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- पंचकूला के बाद अंबाला कैंट अस्पताल में आरंभ हुई सेवा

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पीजीआई जाने की जरूरत नहीं अब सिविल अस्पताल में होगी डेंटल इंप्लांट सर्जरी
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
प्रदेश में पंचकूला के बाद अंबाला दूसरा ऐसा जिला बन चुका है जहां डेंटल इंप्लांट सर्जरी शुरू हो चुकी है। अब मरीज को हादसे या किसी अन्य कारण से दांत हिलने, आधा टूट जाने के बाद दांत को निकलवाने पीजीआई या प्राइवेट अस्पताल में जाने की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि अब यह सुविधा अंबाला के नागरिक अस्पताल में भी मिलेगी। बता दें कि पीजीआई के लेवल पर मरीज को ट्रीट किया जा सकेगा। अब तक जनरल अस्पताल में दांतों को इंप्लांट नहीं किया जाता था, लेकिन अब इस सुविधा के बाद मरीजों को चंडीगढ़ नहीं जाना पड़ेगा। जानकारी मुताबिक अंबाला में यह सुविधा 4200 में मिलेगी जबकि प्राइवेट अस्पताल में 12 से 25 हजार तक खर्च आता है।

कंपनी को इंप्लांट का खर्च और निशुल्क सर्जरी करेगा विभाग
दरअसल सरकार ने इंप्लांट करने वाली कंपनियों से टाईअप किया है जिसमें इंप्लांट लगने का खर्च कंपनी को जाएगा तथा उस पर होने वाली सर्जरी सरकार निशुल्क करेगी। इसके अलावा मरीज जिस कंपनी की इंप्लांट सर्जरी करवाना चाहता है उसका चार्ट भी अस्पताल में लगाया गया है।
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दो-तीन घंटे में ही मरीज को मिल जाती है राहत
जानकारी मुताबिक इंप्लांट सर्जरी की मदद से दो से तीन घंटे में ही मरीजों को राहत मिल जाती है। दरअसल इंप्लांट के आकार का मसूड़े में ड्रिल से रूट बनाया जाता है। इससे दांत की लंबाई और चौड़ाई पता चल जाती है। इसके बाद मसूड़े के भीतर मौजूद हड्डी के अंदर ड्रिल से 3-4 एमएम का छेद बनाया जाता है। छेद करने के बाद इंप्लांट को उसमें स्क्रू और दो टांके की मदद से टाइट कर देते हैं और कैप (नकली दांत) लगा दिया जाता है। इसके अलावा दांत निकालने के साथ नया दांत लगाने के बाद मरीज को खाने-पीने में कोई दिक्कत नहीं होती है। इंप्लांट सर्जरी शुरू होने से अब तक तीन केस आ चुके हैं।

क्या है इंप्लांट
डेंटल स्पेशलिस्ट डॉ. अनुभा मल्होत्रा ने बताया कि डेंटल इंप्लांट एक नई तकनीक है जो सर्जरी के जरिए की जाती है। सबसे पहले टाइटेनियम नाम के धातु को जबड़े में डाल दिया जाता है और वह हमेशा के लिए रहती है। इसे 2-3 महीने तक मुंह में रखा जाता है जिससे ये आस्टियोइंटिग्रेशन के माध्यम से आपस में जुड़ जाए, इससे डाला गया स्क्रू हमेशा के लिए फिट हो जाये। तीन महीने बाद स्क्रू के ऊपर एक क्राउन (प्रोस्टेथिक श्वर्क) लगा दिया जाता है। यह दांत और पूरे जबडे़ और पूरे जबड़े के लिए इंप्लांट किया जा सकता है। लेकिन अब मेटल फ्री क्राउन का प्रयोग हो रहा है, इससे डेंचर्स से छुटकारा मिल जाएगा।
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कंपनी के नाम चार्जिंग
ऐडिन 4200
जेनेसिस 3696
एक्यूनोक्स 7000
कॉवेल मेडी 8000
नॉरिसो 4200


पंचकूला के बाद अंबाला में इंप्लांट सर्जरी शुरू हो चुकी है जिसका खर्च 4200 रुपये है। अभी तक तीन केस आए हैं। इस सुविधा से मरीज को पीजीआई या प्राइवेट अस्पताल में जाने की जरूरत नहीं है। इंप्लांट का खर्च कंपनी को जाएगा तथा इस दौरान होने वाली सर्जरी अस्पताल की तरफ से निशुल्क होगी। -डॉ. अनुभा मल्होत्रा, डेंटल स्पेशलिस्ट, नागरिक अस्पताल, अंबाला।
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