कॉमनवेल्थ गेम्स में अंबाला के जिम्नास्ट योगेश्वर का चयन
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
ऑस्ट्रेलिया में पांच अप्रैल से शुरू होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए अंबाला निवासी जिम्नास्टिक खिलाड़ी योगेश्वर सिंह का चयन हुआ है। सिलेक्शन ट्रायल के दौरान छह इवेंट में योगेश्वर ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिसके बाद अब उसका नाम कॉमनवेल्थ के लिए रवाना होने वाली पुरुष जिम्नास्टिक टीम में जुड़ गया है। शानदार खेल की बदौलत योगेश्वर साल 2015 में सेना में सीधे हवलदार पद पर भी भर्ती हुआ था। योगेश्वर के पिता गोपाल सिंह सिविल अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं और बड़ी बहन गरिमा को जिम्नास्ट करता देख योगेश्वर को इसके प्रति जुनून बढ़ा जिसके चलते अब वह 20 साल की उम्र में देश के लिए खेलेगा। साल 2013 में योगेश्वर का चयन वर्ल्ड स्कूल गेम्स ब्राजील के लिए हुआ था, उस समय आर्थिक परिस्थितियां आडे़ आईं, लेकिन एक स्कूल टीचर ने एफडी तुड़वाकर डेढ़ लाख रुपये की मदद की थी। हरियाणा से एकमात्र जिम्नास्ट खिलाड़ी योगेश्वर पहली बार कॉमनवेल्थ गेम में हिस्सा लेने को उत्साहित है।
योगेश्वर ने कहा कि मेडल हासिल करने के लिए पूरी जी-जान लगा देगा। योगेश्वर को कई सालों से ट्रेनिंग देने वाले अंबाला में जिम्नास्टिक कोच सुदर्शन कौशल ने बताया कि योगेश्वर और कैंप में मौजूद कोच ने उन्हें बुधवार को ही कॉमनवेल्थ गेम्स में चयनित होने की जानकारी दी है।
कनाडा में वर्ल्ड जिम्नास्टिक चैंपियनशिप में ले चुका हिस्सा
सेना में हवलदार योगेश्वर सिंह ब्राजील में साल 2013 में हुई वर्ल्ड स्कूल गेम्स और कनाडा में 2017 में हुई वर्ल्ड जिम्नास्टिक चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुका है। दो अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का अनुभव अब उसके पास है और तीसरी बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में वह देश के लिए मेडल हासिल करना चाहता है। योगेश्वर ने बताया कि जिम्नास्टिक के सभी छह इवेंट वॉल्टिंग टेबल, फ्लोर एक्सरसाइज, पोमेल हॉर्स, रोमन रिंग, पैरल्ल बार और होरिजेंटल बार में वह हिस्सा लेगा। कुछ दिन पहले दिल्ली में नेशनल कैंप के दौरान चयन के लिए ट्रॉयल हुए थे जिसमें योगेश्वर का प्रदर्शन जोरदार रहा। योगेश्वर अभी दिल्ली में ही प्रतियोगिता के तैयारियों में जुटा है। योगेश्वर के पिता गोपाल सिंह अंबाला कैंट के सिविल अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मी के पद पर कार्यरत है। उसके सिलेक्शन की जानकारी मिलते ही परिवार में खुशियों का माहौल है।
बड़ी और छोटी बहन राज्य स्तर पर खेली जिम्नास्टिक
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पिता का कुछ वर्ष पहले तक मामूली सैलरी में घर चलाना काफी मुश्किल होता था। मगर परिवार की सबसे बड़ी बेटी गरिमा का जिम्नास्टिक की ओर रुझान था और वह राज्य स्तर तक जिम्नास्टिक खेली। बड़ी बहन को खेलता देख योगेश्वर में भी इस खेल के प्रति जुनून छाया और आज वहीं जुनून है कि महज 20 वर्ष की उम्र में योगेश्वर कॉमनवेल्थ गेम्स में देश की ओर से खेलेगा। योगेश्वर के नक्शे कदम पर ही उसकी छोटी बहन भी चल रही है और वह भी जिम्नास्ट प्रतियोगिता के जूनियर वर्ग में राज्य स्तर तक अपना प्रदर्शन कर चुकी है।
एक समय था जब पैसे का था अभाव
2013 में पहली बार योगेश्वर का चयन वर्ल्ड स्कूल गेम्स ब्राजील के लिए हुआ था। योगेश को प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए करीब ढाई लाख रुपये की जरूरत थी। मगर अस्पताल में कार्यरत योगेश्वर के पिता गोपाल सिंह के पास इतनी राशि नहीं थी। पैसे के अभाव में योगेश्वर ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की उम्मीद तक छोड़ दी थी। मगर इसी बीच योगेश्वर की स्कूल टीचर ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया और अपनी एफडी तुड़वाकर परिवार को करीब डेढ़ लाख रुपये की मदद उपलब्ध कराई।
योगेश्वर को कई सालों तक ट्रेनिंग देने वाले अंबाला में जिम्नास्टिक कोच सुदर्शन कौशल ने बताया कि योगेश्वर और कैंप में मौजूद कोच ने उन्हें बुधवार को ही कॉमनवेल्थ गेम्स में चयनित होने की जानकारी दी है। यह बेहद गर्व की बात है कि योगेश्वर इस मुकाम तक पहुंचा है। वह मेहनती है और अपने बलबूते पर ही उसने कॉमनवेल्थ गेम्स का टिकट हासिल किया है। उससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें रहेंगी।