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- पांच दिन से ठप इंटरनेट चलते ही रिटर्न फाइनल करने में लगी पेनेलटी

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अमर उजाला ब्यूरो
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अंबाला कैंट।
डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम मामले को लेकर पिछले पांच दिनों से बंद इंटरनेट ने कारोबारियों ने कमर तोड़ दी है। सरकार द्वारा एक जुलाई से लगाए गए जीएसटीआर-थ्रीबी रिटर्न फाइनल की अंतिम तिथि 28 अगस्त निर्धारित की गई थी। कई दिनों से इंटरनेट सेवाएं ठप होने के कारण अधिकतर कारोबारी रिटर्न भरने से चुक गए।
उधर, इंटरनेट सेवाएं शुरू होने पर जैसे ही कारोबारियों द्वारा रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया पूरी की गई तो ऑनलाइन सिस्टम द्वारा उन्हें सौ रूपए की पेनेलटी लगनी शुरू हो गई है। जिसके तहत कारोबारियों को मंगलवार पेनेल्टी भरने पर करीबन दौ सौ रुपये तक पेनेल्टी वसूली गई। इस प्रक्रिया से अंबाला जिले के समस्त कारोबारियों में रोष है। कारोबारी जतिन अग्रवाल, मोहित आनंद, सुमित, सुरेश, पुनीत, अनिल, मंजीत सिंह का कहना है कि सरकार द्वारा 28 अगस्त अंतिम तिथि निर्धारित किया गया था और खुद ही सरकार पांच दिनों से इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से ठप करवाएं बैठी थी। जीएसटी का सिस्टम पूरी तरह ऑनलाइन होने के कारण वह ठप हो गया है। उनका कहना है कि वह पिछले चार दिनों से रिटर्न फाइल करने के लिए चक्कर काट रहे है। न तो साइबर कैफे चल रहे है और सिस्टम चालू है। सरकार द्वारा जीएसटीआर थ्रीबी रिटर्न को जोड़ा गया है जिनके पास जीएसटी नंबर है उन्हें ये रिटर्न फाइल करनी थी। पोटर्ल पर भी यह 15 तारीख के बाद आया है और 28 अगस्त अंतिम तिथि रखी गई थी। अभी कारोबारी वर्ग जीएसटी का नंबर लेने में ही उलझा हुआ है और ऊपर से सरकार ने रिटर्न जोड़ दी, जिसे निर्धारित समय में फाइल करना था जोकि सरासर गलत है। सरकार को चाहिए कि वह पेनेल्टी को हटाकर कारोबारी वर्ग को थोड़ा समय थे।
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यह बोले एडवोकेट
जीएसटी सलाहकार एडवोकेट श्याम लाल, एडवोकेट भास्कर शर्मा, राजन सिंगला, रूपेश, अरूण कुमार, श्याम लाल, कमल धीमान का कहना है कि इस पर जुर्माना का प्रावधान होना ही नहीं चाहिए था। जीएसटी लागू होने से पहले ही कारोबारी आर्थिक मंदी का सामना कर रहे है। ऊपर से जुर्माना लगाना न्याय संगत नहीं है। प्रशासनिक व्यवस्था के चलते इंटरनेट सेवाएं पिछले दिनों से बंद पड़ी है।
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जीएसटी नंबर को भटक रहे कारोबारी
दरअसल, एक जुलाई से देशभर में जीएसटी लागू होने से कारोबारियों को जीएसटी नंबर लेना अनिवार्य हो गया है। जीएसटी नंबर के बिना कारोबारी व्यापार नहीं कर सकता। लेकिन जीएसटी को लेकर कारोबारी लगातार अप्लाई कर रहे है। पंरतु अभी तक अधिकतर व्यापारी को जीएसटी नंबर ही नहीं मिल रहा है। कारोबारी नंबर हासिल करने के लिए विभाग के चक्कर भी काट रहे है। वहीं एडवोकेट श्याम लाल ने बताया कि कई व्यापारियों ने जीएसटी नंबर न मिलने की जानकारी विभाग द्वारा दी गई ई- मेल पर भेजी गई, परंतु अभी तक उसका भी कोई जवाब नहीं आया है।
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