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रोडवेज व ट्रांसपोर्टरों को करोड़ों का फटका
- रोडवेज की करीब 215 बसें रही बंद, जिला के ट्रांसपोर्टरों को भी नुकसान
- कारोबार पूरी तरह से ठप रहा, जबकि अभी भी सुरक्षा के चलते ट्रांसपोर्टर नहीं ले रहे कोई रिस्क
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। डेरा मुखी को दोषी करार दिए जाने से पहले व बाद में पैदा हुए हालातों ने जिला रोडवेज डिपो सहित ट्रांसपोर्टरों को करोड़ों रुपये का फटका लगा दिया है। हालात यह हैं कि इन तीन दिनों में जहां कामकाज ठप पड़ा है, वहीं नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। इतना ही नहीं प्राइवेट वाहन चालकों व ट्रांसपोर्टरों को अच्छा खासा नुकसान हुआ है। हालांकि दावा किया जा रहा है कि स्थिति सामान्य होती जा रही है, लेकिन लोग रिस्क नहीं लेना चाहते।
बीते करीब तीन दिनों से बंद रोडवेज की बसों व ट्रांसपोर्टरों को करोड़ों रुपये का फटका लग चुका है। डेरा प्रकरण के कारण जो हालात बने उसे देखते हुए रोडवेज विभाग ने 24 अगस्त से अपनी बसों का संचालन बंद कर दिया था। जिला रोडवेज डिपो की करीब 215 बसे ऑन रूट नहीं रही, जबकि दूसरी ओर ट्रांसपोर्टर्स ने भी सुरक्षा के मद्देनजर अपने ट्रकों को आगे नहीं भेजा। ऐसे में दोनों स्तरों पर अच्छा खासा नुकसान हुआ है। रोडवेज की मानें तो इन तीन दिनों में विभाग को लगभग 65 लाख रुपये तक का नुकसान हो चुका है। इसके साथ ही जिला में परिवहन समितियों की करीब 52 बसें भी रूट पर नहीं चलीं, जबकि छोटे रूटों पर आवाजाही रही। इनको भी इन तीन दिनों में लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है।
उधर, ट्रांसपोर्टरों की मानें, तो जिस तरह से हालात पैदा हुए हैं, उसे देखते हुए तीन दिनों तक तो कारोबार लगभग ठप ही रहा है। किसी ने अपने रिस्क पर अपने ट्रक आगे भेजे, कहा नहीं जा सकता, लेकिन अधिकतर ने अपना कारोबार ठप ही रखा। ट्रांसपोर्ट का काम करने वाले लखबीर सिंह, मामराज, जमनादास का कहना है कि सामान लोडिंग और अनलोडिंग का काम है। जिस तरह से डेरा प्रकरण के कारण हालात पैदा हुए, तीन दिनों तक तो कोई रिस्क नहीं लिया। हालांकि जिला स्तर पर काम थोड़ा बहुत होता रहा, लेकिन दिल्ली, पंजाब सहित हिंसा प्रभावित राज्यों में वाहन नहीं भेजे। कारोबारियों का माल अभी रुका हुआ है, जबकि जैसे-जैसे स्थिति सामान्य होती जाएगी, कारोबार शुरू होगा।
यात्रियों में दहशत का माहौल
जिस तरह से डेरामुखी को दोषी करार देने के बाद हिंसा हुई, उसे देखते हुए यात्रियों की संख्या काफी कम रही है। रविवार को कुछ ट्रेनें चलीं, जबकि बसों का संचालन भी शुरू किया गया है। कैंट बस स्टैंड पर बसों की आवाजाही काफी कम रही, जबकि यात्रियों की संख्या भी पहले के मुकाबले कम है। रोडवेज विभाग भी मान रहा है कि अभी यात्री कोई रिस्क नहीं ले रहे हैं, जबकि दहशत का माहौल भी है। स्थिति सामान्य होने के बाद बसों में भीड़ बढ़ेगी।
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तीन दिनों तक रोडवेज की बसें बंद रहीं, जिससे लाखों का नुकसान हुआ है। रोजाना कम से कम 17 लाख रुपये तक की आमदनी है, जबकि इस दौरान यह आमदनी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। हालांकि अब स्थिति सामान्य हो रही है, जिसके चलते बसों का संचालन शुरू किया गया है।
- कुलधीर सिंह, जीएम रोडवेज डिपो अंबाला