बच्चों को प्रतियोगी शिक्षा के साथ संस्कार युक्त शिक्षा भी जरूरी : देवव्रत
फोटो नंबर-----3, 4
चमन वाटिका कन्या गुरुकुल के वार्षिक समारोह ‘स्पंदनम’ में पहुंचे हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल
महिला शिक्षा के बिना समाज पूर्णता हासिल नहीं कर सकता : धनखड़
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि बच्चों को प्रतियोगी शिक्षा के साथ-साथ संस्कार युक्त शिक्षा भी जरूरी है। संस्कार युक्त नागरिक ही व्यक्तिगत हितों के साथ-साथ सार्वजनिक हितों की सोच से समाज और देश के नवनिर्माण में समर्पित भाव से सहयोग कर सकता है।
आचार्य देवव्रत शुक्रवार को चमन वाटिका कन्या गुरुकुल के वार्षिक समारोह ‘स्पंदनम’ में उपस्थित विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरुकुल परंपरा भारतीय संस्कृति की पहचान रही है और इस समय हरियाणा के कुरुक्षेत्र, नीलोखेड़ी व अंबाला में गुरुकुल शिक्षा प्रदान की जा रही है। अंबाला में कन्या गुरुकुल होने के कारण बेटियों को शैक्षणिक स्तर पर सक्षम बनाने के साथ-साथ शारीरिक तौर पर भी सक्षम बनाया जा रहा है, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के आह्वान को सही मायने में सार्थक किया जा सके। उन्होंने शिक्षा, खेल व सांस्कृतिक गतिविधियों में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि समय की सबसे बड़ी मांग है कि बेटियों को शिक्षा के पर्याप्त अवसर दिए जाएं। महिला शिक्षा के बिना समाज पूर्णता हासिल नहीं कर सकता और अधूरे समाज से देश को विश्व शक्ति बनाने की कल्पना नहीं की जा सकती।
इस मौके पर विद्यार्थियों द्वारा हरियाणवी, पंजाबी नृत्यों के साथ-साथ कथक, बाल नृत्य का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल की पत्नी और हिमाचल की प्रथम महिला दर्शना देवी, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. संजय शर्मा, विद्यालय के चेयरमैन राजिंद्र नाथ, समाज सेवी व व्यवसायी सुबोध गुप्ता, अनीता गुप्ता, एडी गांधी, प्रिंसिपल सोनाली शर्मा, डॉ. राजेंद्र विद्यालंकार, निशा जैन, जगदीश आर्य, सुदेश जैन मिट्ठा, राज्यपाल के ओएसडी डॉ. राजेंद्र मौजूद रहे।