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- जीएसटी कम नहीं हुआ तो व्यापक स्तर पर होगा विरोध

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अंबाला कैंट। साइंस इंडस्ट्री पर जीएसटी कम नहीं होता तो उद्यमी आरपार की लड़ाई लड़ेंगे। साइंटिफिक अप्रेंट्स मैन्यूफेक्चरर एंड एक्सपोटर एसोसिएशन ने इसका एलान कर दिया है। एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा कि 18 जून को जीएसटी काउंसिल की बैठक में यदि जीपएसटी कम नहीं हुआ तो उद्यमी संघर्ष का मार्ग अपनाएंगे।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष एपी बंसल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष उमेश गुप्ता, उपाध्यक्ष अश्विनी नागपाल, सतीश सैनी व अन्य ने कहा कि सरकार ने अंबाला के लघु उद्योग को खत्म करने का कार्य किया है। साइंस उपकरणों पर लग्जरी वस्तुओं की तरह सर्वाधिक 28 प्रतिशत जीएसटी प्रस्तावित कर दिया है। 90 प्रतिशत साइंस उपकरण की सप्लाई शिक्षण व मेडिकल संस्थानों में होती है। शिक्षण संस्थानों पर जीएसटी नहीं लगाया गया मगर उनपर 28 प्रतिशत जीएसटी थोपना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने बताया साइंस उपकरणों पर जीएसटी 28 प्रतिशत हुआ तो स्कूलों में बच्चों की फीस तक पर असर पड़ेगा। साइंस फीस में स्कूल बढ़ोत्तरी करेंगे। सरकार की नीति गलत है और इसमें संशोधन की आवश्यकता है। उद्यमियों ने मांग उठाई की सरकार साइंस इंडस्ट्री पर पांच से 12 प्रतिशत के बीच जीएसटी तय करें। उन्होंने उम्मीद जताई है कि 18 जून को जीएसटी काउंसिल की बैठक में इंडस्ट्री पर जीएसटी को लेकर विचार हो सकता है। इस अवसर पर विभिन्न साइंस एसोसिएशन की राष्ट्रीय संस्था कांफेडरेशन ऑफ एजुकेशनल साइंटिफिक ट्रेडर्स एसोसिएशन के कन्वीनर जसमीत सिंह ने कहा कि देशभर में साइंस उपकरण निर्माताओं को इकट्ठा किया जा रहा है। उद्यमियों ने बताया कि इस मसले को लेकर एसोसिएशन सदस्य दिल्ली में वित्त मंत्री अरुण जेतली से भी मुलाकात करेंगे। इस मौके पर एसोसिएशन से अशोक गुप्ता, अंकुर छाबड़ा, दिनेश अग्रवाल, मनीष गुप्ता, सोनू चोपड़ा, सचिन गोयल, अजय अग्रवाल आदि मौजूद रहे। बता दें कि अभी 11 जून को ही जीएसटी काउंसिल ने साइंस के चार उपकरणों पर जीएसटी 28 से घटाकर 18 प्रतिशत किया था, मगर उद्यमियों का कहना है कि इसका कोई लाभ उन्हें नहीं मिलेगा।
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