पांच नगर निगमों में बन गई नई सरकार, अंबाला को इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। प्रदेश के पांच जिलों में बेशक शहर की सरकार का चयन हो गया हो, मगर अंबाला में शहर की सरकार का भविष्य अभी तक स्पष्ट नहीं है। निगम भंग होने के बाद से अब तक मामला अदालत में विचाराधीन है जिस कारण अंबाला का भविष्य निगम होगा या परिषद, इसको लेकर असमंजस की स्थिति है। आलम यह है कि सरकार का अब अंबाला निगम की ओर ध्यान नहीं है जिस वजह से जनहित के कार्य लगातार प्रभावित हो रहे हैं। निगम में अफसरों व स्टाफ की कमी होती जा रही है जबकि कार्य तक प्रभावित हो रहे हैं। निगम के पास स्टाफ को देने के लिए पैसे नहीं हैं जबकि लगभग 37 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स ट्विन सिटी के निवासियों पर बकाया है। इतना ही नहीं डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन, लावारिस पशुओं, स्ट्रीट डॉग्स, स्ट्रीट लाइट एवं अन्य कार्य बेहाल हैं। निगम की कार्यप्रणाली प्रतिदिन लचर होती जा रही है। भाजपा जहां हाईकोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रही है वहीं कांग्रेस इस परिस्थिति के लिए सारा दोष भाजपा पर मड़ रही है। राजनीति चक्की में जनता पिस रही है।
बड़े डिफाल्टरों को दी जा रही राहत
निगम की आय का मुख्य साधन प्रॉपर्टी टैक्स है। ट्विन सिटी में करीब 80 हजार यूनिट हैं, मगर 37 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स अब भी बकाया है। टैक्स वसूली के लिए निगम द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। यदि टैक्स वसूली समय पर हो तो निगम की हालत इतनी दयनीय न हो। इसी वर्ष अगस्त तक निगम ने वसूली का अभियान चलाया तो करीब पौने दो करोड़ रुपये निगम के खजाने में आ गए थे। इसमें 1.25 करोड़ रुपये अंबाला सिटी और 45 लाख रुपये सदर जोन में जमा हुए थे। इसके बाद बड़े डिफाल्टरों पर कार्रवाई की तैयारी की गई थी। करीब 375 लोगों की सूची तैयार की गई थी जोकि बड़े डिफाल्टर थे। इनमें कई डिफाल्टरों पर 20 लाख रुपये से ज्यादा टैक्स बकाया है। सिटी में करीब 225 बड़े डिफॉल्टरों की सूची बनाई गई थी जबकि सदर जोन में 150 डिफाल्टर की सूची बनी थी, मगर किसी पर आज तक कोई कार्रवाई निगम द्वारा नहीं की गई।
यह कार्य भी हो रहे प्रभावित
निगम में इस समय ट्विन सिटी के वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। निगम द्वारा लोगों से कूड़ा कलेक्शन का चार्ज लिया जाता है और इसके बिल भी बीते वर्ष भेजे गए थे, मगर बावजूद इसके कूड़ा कलेक्शन की सही व्यवस्था अब तक नहीं बन पा रही है। कूड़ा कलेक्शन के लिए दो बार निगम ने टेंडर निकाले, मगर अब तक कोई ठेकेदार ही आगे नहीं आया है। इसी तरह लावारिस पशुओं, स्ट्रीट डॉग्स, स्ट्रीट लाइट एवं अन्य कार्य बेहाल है।
यह बोले पूर्व पार्षद
- भाजपा सरकार ने हमेशा से ही द्वेष की राजनीति की है। सरकार की आरंभ से ही निगम भंग करने की मंशा थी। यदि निगम भंग करने की घोषणा न होती तो अब तक अंबाला में भी निगम चुनाव हो चुके होते। आज निगम में किसी का नियंत्रण नहीं है, निगम अधिकारी विहीन है, पार्षद है नहीं जिस कारण स्टाफ पर भी कोई नियंत्रण नहीं है।
-चित्रा सरवारा, पूर्व पार्षद।
- निगम में न अधिकारी है न ही स्टाफ, कोई जवाबतलब तक करने वाला नहीं है। जनता को प्रतिदिन दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। पहले पार्षद जनहित कार्यों को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों के सिर पर खड़े रहते थे, मगर अब ऐसा नहीं है। भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और परेशान पब्लिक हो रही है।
जरनैल सिंह माजरा, पूर्व पार्षद।
- निगम में कोई सरकार इस समय नहीं है, लोग परेशान हो रहे हैं और यदि स्थिति रही तो आने वाले समय में परेशानी और बढ़ेगी। निगम में जो कार्य पहले एक दिन में होता था अब उस कार्य के लिए लोगों को कई दिन लग रहे हैं। इस कारण जनता परेशान है। निगम से अंबाला का विकास हो रहा था, मगर अब विकास कार्य काफी पीछे चले गए हैं।
-दलीप चावला बिट्टू, पूर्व पार्षद।