नारायणगढ़। पाबंदियों के बावजूद नियमों को ताक में रखकर क्षेत्र की नदियों में धड़ल्ले से अवैध खनन का धंधा चल रहा है। कालाआम्ब के निकट डेरा गांव में मारकंडा नदी में दिनदहाड़े अवैध खनन का कारोबार जोरों पर चल रहा है। खनन माफिया को किसी की कोई परवाह नहीं है, इसीलिए बेखौफ होकर अवैध खनन को अंजाम दे रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में नदियों के किनारे बसे गांव में बारिश के समय बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
क्षेत्र में अवैध खनन से लोग इतने परेशान हैं कि कई बार प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन खनन माफिया द्वारा प्रशासन को ठेंगा दिखा अवैध खनन का कार्य किया जा रहा है। देखने में आया है कि मारकंडा नदी में एक पोकलेन मशीन व एक जेसीबी मशीन द्वारा दो अलग-अलग स्थानों पर करीब एक दर्जन ट्रैक्टर-ट्रॉली व कई टिप्परों का इस्तेमाल किया जा रहा था, जोकि साथ लगते स्क्रीनिंग प्लांटों पर खनन सामग्री पहुंचा रहे हैं। कुछ दिन पूर्व ही नजदीकी गांव हमीदपुर के ग्रामीणों ने एक जेसीबी मशीन व तीन टिप्परों को पुलिस के हवाले किया था लेकिन साथ लगते गांव में यह अवैध काम चल रहा है। बता दें कि क्षेत्र में 58 के करीब स्क्रीनिंग प्लांट चल रहे हैं। इनमें प्रशासन सहित प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा करीब दो वर्ष पहले 18 प्लांट सील कर दिए गए थे लेकिन सील लगे व अन्य अवैध तौर पर धड़ल्ले से चल रहे हैं।
शनिवार-रविवार को जोरों पर होता है खनन का कार्य
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार व रविवार को सरकारी कार्यालयों की छुट्टी होने के चलते यहां अवैध खनन का कार्य पूरे जोरों पर होता है, जिस कारण स्क्रीनिंग प्लांट संचालक अपना एक सप्ताह का कोटा पूरा कर लेते हैं।
मारकंडा नदी में हो चुके हैं गहरे गड्ढे
अवैध खनन की वजह से आज मारकंडा नदी में झीलें बन गईं है, जिस कारण आगामी बरसात के सीजन में कोई भी हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं अवैध खनन के कारण जहां मारकंडा नदी में गहरे गड्ढे हो चुके हैं वहीं सरकार को भी भारी राजस्व का चूना खनन माफिया द्वारा लगाया जा रहा है। जब इस बारे खनन विभाग से संपर्क करना चाहा तो उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका।