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150 किमी दूर कबड्डी सीखने वाली सुनीता ढाका बनी महिलाओं की ढाल

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150 किमी दूर कबड्डी सीखने वाली सुनीता ढाका बनीं महिलाओं की ढाल
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चूल्हा-चौका छोड़कर छू लिया आसमां कालम
फोटो - 100
बहन ने ट्यूशन पढ़ाकर उठाया प्रशिक्षण का सारा खर्च
2007 में कबड्डी एशिया चैंपियनशिप में हासिल किया था गोल्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला शहर। रोजाना 150 किलोमीटर दूर कबड्डी सीखने वाली सुनीता आज अंबाला में महिलाओं की ढाल बनी हैं। जिला महिला थाने में बतौर एसएचओ सुनीता ढाका ने पहली बार कमान संभाली है। वहीं उनकी यह लगातार दूसरी सफल पोस्टिंग भी है। 2015 में वह सब इंस्पेक्टर से पदोन्नत कर पानीपत से अंबाला में इंस्पेक्टर बनाकर ट्रांसफर की गई थी। नवंबर 2017 से वर्तमान समय तक करीब 35 फीसदी लंबित केसों का निपटारा सुनीता कर चुकी हैं। ढाका मूलत: रोहतक के गांव सुडाना की रहने वाली हैं। सुडाना से वह मदीना में अपने कोच के पास कबड्डी का प्रशिक्षण लेने जाती थी, जोकि 150 किलोमीटर पड़ता था। वर्ष 2000 में पहली बार वहां खेलने गई थी। मदीना की कोच उस समय पूरे हरियाणा में प्रसिद्ध थी। उन्होंने ही उनकी प्रतिभा को देखते हुए खुद सुनीता का सिलेक्शन किया था। ढाका ने कबड्डी में अपनी इस कदर प्रतिभा दिखाई की राज्य से लेकर राष्ट्रस्तरीय प्रतियोगिताओं में अपना लोहा मनवाया। 2007 में एशिया चैंपियनशिप में कबड्डी में उन्होंने गोल्ड हासिल किया था। इसी की बदौलत सीधे सब इंस्पेक्टर भर्ती हुई।
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परिजनों ने खड़े कर दिए थे हाथ, बहन ने हौसला बढ़ाया
2000 का वह दौर बेहद कठिन था। बतौर सुनीता उस समय लड़कियों का घरों से निकलना किसी चुनौती से कम नहीं था। पिता किसान हैं, इसीलिए वह खेल पर इतना खर्च नहीं कर सकते थे। बेटी को इतनी दूर घर से भेजना वह भी आसान नहीं था। इसीलिए पिता ने पूरी तरह से हाथ खड़े कर दिए थे। लेकिन बहन सुमन ने सुनीता का हौसला बढ़ाया। सुमन ने ट्यूशन पढ़ाकर उन्हें प्रशिक्षण दिलाया। इसीलिए आज भी सुनीता अपनी बहन सुमन का एहसान नहीं भूलती और पूरा क्रेडिट उन्हीं को देती हैं।
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