल रहा है। हद तक इस पर काबू पाया गया है, जबकि इस पर और सख्ती से काम किया जाएगा। इस में जनता और पशुपालक भी थोड़ा सहयोग करें, तो काफी राहत मिलेगी।
- सतेंद्र दूहन, आयुक्त नगर निगम अंबाला
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