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प्रोजेक्ट ‘स्वर्ण’ : स्वर्णिम रोशनी से जगमग होगी शताब्दी एक्सप्रेस

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रमिंद्र सिंह
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अंबाला कैंट। शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए आरंभ किए गए प्रोजेक्ट ‘स्वर्ण’ के तहत चंडीगढ़-नई दिल्ली के मध्य चलने वाली ट्रेन नंबर 12045-46 शताब्दी एक्सप्रेस जल्द ही स्वर्णिम रोशनी से जगमग होगी। आधुनिक एलईडी लाइटें ट्रेन के हर डिब्बे में लगाई जाएंगी। इसको लेकर रेल मंडल ने कार्य आरंभ कर दिया है।
ट्रेन में आधुनिक लाइटों के लिए करीब 58.46 लाख रुपये खर्च करने की योजना रेल मंडल की है और इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। योजना के अनुसार मार्च अप्रैल तक ट्रेन के डिब्बों में यह लाइटें लगा दी जाएंगी। आधुनिकल एलडीई लाइटें लगने से दिन ढलने के बाद ट्रेन के कोच अलग ही लुक में नजर आएंगे। इससे पहले इसी प्रोजेक्ट के तहत ट्रेन के इंटीरियर को भी सुधारा जा चुका है।
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अभी ट्रेनों में पारंपरिक लाइटें
ट्रेनों में अब तक पारंपरिक लाइटें लगी हैं, जो पुरानी पड़ चुकी है। करीब छह वर्ष पहले ट्रेन को चलाया गया था और तभी से ही कोचों में ये लाइटें लगी थीं। बीते वर्ष से ट्रेन की अपग्रेडेशन आरंभ हुई। इसके तहत अब आधुनिक एलईडी लाइटें लगाने की योजना बनाई गई। ट्रेन शाम सवा सात बजे दिल्ली से चलती है और रात दस बजे अंबाला व इसके बाद चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंचती है जबकि दोपहर में चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए रवाना होती है। 10 डिब्बों वाली इस ट्रेन में स्वर्णिम एलईडी लाइट्स लगाई जाएंगी।

प्रोजेक्ट के तहत अब ये कार्य हुए
प्रोजेक्ट स्वर्ण के तहत अंबाला रेल मंडल की ओर से ऑपरेट की जानी वाली शताब्दी एक्सप्रेस के प्रत्येक डिब्बे में 2.22 लाख रुपये की लागत से अपग्रेडेशन कार्य किए गए थे।
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-ट्रेन के 10 कोचों को खासतौर पर नया इंटीरियर फिक्स किया गया है
-डिब्बों की दीवारों को आकर्षक प्लास्टिक स्टीकर से ढका गया
-कोच में एयर फ्रेशनर, गोल्ड वॉल कवर व अन्य व्यवस्थाओं में सुधार किया गया
-इसके अलावा डोर वे, टॉयलेट, लगेज रैक पैनल्स, सीलिंग, डेस्टीनेशन बोर्ड और कोच नंबर प्लेट्स आदि में सुधार किया गया

यह है प्रोजेक्ट स्वर्ण
बीते वर्ष रेल मंत्रालय द्वारा शताब्दी एवं राजधानी ट्रेनों को अपग्रेड करने के लिए प्रोजेक्ट स्वर्ण की शरुआत की गई थी। इसके तहत पुराने पड़ चुके डिब्बों के इंटीरियर से अलावा एक्सटीरियर एवं अन्य सुविधाओं में इजाफा करना था। ट्रेन को आकर्षक लुक देने के लिए पर्यटक स्थलों की फोटो आदि भी डिब्बों में लगाई गई थी।
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