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- महिलाएं बोली नोटबंदी के दौरान हुए झेलनी पड़ी उन्हें कई परेशानियां

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महिलाएं बोलीं - नोटबंदी से न सुधरे हालात, दावे हकीकत से कोसों दूर
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
नोटबंदी को बेशक एक साल बीत गया है, मगर महिलाओं के जेहन में आज भी नोटबंदी के दौरान हुई परेशानियां याद है। महिलाओं का कहना है कि सरकार ने बिना किसी तैयारी के नोटबंदी लागू कर दी थी जिस वजह से खासी परेशानी झेलनी पड़ी थी। कहीं शादी की तैयारियां थी तो कहीं जरूरी कार्य के लिए नकदी चाहिए थी। नकदी की किल्लत से घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया था। नोटबंदी का वह कठिन दौर अब भी उन्हें याद है और घर की बचत की राशि भी निकालकर उन्हें बैंकों में जमा करानी पड़ी थी। महिलाओं ने कहा कि सरकार आज भी कैशलेस प्रचलन का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। जरूरी सामान की वस्तु जब तक कैशलेस नहीं मिलती जब तक इसे सफल नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि अब भी यदि कार्ड से पेमेंट करते हैं तो उससे सर्विस टैक्स या सरचार्ज काट लिया जाता है। ऐसे में कैशलेस का क्या फायदा। सरकार ने जनता को परेशान किया है और आज भी जनता सरकार की गलत नीतियों को झेलने के लिए मजबूर हो रही है।

कैंट निवासी रेखा परुथी ने कहा कि सरकार ने नोटबंदी के तुरंत बाद कैशलेस व्यवस्था का दावा किया था। मगर आज एक वर्ष का समय बीत चुका है, क्या हम एक कदम भी कैशलेस व्यवस्था की ओर बढ़ पाए। आज भी जरूरी वस्तुओं के लिए कैश ही निकालना पड़ रहा है। अधिकतर दुकानदारों के पास पीओएस मशीनें नहीं है और बैंक ऐसे मशीनें उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो रहे हैं। यदि कार्ड से पेमेंट की भी जाती है तो उसपर से टैक्स काट लिया जाता है। बिजली या अन्य बिल यदि ऑनलाइन जमा कराए तो उसपर भी अतिरिक्त राशि काट ली जाती है। ऐसी व्यवस्था का क्या फायदा। सरकार के पास पूरा तंत्र नहीं है, और नोटबंदी जैसी खराब व्यवस्था को जनता पर थोप दिया गया।
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कैंट निवासी रेणु गुप्ता ने कहा कि नोटबंदी से घर की व्यवस्था ही अस्त-व्यस्त हो गई थी। यदि नोटबंदी करनी थी तो पहले इसके लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्था करनी चाहिए थी। नए नोट पर्याप्त मात्रा में नहीं होने के कारण जरूरी सामान लेने तक में दिक्कतें आई थी। नोटबंदी व्यवस्था कुछ लोगों पर शिकंजा कसने के लिए बनाई गई थी, मगर आम जनता को इससे काफी परेशानी हुई थी। सरकार को पहले ऐसे तंत्र का गठन करना चाहिए था जिससे लोगों को परेशानी न झेलनी पड़ती। बेशक एक वर्ष बीत चुका है, मगर आज भी लोग परेशानी झेल रहे हैं।

हरनीत कौर बताती हैं कि बीते साल वह परिवार सहित रिश्तेदारों के पास गए थे। एकाएक खबर मिली की पुराने नोट बंद हो गए हैं। उनके पास कम नकदी थी। जिस वजह से काफी परेशानी हुई। एटीएम में भी कैश नहीं मिला और रिश्तेदारों से कुछ राशि लेकर काम चलाना पड़ा। वापस लौटकर भी परेशानी खत्म नहीं हुई। परिवार में शादी थी और जरूरी कार्यों तक के लिए कैश नहीं मिला। आधे से ज्यादा इंतजाम उधारी में करने पड़े थे। बैंक में विवाह का कार्ड दिखाने के बावजूद भी पर्याप्त राशि नहीं मिली थी। विवाह में शॉपिंग तक प्रभावित हुई थी।

महेशनगर निवासी पूनम ने कहा कि नोटबंदी के दौरान जरूरी खर्च तक के लिए कैश की दिक्कत उत्पन्न हो गई थी। बैंक से महज कुछ राशि निकल रही थी। सरकार ने एकाएक निर्णय तो लिया, लेकिन लोगों की परेशानी खत्म करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की। बच्चों की फीस और जरूरी वस्तुओं तक के लिए कैश की दिक्कत हुई। यह समस्या विकट थी, लेकिन सरकार ने एकदम नोटबंदी कर लोगों को परेशानी में डाल दिया। वह स्वयं इससे परेशान रहे। कैशलेस समाज का दावा तो किया गया, मगर धरातल पर कुछ नहीं हुआ।
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कैंट निवासी ज्योत्सना वालिया ने बताया कि नोटबंदी के दौरान तो वस्तुओं के दाम तक बढ़ गए थे। सब्जी से लेकर राशन लेने में दिक्कत हुई। खरीदारी बुरी तरह प्रभावित रही। घंटों लाइनों में लगकर महज दो हजार रुपये मिल रहे थे। उनके जानकार का विवाह था और उसकी तैयारियों में नकदी की दिक्कत आई। पैसे निकालना तो दूर घर में पड़े पुराने नोट जमा कराने में भी लंबी कतारें बैंकों में लगी थी। यह गलत व्यवस्था थी जोकि जनता पर थोप दी गई। नोटबंदी के बाद सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि आर्थिक सुधार होंगे, मगर हुआ कुछ नहीं। उलटा महंगाई और अब बढ़ गई है।
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