- शर्मा दंपति ब्लाइंड मर्डर केस -
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एक साल बीता, कत्ल की गुत्थी नहीं सुलझा सकी पुलिस
- सवालों के घेरे में अंबाला पुलिस की कार्यशैली
- अशोक नगर में 5 फरवरी 2017 की सुबह घर के बेडरूम में मौत के घाट उतार दिए थे साइंस कारोबारी वीरेंद्र और लता शर्मा
- हत्या के इस केस में पुलिस परिजनों का करवा चुकी है नार्को टेस्ट
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। साइंस इक्विपमेंट कारोबारी वीरेंद्र शर्मा और उनकी पत्नी लता शर्मा को उनके ही बेडरूम में तेजधार हथियारों से गोदकर कौन मौत के घाट उतार गया, ये सवाल आज भी राज बना हुआ है। ये सवाल लोगों के जहन में भी लगातार कौंध रहा है। इस निर्मम और दिल दहला देने वाले हत्याकांड को आज एक साल पूरा हो गया है। इस एक साल में पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लग सका है। जिसे लेकर अंबाला पुलिस भी कहीं न कहीं सवालों के घेरे में खड़ी नजर आ रही है। वहीं समाजसेवी और इलाके के सीनियर सिटीजन ब्लाइंड मर्डर के राज से पर्दा उठवाने के लिए अदालत में जाने की तैयारी कर हैं।
न कुत्ता भौंका और न दरवाजा खुला, फिर कौन कर गया दो हत्याएं
साइंस कारोबारी वीरेंद्र और उनकी पत्नी की जिस वक्त हत्या हुई उस वक्त वह अपने बेडरूम में सो रहे थे। हैरानी की बात है कि जिस वक्त वारदात हुई उस वक्त घर में उनका कुत्ता भी था और बेटे अमित और सुमित व बहुएं अपने-अपने बेडरूम में सो रहे थे। सुबह कुछ आहट सुनने के बाद बड़ा बेटा माता-पिता के रूम में पहुंचा तो उसने दोनों को खून से लथपथ पाया। बेटे उन्हें कैंट सिविल अस्पताल ले गए। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घर पर मौजूद होते हुए कुत्ता भी नहीं भौंका और मेन डोर भी नहीं खुला तो आखिर शर्मा दंपति को मौत के घाट कौन उतार गया ये आज भी राज बना हुआ है। पुलिस को खिड़की की ग्रिल टूटी मिली थी जो इस कांड को नया मोड़ देती है।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसायटी के प्रधान सेवा सिंह चौहान कहते हैं कि इस मामले को डील करने में पुलिस की कार्यशैली शुरू से ही सुस्त और सवालों के घेरे में रही है। पुलिस थोड़ा और जोर लगाती तो यह मामला उसी वक्त ट्रेस हो जाता। अब इस मामले को अदालत की मदद से ही ट्रेस करवाया जा सकता है। ये बड़ा मामला है जो लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। इस बारे में सीएम विंडो पर भी शिकायत दी है ताकि प्रदेश के मुखिया को पता चल सके कि आखिर प्रदेश में क्या हो रहा है। सेवा सिंह चौहान ने कहा कि दो लोगों को घर के बेडरूम में ही कोई मारकर चला जाता है और पुलिस एक साल तक उन्हें पकड़ ही नहीं पाती तो ये पुलिस की बड़ी नाकामी है, जो पुलिस को सवालों के कटघरे में खड़ा करती है। लोग कत्ल की वजह और असली कातिल के बारे में जानना चाहते हैं। पुलिस को यह सच सामने लाना ही होगा।
एक साल में भी पुलिस के हाथ नहीं लगा कोई सुराग
हत्यारों को पकड़वाने की मांग को लेकर मृतक वीरेंद्र शर्मा और लता शर्मा का परिवार व परिचित लोग कैंडल मार्च भी निकाल चुके हैं। इसके बावजूद पुलिस के हाथ खाली हैं। पुलिस कप्तान अभिषेक जोरवाल और कैंट के डीएसपी सुरेश कौशिक खुद घटनास्थल का मुआयना कर चुके हैं और क्राइम को क्रैक करने में एकसपर्ट सीआईए भी इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस के साइबर और क्राइम एक्सपर्ट भी इतना तामझाम होने के बावजूद भी इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी न सुलझ पाने से पुलिस की भी अच्छी खासी फजीहत हो रही है।
परिजनों का हो चुका है नार्को टेस्ट
शर्मा दंपति के मौत के राज से पर्दा उठाने के लिए पुलिस वीरेंद्र और लता शर्मा के परिजनों का नार्को टेस्ट भी करवा चुकी है। जानकार मानते हैं कि पुलिस जिस गति से इस केस को आगे बढ़ा रही है वह चिंता का विषय है जिस वजह से केस और कमजोर हो सकता है।
शर्मा दंपति की हत्या के मामले हमने परिवार और फैक्टरी में काम करने वाले कर्मचारियों से बात की है। परंतु अभी तक कोई ठोस सुराग हमारे हाथ नहीं लगा है। इस मामले की जांच सीआईए-2 कर रही है। उम्मीद है जल्दी ही इस मामले में सफलता हासिल हो जाएगी।
- अभिषेक जोरवाल, एसपी अंबाला।