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संशो--------विधायक व सांसद ने ज्ञापन लेने से इंकार किया तो मंत्री को सौंपा

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अमर उजाला ब्यूरो
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अंबाला सिटी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी शनिवार को पंचायत भवन अंबाला शहर में भाजपा अनुसूचित जाति प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में पहुंचे। इस दौरान जहां उन्होंने मौजूदा सरकार द्वारा दलितों को दी जाने वाली सुविधाओं का विवरण किया, वहीं बैठक में कुछ दलित अपनी समस्या लेकर भी पहुंचे। इस दौरान भाजपा एससी मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दीपक बिडलान ने नेतृत्व में नाहन हाउस के खोखा संचालक विधायक को ज्ञापन देने पहुंचे। बिडलान का आरोप है कि विधायक असीम गोयल ने ज्ञापन लेने से मना कर दिया। यह ज्ञापन सांसद रत्नलाल कटारिया को देना चाहा तो उन्होंने भी इसे लेने से इंकार कर दिया। बाद में यह ज्ञापन मंत्री कृष्ण बेदी ने लिया।
गौरतलब है कि शुक्रवार को शहर में नाहन हाउस स्थित नगर निगम की टीम अवैध बने खोखों को हटाने पहुंची थी। इस दौरान कुछ लोगों के विरोध पर टीम को बैरंग लौटना पड़ा था। इसी के तहत वह लोग शनिवार को मंत्री कृष्ण बेदी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे। लोगों ने बताया कि शहर में सरकार की तरफ से उन्हें मीट मार्केट उपलब्ध नहीं करवाई गई, जिस वजह से वह सड़क किनारे अपनी दुकानें लगाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम द्वारा उनके इन खोखों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने सीएम से अपील की कि उनकी समस्या का समाधान किया जाए।उन्हें इस समस्या से निजात दिलवाई जाए, ताकि वे अपना व परिवार का पालन-पोषण बिना किसी प्रशासनिक रोक-टोक के कर सकें।
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वहीं भाजपा एससी मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दीपक बिडलान ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब वह ज्ञापन देने के लिए बैठक में शहर विधायक असीम गोयल के पास पहुंचे तो उन्होंने ज्ञापन लेने से मना कर दिया और कहा कि ‘तू ज्यादा राजनीति कर रहा है, इस मामले में तू क्यों आ रहा है।’ इसके बाद उन्होंने ज्ञापन सांसद रतनलाल कटारिया को देना चाहा तो उन्होंने भी ज्ञापन लेने से मना कर दिया। बिडलान ने कहा कि वह भाजपा का सच्चा सिपाही है। अगर गरीबों का रोजगार छिनेगा तो आने वाले चुनावों में वह पार्टी को क्या वोट देंगे। बिडलान का कहना है कि यह खोखा संचालक करीब 40 साल से इन खोखों पर मीट का कारोबार कर अपने व परिवार को पालन पोषण कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम के पास ऐसा कोई कागज नहीं जिससे यह साबित हो सके कि यह जगह नगर निगम की है।
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