अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। सिटी विधानसभा क्षेत्र के गांव जैतपुरा और सुल्लर की गोशालाओं में हाल ही में हुई लगभग एक दर्जन गायों की मौत के बाद सरकार एक बार फिर कटघरे में आन खड़ी हुई है। लगातार जिले में गोवंशों की मौत हो रही है जबकि स्थानीय मंत्री व विधायक गोवंश के संरक्षण के लिए नीतियां बनाने की बात कर रहे हैं।
प्रदेश के स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज पूर्व में गाय को जहां राष्ट्रीय पशु घोषित करने की वकालत कर चुके हैं, वहीं अंबाला सिटी के विधायक असीम गोयल ने गाय को राष्ट्रीय पशु की संज्ञा देने के बजाय इसे राष्ट्रीय धरोहर या राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किए जाने की बात कही है। हाल ही में गांव जैतपुरा में चल रही अवैध गोशाला में जहरीला पानी पीने से हुई सात गायों की मौत और सुल्लर की गोशाला में हुई चार गायों की मौत ने सरकार की कार्यशैली को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
विधायक असीम गोयल ने कहा कि हमारी सरकार ने गोवंश की सुध लेने का काम किया। गोमाता की जो बेकदरी और जो अनादर पिछली सरकारों ने किया उसे हम ठीक करने में लगे हैं। यह भावना की बात है कि लोग गाय को माता कहते हैं तो उसे पशु तो कहा ही नहीं जा सकता। हमारा तो यह मानना है कि गाय को राष्ट्रीय संपत्ति या राष्ट्रीय धरोहर के तौर पर सहेज कर सम्मान दिया जाना चाहिए। हमारी सरकार गोमाता के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है।
पंचायत को वापस की गई जमीन : गोयल
गोयल ने बताया कि जैतपुरा में हुई गायों की मौत के बाद प्रशासन ने वहां पर अवैध गोशाला चला रहे लोगों पर कार्रवाई करते हुए वहां से गायों को सुल्लर की गोशाला में शिफ्ट किया और जमीन से कब्जा छुड़वाकर पंचायत को वापिस कर दी है। सुल्लर कि गोशाला में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा की ओर से दी गई मदद का पैसा यहां लगाया गया है और आगे भी यहां जिस चीज की जरूरत होगी वो सरकार मुहैया करवाएगी। सरकार के साथ-साथ गाय की रक्षा के लिए समाज को भी आगे आना होगा।