मेहनत कर मिलेगा फल, आज नहीं तो मिलेगा कल। है हिम्मत तो निकल और चल तोड़ दो साहस से चुनौतियों की दल-दल। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी के 12वीं कक्षा के जिला टापर ने चुनौतियों की दल-दल को साहस से तोड़कर इन पंक्तियों के मायने साध दिए। न केवल अपना और स्कूल का नाम रोशन किया बल्कि फिसड्डी जिलों में शामिल होने का कलंक इन्हीं होनहारों ने इस बार अपनी मेहनत से धो दिया। जिले में दुखेड़ी स्कूल की प्रियांशी ने 97.4 प्रतिशत अंक लेकर टाप किया। टाप थ्री में कुल 11 विद्यार्थी शामिल हुए। इनमें से 10 बेटियां हैं। केवल तंदवाल के राजकीय स्कूल में पढ़ने वाला साहिल ही टाप थ्री में शामिल हो सका। हालांकि बोर्ड द्वारा जारी टॉपर की सूची में साइंस संकाय से किसी भी होनहार का नाम जारी नहीं किया गया।
जिले में 97.4 प्रतिशत अंक लेकर टाप करने वाली दुखेड़ी राजकीय सीसे स्कूल की प्रियांशी अध्यापक बनना चाहती है। प्रियांशी के पिता गोरखपाल करियाना की दुकान चलाते हैं, जबकि मां सरिता गृहिणी हैं। उसने कला संकाय में यह अंक हासिल किए हैं। अमर उजाला से बातचीत में प्रियांशी ने कहा कि उसे अभी तक नहीं पता कि उसके कितने अंक आए हैं। प्रियांशी संयुक्त परिवार में रहती है। उसके ताऊ शिवराम व सुशील और अनिल भी परिवार में रहते हैं जबकि उसका एक छोटा भाई भी है। प्रियांशी ने बताया कि वह स्कूल से आते ही होम वर्क में जुट जाती थी। इसके अलावा नियमित रूप से जनरल नॉलेज भी पढ़ती थी।
पिता सिक्योरिटी गार्ड, बेटा बनना चाहता है आईएएस
गांव तंदवाली बराड़ा का रहने वाला साहिल आईएएस बनना चाहता है। साहिल ने कला संकाय में 96.8 प्रतिशत अंक हासिल कर अपने माता-पिता व स्कूल का नाम रोशन किया है। साहिल के पिता राकेश कुमार मुलाना यूनिवर्सिटी में सिक्योरिटी गार्ड हैं। मां शीला हाउस वाइफ। राजकीय सीसे स्कूल तंदवाल में पढ़कर साहिल ने टाप किया। रात साढ़े 8 बजे टीम अमर उजाला ने जब साहिल के पिता को फोन किया तब तक उन्हें नहीं पता था कि उनके बेटे ने जिला टापर में जगह बनाई है। आज तक साहिल ने इनरायॅर्ड मोबाइल नहीं चलाया था। न ही परिवार के पास है। इस तरह सोशल मीडिया से दूरी बनाकर उसने यह मुकाम पाया। पिता ने कहा था कि 12वीं टाप करने के बाद एनरायर्ड मोबाइल दिलाउंगा। ऐसे में अब उसका सपना पूरा होगा।
97.2 अंक लेकर जिले भर में ओवर ऑल दूसरा और कॉमर्स में टापर करने वाली पीकेआर जैन गर्ल्स स्कूल की राशि का सपना है कि वह आईएएस बन देश की सेवा करे और देश के उत्थान में अपना योगदान दे। राशी ने बताया कि उनके पिता विकास गुप्ता बिजनेस मैन और मां मोनिका गुप्ता गृहिणी है। वह प्रतिदिन अपना लक्ष्य निर्धारित कर पढ़ाई करती थी और जितना भी पढ़ती थी उसे पूरे ध्यान से पढ़कर समझती थी। जिस कारण उन्हें परीक्षा के दिनों में ज्यादा परेशानी नहीं झेलनी पड़ी। हालांकि उन्हें उम्मीद थी कि वह और बेहतर अंक लाएंगी। उनके अंग्रेजी में 87, हिंदी में 99, बिजनेस में 100, एकांउट्स में 100, गणित में 100 अंक हासिल किए हैं।
बहन को पढ़ाकर 10वीं में दिलवाए 90 प्रतिशत अंक, अब खुद जिले में हासिल किया चौथा स्थान
गांव मरदोसाहिब की रूपिंद्र कौर ने जहां अपनी छोटी बहन किरणदीप कौर की पढ़ाई में मदद करते हुए 10वीं कक्षा में 90 प्रतिशत अंक हासिल करवाए थे। वहीं अब राजकीय स्कूल माजरी से ही 12 वीं के आर्ट्स स्ट्रीम में 96.6 अंक लेकर जिले भर में चौथा स्थान हासिल किया है। बता दें कि रूपिंद्र कौर के पिता गुलविंद्र सिंह मजदूरी कर घर का गुजारा चलाते हैं। जबकि मां गृहिणी है। रूपिंद्र कौर ने बताया कि वह आईएएस बनकर देश की सेवा करना चाहती है। रुपिंद्र कौर ने अंग्रेजी में 99, हिंदी 98, इकोनॉमिक्स में 93, हिस्ट्री में 98 और आईटी में 95 अंक हासिल किए हैं।
ज्योति आईपीएस बन महिला सशक्तीकरण को देना चाहती है बढ़ावा
राजकीय स्कूल कोड़वा खुर्द से पढ़ाई कर जिले भर में चौथा स्थान हासिल करने वाली ज्योति आईपीएस बन महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करना चाहती है। ज्योति ने बताया कि उनके पिता राम कुमार बिजली बोर्ड में कार्यरत है। जबकि माता मनप्रीत कौर गृहिणी है जो कि उनकी पढ़ाई में मदद करती थी। उन्होंने आर्ट्स में अंग्रेजी में 90, हिंदी में 99, हिस्ट्री में 97, पॉलिटिकल में 99 और पंजाबी में 98 अंक हासिल किए हैं।
