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पति की आय पड़ी कम तो पत्नी ने ई-रिक्शा चला संभाला घर का खर्च

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अमर उजाला ब्यूरो
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अंबाला कैंट। गरीबी की मार से घबराकर जहां अधिकतर महिलाएं स्वयं और परिवार को ईश्वर के भरोसे छोड़ देती हैं, वहीं रेनू राय जैसी ऐसी सशक्त महिलाएं भी हैं जो अपनी हिम्मत और सूझबूझ से जीवन की मुसीबतों में भी सफलता का रास्ता तलाश लेती हैं। अंबाला छावनी निवासी रेनू ई-रिक्शा चलाकर परिवार की आय बढ़ाने में सराहनीय पहल करने वाली महिला के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। वे न केवल अपने परिवार का गुजारा चला रही हैं बल्कि समाज की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी बनी हैं। रेनू की इस अनूठी पहल को जहां समाज में प्रशंसा मिल रही है, वहीं जिला प्रशासन ने भी उसे प्रोत्साहित किया है।
उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ ने बुधवार को रेनू राय को अपने कार्यालय में बुलाया और उसे जिला प्रशासन की ओर से प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। उपायुक्त ने लीड बैंक मैनेजर को निर्देश दिए कि वह राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत रेनू राय को स्वयं का ई-रिक्शा खरीदने के लिए ऋण और अनुदान उपलब्ध करवाएं। उन्होंने एसडीएम अंबाला छावनी को भी रेनू राय को चालक लाइसेंस जारी करने के निर्देश दिये।
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महिलाएं पुरुषों के कम नहीं : उपायुक्त
उपायुक्त ने कहा कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं और ई-रिक्शा व ऑटो रिक्शा जैसे पुरुष प्रधान कार्य में रोजगार की शुरुआत करके रेनू राय ने अन्य महिलाओं के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। रेनू ने उपायुक्त को बताया कि वे अपने पति नरेंद्र राय के साथ अंबाला छावनी में रहती हैं। उनकी दो लड़कियां और एक लड़का है। तीनों बच्चे स्कूल जाते हैं। उनके पति केवल मेहनत मजदूरी करके ही परिवार का गुजारा बड़ी मुश्किल से चला पाते थे। वह स्वयं भी लोगों के घरों में सफाई जैसे कार्य करके महीने में मात्र 1000 से 1500 रुपये ही कमा पाती थीं।
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आर्थिक तंगी से निपटने के लिए चलाया रिक्शा : रेनू
रेनू ने बताया कि घर की आर्थिक तंगी से निपटने के लिए उन्होंने ई-रिक्शा चलाने का निर्णय लिया और अपने पति को साथ लेकर ई-रिक्शा किराये पर लिया। उन्होंने कहा कि वह प्रतिदिन यह रिक्शा चलाकर जहां रिक्शा मालिक को 250 से 300 रुपये प्रतिदिन का किराया अदा करती हैं, वहीं परिवार के लिए भी 200 से 250 रुपये तक बचा लेती हैं। उन्होंने कहा कि उपायुक्त के सहयोग से अपना ई-रिक्शा मिल जाने पर वे किराये की राशि से बैंक की किश्त अदा करती रहेंगी और परिवार का गुजारा अच्छे से चला पाएंगी। उन्होंने कहा कि पति नरेंद्र राय और स्वयं शिक्षा से वंचित रहने के कारण वे जीवन में आगे नहीं बढ़ पाईं लेकिन वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर जीवन में सफल देखना चाहती हैं।
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