अंबाला। नगर परिषद प्रशासन पर मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना लागू करने में धीमी गति का आरोप लगाते हुए इनेलो प्रदेश प्रवक्ता ओंकार सिंह ने कहा कि उन्होंने तीन जुलाई को जनसूचना अधिकारी से सूचना मांगी थी, लेकिन अब तक ये जानकारी नहीं दी गई।
उनकी मांग थी कि डेढ़ वर्ष पूर्व प्रदेश में लागू मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना के तहत छावनी में कितने किरायदारों अैर कब्जाधारियों को मलिकाना हक दिया, उनसे कितनी रकम प्राप्त हुई, कितने व्यक्तियों ने योजना के लाभ के लिए आवेदन किया, कितनों के प्रार्थना पत्र अस्वीकार किए गए, अस्वीकार करने के कारण सहित पूरे विवरण की सत्यापित प्रति दी जाए।
नगरपरिषद के 10 अक्टूबर के प्राप्त पत्र के अनुसार सूचना देने की तिथि तक मात्र 145 प्रार्थियों को योजना का लाभ दिया गया और 243 प्रार्थियों का आवेदन रद्द कर दिया गया। प्रार्थियों से कुल 9 करोड़ 41 लाख और 61 हजार 148 रुपये की राशि प्राप्त की गई। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मलिकाना हक योजना एक जुलाई 2021 से शुरू की गई थी। हरियाणा सरकार का संकल्प था कि अब शहरी संपत्तियों के विवादों का स्थायी रूप से निपटान करते हुए पालिकाओं की भूमि पर 20 वर्ष या इससे अधिक वर्षों तक काबिज लोगों को योजना के तहत मालिकाना हक दिया जाए।
नगरपरिषद में भी लाभार्थियों ने तीन जुलाई 2021 से जरूरी दस्तावेजों सहित संभावित राशि नगरपरिषद में जमा करवा दी थी, लेकिन नगरपरिषद अधिकारियों ने अगस्त 2023 में रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू की। इस देरी के लिए जिम्मेदार कौन है, इसकी जांच होनी चाहिए। दो वर्ष से अधिक समय के लिए प्रार्थियों को इंतजार क्यों करवाया गया। यहां प्रश्न यह भी उठता है कि सिर्फ 145 लोगों को ही मलिकाना हक क्यों मिला, जबकि नगरपरिषद के लगभग एक हजार किरायेदार हैं। इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान करके यहां के निवासियों को राहत पहुंचाई जाए।