पिता कपड़े की फेरी लगाकर चलाते है घर का गुजारा, बेटी ने जिले में हासिल किया चौथा स्थान
केपीएके महाविद्यालय से कॉमर्स में पढ़ाई कर चुकी अंजली ने स्कूल में प्रथम और जिले में चौथा स्थान हासिल किया है। जो कि न्यू शिवालिक कॉलोनी की रहने वाली है। अंजली के पिता दलीप कुमार कपड़े की रेहड़ी लगाकर घर का गुजारा चलाते हैं। जबकि मां पूनम रानी गृहिणी है। उन्होंने बताया कि वह बैंकिंग क्षेत्र में आकर बैक मैनेजर बनना चाहती है। जिससे कि उनके घर की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके। उनके अंग्रेजी में 96, हिंदी 98, बिजनेस में 97, अंकाउट्स में 98, गणित में 97 अंक हासिल किए हैं।
खेड़की खानुपर नारायणगढ़ की श्वेता ने 481 अंक लेकर कामर्स संकाय में तीसरा स्थान पाया है। श्वेता के पिता बलवान सिंह किसान हैं और अब श्वेता बीकाम कर सीए बनना चाहती है। श्ेवता को भी रात तक नहीं पता था कि उसका जिला टापर में नाम आया है। श्वेता ने बताया कि परीक्षाओं में तो पढ़ने का कोई समय ही नहीं था। अमूमन वह तीन घंटे सुबह और तीन घंटे रात को घर में पढ़ती थी। श्वेता न्यू आदर्श सीसे स्कूल की छात्रा है। स्कूल संचालक तरसेम सैनी ने बेटी को बधाई दी।
सीए बनकर करना चाहती है परिवार का नाम रोशन
जैन गर्ल्ज सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा ने कॉमर्स में 96.8 अंक हासिल कर टॉप किया। प्रियंका ने बताया कि उनके परिवार में बैंकिंग के अलावा अन्य फिल्ड में तो सभी है, लेकिन सीए कोई नहीं है। इसलिए वह सीए बनकर परिवार का नाम रोशन करना चाहती हूं। पिता राजिंद्र कुमार रिटायर्ड पटवारी व मां रानी गृहिणी है। बड़ी बहन पारूल व छोटे भाई वंश ने हर मौके पर पूरी मदद की और हमेशा उसका हौंसला बढ़ाया। स्कूल के अलावा वह घर में चार व पांच घंटे व टयूशन भी जाती थी। सोशल मीडिया का इस्तेमाल केवल स्कूल से आने वाली जानकारी के लिए किया करती थी। प्रिंसिपल उमा शर्मा ने हमेशा उन्हें टॉपर बनने के लिए प्रेरित किया और उसी दिशा में मार्ग दर्शन भी किया।
अध्यापक बनने का है जसप्रीत कौर का सपना
गांव भूडंगपुर की रहने वाली जसप्रीत कौर ने कला संकाय में 481 नंबर हासिल कर जिले के टॉप थ्री में स्थान पाया है। जसप्रीत कौर के पिता दारा सिंह किसान हैं और मां अमरजीत कौर गृहिणी हैं। बहन सुखविंद्र कौर बीए कर रही हैं और एक छोटा भाई गुरजतन सिंह 10वीं में हाल ही में 70 प्रतिशत अंक लेकर उत्तीर्ण हुआ है। जसप्रीत अंबाला शहर के सूर्या पब्लिक स्कूल की छात्रा है। जसप्रीत को भी रात तक नहीं पता था कि उसने टाप किया है।
आइलेट्स कर विदेश जाने का है संजम का सपना
नारायणगढ़ के ही लखनौरा गांव की संजम ने 482 अंक लेकर टाप थ्री में स्थान पाया है। संजम भी न्यू आदर्श सीसे स्कूल की छात्रा है। संजय ने बताया कि उसे विदेश जाना है और विदेश जाने के लिए अब वह आईलेट्स की तैयारी कर रही है। संजम के पिता दिलबाग खेती करते हैं। संयुक्त परिवार में संजम रहती है। संजम ने कभी ट्यूशन नहीं रखी और सेल्फ स्टडी से ही इतने अंक हासिल किए। संजम से जब टीम अमर उजाला ने परिणाम पूछा तो उसने बताया कि अभी साइट ही नहीं खुल रही है। इसीलिए उसे परिणाम के बारे में जानकारी नहीं है।
बड़ी बहन नहीं बन सकी सीए तो अब कोमल ने बनाया अपना लक्ष्य
पीकेआर जैन गर्ल्ज सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा कोमल ने कॉमर्स में 96 प्रतिशत अंक हासिल कर स्कूल में अव्वल रही। कोमल का कहना था कि उनके पिता का सपना था कि उनकी बड़ी बेटी यानी उसकी बहन ज्योति सीए बने। बारहवीं में टॉपर बनने के बाद बहन ने आगे जाकर अपनी फिल्ड बदल ली थी। तभी उसे सोच रखा था कि पापा का सपना वह खुद सीए बनकर पूरा करेगी। उसी सपने को पूरा करने के लिए सेल्फ स्टडी कर रोजाना चार घंटे घर पर भी पढ़ती थी। पिता श्याम मनोहर की हैंडलूम की शॉप है और मां सीमा गृहिणी है।