22 ड्राइवर और 21 कंडक्टर सस्पेंड किए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवा प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। रोडवेज के अंबाला डिपो से 43 कर्मचारियों को सस्पेंड करने के बाद से कई रूटों पर बस सेवा प्रभावित हुई है। अधिकतर रूट ग्रामीण क्षेत्र के हैं। जानकारी के अनुसार अंबाला रोडवेज डिपो के 43 कर्मचारियों को सस्पेंड किए जाने का सीधा असर रोडवेज के काम पर पड़ रहा है, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। रोजाना बसों में सफर करने वाले लोग इन दिनों बसों की किल्लत से जूझ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार रोडवेज के बेड़े में पहले से ही बसों की कमी है जिसको लेकर यूनियन कई बार गुहार लगा चुकी है। पिछले महीने भी अंबाला डिपो की कुछ बसों को कंडम करार देते हुए सड़क पर न उतारने के लिए आदेश दिए जा चुके हैं। पिछले दिनों रोडवेज में 720 बसों को किलोमीटर के आधार पर लेने की योजना शुरू की गई तो यूनियनों ने इसका विरोध किया और सरकार ने एस्मा लगा दिया जिसके चलते अंबाला के 43 कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया और बाद में उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। अंबाला में लगभग 22 ड्राइवर और 21 कंडक्टर सस्पेंड किए गए जिससे लगभग 20 बसें बुरी तरह से प्रभावित हुई। इन बसों को रोडवेज डिपो में ही खड़ा कर दिया गया। यह बसें अंबाला के विभिन्न ग्रामीण रूटों की थीं जिससे ग्रामीण क्षेत्र में बस सेवा बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। कर्मचारियों को सस्पेंड करने से रोडवेज के राजस्व में भी हानि हो रही है। बसें रोजाना 6000 किलोमीटर तक चलती थीं। सरकार को हजारों रुपये राजस्व भी देती थीं, लेकिन जब से कर्मचारियों को सस्पेंड किया है लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है और उन्हें अधिक धन खर्च कर निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस संबंध में यूनियन नेता रमन सैनी का कहना है कि सरकार का यह जल्दबाजी में लिया गया फैसला है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात कहने का अधिकार है। सरकार को सस्पेंड किए गए कर्मचारियों को तुरंत बहाल करना चाहिए। उन्हें लोगों की समस्या को भी देखना चाहिए।